ज़िंदगी की ढलती शाम
निर्मला ने अपने पति को बड़े गौर से देखा। जैसे यह समझने की कोशिश कर रही हो कि यह आदमी आज अचानक यह कैसी बातें कर रहा है। फिर उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई और वह एक समझदार मां की तरह बोली, “आपको सच में बहुत फुर्सत मिल गई है बैठे-बैठे। … Read more