“अहंकार की सिलवटें”
क्या एक सास का खोखला अभिमान उसकी अपनी ही बेटी की इज्जत को दांव पर लगा सकता है? और क्या एक बहू, जिसे हमेशा ताने मिले हों, उसी घर की लाज बचाने के लिए अपनी ढाल आगे कर सकती है? नेहा अपनी सास, सुभद्रा देवी की बातें सुनकर चुप रही। वह जानती थी कि कुछ … Read more