सीनियर लगते नहीं

   ” ये क्या आप मुझे हर वक्त सीनियर-सीनियर कहते रहते हैं..मेरा नाम लेते हुए क्या आपका गला दुखता है।” नीरू अपने पति महेश जी पर चिल्लाई।जवाब में वो मुस्कुराते हुए बोले,” अब बच्चे तुम्हारे सयाने हो गये हैं और तुम्हारे बालों पर भी चाँदी चमकने लगी है तो हो गई ना तुम सीनियर..इसमें चिढ़ने वाली … Read more

घर का बोझ – शनाया अहम

अक्सर हम लड़कियों को कभी न कभी बोझ समझा जाता है, कभी कभी ही क्या कुछ घरों में तो हमेशा ही बोझ समझा जाता है अहमियत दी जाती है तो उस घर के बेटों को, बेटियाँ तो बोझ समझे जाने के बोझ तले ही दबी रही हैं।  ऐसी ही एक लड़की थी दिया,,, उसका नाम … Read more

रिश्तों की मिठास – ममता भारद्वाज

मालती और उसके पति मोहित ने अपना एक छोटा सा प्यार भरा आशियाना बनाया हुआ था ।घर छोटा था पर खुशी और प्यार से परिपूर्ण।मालती के पति मोहित एक छोटे से कारखाने में बहुत ही साधारण सी नौकरी करते थे।मालती भी एक लिफाफे बनाने के छोटे से कारखाने में काम करती थी। वह यह कार्य … Read more

खूनी कंगन

सौदामिनी नही रही! जैसा दमदार नाम वैसा ही दमदार व्यक्तित्व था।उनके नही रहने की खबर जो भी सुनता मन ही मन चैन की साँस लेता। सौदामनी का भरापूरा घर था।पति बेहद सीधे-सरल,चार बेटे-बहू दो बेटी-दामाद,छः पोते, दो नाती,दो पोतियाँ और तीन नातिन थी। बड़ी सी हवेली,सैकड़ो बीघे खेती,धन संपत्ति से घर भरा था। घर के … Read more

गरीब घर की बेटी हुं पर संस्कार वाली हुं !! – स्वाती जैंन

मां , मुझे आज बंटू की शादी में जो सोने के कंगन पहनने थे , वह कहीं मिल नहीं रहे , मैंने अपना सारा सामान उल्ट पुलट कर देख लिया नेहा अपनी मां राधा जी से बोली !! राधा जी बोली – अरे बेटा , हो सकता हैं तु ससुराल से ही लाना भूल गई … Read more

अर्धांगिनी हुं मैं तुम्हारी !! – स्वाती जैंन

अर्धांगिनी , नहीं नौकरानी हो तुम , मेरा सब काम करती हो , मेरे लिए खाना बनाती हो , मेरे बच्चों को देखती हो इसलिए इस घर में हो और वैसे भी तुम्हारे मायके में तुम्हारे माता पिता भी नहीं हैं तो वहां भी कौन रखेगा तुम्हें ?? इसलिए तुम पर तरस खाकर तुम्हें यहां … Read more

चाकलेट  की हिस्सेदारी – उपमा सक्सेना

“नीरू! नीरू चल मामा जी को सारी बोल दे!”मेघा अपनी तीन साल की बेटी को थोड़ा धमकाकर बोल रही थी। मेघा अजीब सी स्थिति मे अपने-आप को फंसा पा रही थी। रक्षाबंधन पर भाई के घर बहुत ही चाव से आई थी।पति नैतिक को भी बहुत मनुहार करके लेकर आई थी। पिता जी दस महिने … Read more

बेटी और बहु – एम पी सिंह

आशा की शादी अनिल के साथ हुई जो दिल्ली मे ही रहता था और वहीं जॉब करता था. अनिल काफ़ी समझदार और सुलझा हुआ इंसान था. अनिल की बड़ी बहन रीमा की शादी भी सरोजनी नगर, दिल्ली में रहने वाले कारोबारी रमेश से हुई थी. रीमा जरा जिद्दी और कामचोर किस्म की लड़की थी. रमेश … Read more

विश्वासघात – बिमला रावत जड़धारी

राधिका जी शाम की चाय पी रही थी कि तभी गेट की घंटी बजी, देखा तो श्यामा जी थी। राधिका जी ने श्यामा जी का बडे गर्मजोशी से स्वागत किया। करती भी क्यों नहीं, दोनों की दोस्ती पचास साल पुरानी थी। राधिका जी ने श्यामा जी से कहा, ‘तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय बना … Read more

शर्म नहीं गर्व हूं मैं – सोमा शर्मा 

यह मेरी अपनी आपबीती हैं ।जब मैं सिर्फ ११ बर्ष की एक चंचल और नटखट बच्ची थी और अपने मम्मी पापा भैया की दुलारी थी। मेरा नाम आभा हैं और यह कथा मेरे जीवन की एक ऐसी सच्चाई हैं जो मेरी जिंदगी को पूरी तरह से बदल देती है। आभा छठी कक्षा की एक होनहार … Read more

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