ममता की छाँव – उप्मा सक्सेना

दिल्ली का ट्रैफिक और सुबह को ऑफिस की भागम-भाग। तीन दिन पहले मेरा स्कूटर जरा सा संतुलन खो बैठा और नतीजा हेयर लाइन फ्रैक्चर। ऑफिस मे सभी ने भरपूर सहयोग किया।डाक्टर को दिखाना प्लास्टर चढवाना। मुझे वर्क फ्राम होम की सुविधा भी मिल गयी थी ।तो छुट्टी की चिंता भी नही थी ।पर मम्मी पापा … Read more

मेरे गहने बिकवाकर भी चैन नहीं पड़ा तुम्हें !! – स्वाती जैंन

विक्रम के फोन की स्क्रीन पर राही का नाम देखकर निशा का माथा ठनका , फोन की घंटी लगातार बजे जा रही थी , बाथरूम से विक्रम बोला – निशा फोन देखना जरा , कौन हैं ?? निशा बहाना बनाकर बोली – जी कट हो गया , बाद में आप देख लीजिएगा !! राही का … Read more

खतरा टल गया – गीता वाधवानी

 शांतनु अपनी माताजी का अस्थि विसर्जन करने हरिद्वार गए थे। जैसे ही वह कार्य पूरा करके वापस मुड़े सीढियों पर किसी ने उनकी टांगों से लिपट कर कहा -” पापा पापा, आप मुझे छोड़कर कहां चले गए थे, सुबह से आपको ढूंढ रही हूं, अब तो मुझे डर लग रहा है। देखो ना कितनी देर … Read more

बूढ़े दरख्तों की हवाएं दुआएं – डॉ बीना कुण्डलिया 

दादी दादी आप कहां हैं ? छोटी बच्ची मृदुला ने स्कूल से आकर जैसे ही घर में प्रवेश किया गेट से ही पुकारना शुरू कर दिया। अरे ये दादी तो रोज घर के आँगन में ही बैठी मिलती थी।आज कहां चली गईं ‌अरे ओ दादी छुपों मत बाहर निकल आओ प्लीज़ दादी देर मत करो। … Read more

प्रशंसा –  संध्या त्रिपाठी

” प्रशंसा एक ऐसी औषधि है जो मृतप्राय हौसलों में एक नई जान फूंक देती है ” … ।   बच्चों के व्हाट्सएप स्टेटस में पुरस्कार प्राप्त करते हुए अपना फोटो और नीचे कैप्शन में लिखा …” प्राउड ऑफ यू मम्मी ” देख कर सच में बहुत खुशी हुई…..! मैंने भी तपाक से जवाब में लिख … Read more

देहाती लोग कभी नहीं सुधरेंगे !! – स्वाती जैंन

सुनीता बोली सच गाँव के लोगो को शहर के कितने भी तौर – तरीके सीखा लो मगर वे गाँव वाली हरकतें ही करेंगे !! यह सुनकर रुक्मणि जी का दिल एक बार फिर टूट गया , कितनी उम्मीदे लेकर गाँव से आए थे रमाकांत जी और रूक्मणि जी मगर सुनीता दोनों को कुछ भी सुनाने … Read more

मुझे भी जीना है केवल सांसें नहीं लेनी हैं – डॉ बीना कुण्डलिया

रंजना ओ रंजना ऽऽ रंजना ऽ कहां हो । पति बृजेश ने जैसे ही आवाज लगाई, पति की चिल्लाती हुई आवाज सुनकर रंजना जो रसोईघर में नाश्ते, उनके ऑफिस के लिए लंच की तैयारी कर रही दौड़ती हुई आई बोली क्या हुआ ? आप इतने गुस्से में क्यों चिल्ला रहे हैं ? पति बृजेश तो … Read more

लक्ष्मी पूजन क्यों – संध्या त्रिपाठी

       बेटा पीहू , तू फटाफट रंगोली वगैरह बनाकर घर को सजा ले मैं पूजा की तैयारी करती हूं …और प्रियांश तू भी दीदी का साथ देना..! बाप रे ये दीपावली के दिन भी ना कितना काम हो जाता है …व्यस्तता के बीच निधि ने दीया ठीक से जमा कर रखते हुए कहा ।           मम्मी , … Read more

डाक चाचा – डॉ. उर्मिला सिन्हा

डाकिया—एक शब्द नहीं, एक युग की धड़कन। हमारे जीवन के वे अभिन्न अंग थे, जिनकी उपस्थिति पारिवारिक सदस्य से भी बढ़कर थी। उनका हमारे साथ न रहना गौण था, क्योंकि वे तो उन अपनों का प्यार भरा संदेशा लाते थे, जो हमसे कोसों दूर, क्षितिज पार बसे थे। वे संदेशवाहक नहीं थे, वे तो भावनाओं … Read more

उसे समझाती भी तो क्या – रत्ना पांडे

दीपावली पर इस वर्ष मेरे घर वह दीये बेचने वाली कुम्हारन नहीं आई। वह भी क्या करती! वह तो हर वर्ष आती ही थी, किंतु विदेशी चमक-दमक की चकाचौंध ने मुझे इस तरह आकर्षित कर लिया था कि उसे देखते ही मेरा चेहरा बिगड़ जाता था और मैं दीये लेने से इनकार कर देती थी। … Read more

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