परवरिश 

“मैं आज यहाँ आपसे पैसे मांगने या आपको ब्लैकमेल करने नहीं आई हूँ,” श्रुति ने खड़े होते हुए अपना झोला कंधे पर लटकाया। “मैं यहाँ एक माँ को आगाह करने आई थी। अभी भी वक्त है मिसेज शेरगिल, अपने बेटे को संभाल लीजिए। उसे इंसान बनना सिखाइए। क्योंकि अगर अगली बार उसने मेरी या किसी … Read more

स्वर्ग से सुंदर

विवाह की रस्में खत्म हो चुकी थीं और राधिका अपने नए जीवन के सबसे नाज़ुक पड़ाव पर खड़ी थी। चौबे परिवार शहर का एक प्रतिष्ठित और रुतबे वाला परिवार था। घर की मालकिन, यानी राधिका की सास सुमित्रा देवी का दबदबा सिर्फ घर में ही नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले में था। सुमित्रा देवी की छवि … Read more

एक थाली में खाने से प्यार बढ़ता है

काव्या की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने पास को देखा, फिर मुझे देखा, और फिर पास को देखा। “लेकिन… आपने तो कहा था कि आपके पास टाइम नहीं है?” उसकी आवाज़ अब बिल्कुल बदल चुकी थी। उसमें अब गुस्सा नहीं, बल्कि एक मीठा सा आश्चर्य था। “मैंने इसलिए कहा था ताकि तुम्हें सरप्राइज … Read more

मेरे जीवनसाथी

कुणाल से रहा नहीं गया। वह भीड़ को चीरता हुआ अपनी माँ के पास पहुँचा और धीमे स्वर में बोला, “माँ, आरुषि को बहुत गर्मी लग रही है। वो भारी कपड़ों में है। रस्म को अंदर हॉल में शिफ्ट कर लेते हैं, वहाँ एसी चल रहा है।” माँ ने उसे झिड़कते हुए कहा, “पागल हो … Read more

मुझे माफ कर दो माँ

“रोहन… तुम्हारी माँ… हमें छोड़कर चली गई।” वाक्य इतना छोटा था, लेकिन रोहन के कानों में किसी बम के धमाके की तरह गूँजा। उसके हाथ से नाश्ते का निवाला छूटकर प्लेट में गिर गया। दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया। “क्या… क्या कह रहे हैं आप? ओ गॉड! कब… कैसे? परसों तक तो…” रोहन के मुँह … Read more

सच्चा प्यार

समीर और काव्या की शादी को आठ साल हो चुके थे। इन आठ सालों में उनके घर की दीवारें न जाने कितनी ही बार उनकी हँसी, उनकी नोक-झोंक और उनके एक खास ‘पेट डायलॉग’ की गवाह बन चुकी थीं। समीर स्वभाव से थोड़ा लापरवाह था। सुबह ऑफिस जाते वक्त गीला तौलिया बिस्तर पर छोड़ देना, … Read more

बाबूजी का आत्मसम्मान

लाल सुर्ख जोड़े में सजी, माथे पर भारी मांगटीका और हाथों में रची गहरी मेहंदी के बीच वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। पर उसकी आँखों में वो चमक नहीं थी जो एक दुल्हन की आँखों में होनी चाहिए। मोबाइल की स्क्रीन पर वीडियो कॉल चालू था। स्क्रीन के दूसरी तरफ समीर … Read more

पागल भाई

राघव के घर के आंगन में आज सुबह से ही एक उदासी भरा सन्नाटा पसरा हुआ था। आज उसकी माँ की पहली बरसी थी। घर में रिश्तेदारों और पंडितों की आवाज़ें तो गूंज रही थीं, लेकिन वो पुरानी रौनक कहीं खो सी गई थी जो माँ के होने से हुआ करती थी। राघव की बड़ी … Read more

नयी उड़ान, नयी पहचान

“दुनिया का काम है कहना, दादी,” आयुष ने मुस्कुराते हुए कहा। “सोचिए, जब कल को मेरी शादी होगी और मेरी पत्नी भी स्नेहा दीदी की तरह नौकरी करके थकी हारी घर आएगी, तो क्या मुझे उसे चाय बनाकर नहीं पिलानी चाहिए? क्या आप नहीं चाहेंगी कि आपके पोते की पत्नी को वो आराम और सम्मान … Read more

दो शरीर और एक आत्मा

निधि जब इस घर में बहू बनकर आई थी, तो उसे सबसे ज्यादा हैरानी अपने सास-ससुर का आपसी तालमेल देखकर हुई थी। उसके ससुर जी, यानी पंडित विद्याधर, अपने जमाने के प्रखर विद्वान और यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे थे। उनकी कुशाग्र बुद्धि, अनुशासन और दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि घर के तीनों बच्चे आज … Read more

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