“सहारा” – गीता अस्थाना
प्रभात -बेला की सूर्य -किरणें क्षितिज पर आगमन कर चुकी थीं। धरती पर सुनहरी रश्मियाँ बिखर कर अपने आने का आभास से जनजीवन में उर्जा भर रही थीं। वृक्षों पर पक्षियों का चहचहाना,गायों का रंभाना सूर्योदय होने का प्रमाणित कर रही थीं। कुछ लोग अपने दैनिक जीवन कार्य में संलग्न हो चुके थे और कुछ … Read more