भरोसा – नेहा जैन

बरसात की हल्की बूंदें शहर की ऊंची इमारतों पर गिर रही थीं। रात के करीब ग्यारह बजे थे, लेकिन “सिटी केयर हॉस्पिटल” की चौथी मंजिल पर हलचल अभी भी जारी थी। कमरा नंबर 407 के बाहर एक आदमी बेचैनी से टहल रहा था। उसकी आंखों में डर था… और माथे पर पसीना। वो बार-बार डॉक्टर … Read more

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