“सहारा” – गीता अस्थाना

प्रभात -बेला की सूर्य -किरणें क्षितिज पर आगमन कर चुकी थीं। धरती पर सुनहरी रश्मियाँ  बिखर कर अपने आने का आभास से जनजीवन में उर्जा भर रही थीं। वृक्षों पर पक्षियों का चहचहाना,गायों का रंभाना सूर्योदय होने का प्रमाणित कर रही थीं। कुछ लोग अपने दैनिक जीवन कार्य में संलग्न हो चुके थे और कुछ … Read more

सहारा – करुणा मलिक 

अम्मा, मैं बता रही हूँ कि इस मकान का सहारा है बस तुम्हें, हरगिज़ भी सुनील की बात मानकर इसे बेचने की मत सोचना , याद है ना ताई की दुर्गति, मकान नाम करते ही बिल्लू भाई ने जीते जी मार ही डाला था।  ना लाली, ऐसी बात नहीं है । पहली बात तो अपना … Read more

बेसहारों का सहारा – गीता वाधवानी

 मालती अपनी मां सुषमा के गले रखकर रो पडी और कहने लगी-” मम्मी, यह आप क्या कह रही हो, पापा आप कह दो यह सब झूठ है। ”   मम्मी और पापा दोनों ने कहा-” नहीं मालती, यह सब झूठ नहीं है सच है। ”   मालती -” नहीं मैं नहीं मानती इस सच को? ”   मम्मी-”  … Read more

सहारा – आरती झा आद्या

“माँ, आज फिर देर हो जाएगी?” रसोई से आती हल्की-सी खनखनाहट के बीच श्रेयांश की आवाज़ में झुँझलाहट साफ़ थी। सावित्री ने पलटकर बेटे को देखा। चेहरे पर थकान थी, पर मुस्कान वैसे ही सजी थी जैसे बरसों से सजी रहती थी। “बस आधा घंटा और… तेरे पापा की दवा दे दूँ, फिर नाश्ता लगाती … Read more

सहारा – मधु वशिष्ठ

डोर बैल की आवाज सुनकर भाभी बाहर गईं। थोड़ी देर में उनकी चिल्लाने की आवाज सुनकर मैं भी बाहर निकली तो मैंने देखा भाभी बाहर खड़े कुछ सफाई कर्मचारी जैसे दिखने वाले लोगों से जोर जोर से बोल रही थीं।  कहां काम करते हो तुम ? क्या सरकार तुम्हें तनख्वाह नहीं देती ? जब तुम्हें … Read more

सहारा – संजय सिंह।

 रात का समय था ।तकरीबन 10:00 बज रहे थे ।राम पूरा दिन काम करके अपनी थकान को मिटाने के लिए बिस्तर पर लेटा हुआ था। सोने की तैयारी कर रहा था। उसके बिस्तर के सामने एक मोमबत्ती जल रही थी ।उसी की रोशनी सारे कमरे को रोशन कर रही थी।राम मन ही मन में सोचने … Read more

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