दर्द – सुदर्शन सचदेवा

“अजी सुनते हो… नेहा आ रही है!” रसोई से उत्साह भरी आवाज़ आई। यह सुनते ही रमेश जी के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी। “सच! कितने दिनों बाद हमारी बेटी घर आ रही है।” उन्होंने तुरंत अख़बार एक तरफ रखा और बोले, “उसकी पसंद की कचौरी, खीर और आलू के पराठे बनाना… और हाँ, उसका … Read more

दर्द – रंजना गुप्ता

माँ, आप चिंता मत करना। यहाँ आपका बहुत अच्छा ख्याल रखा जाएगा। राहुल ने मुस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा। सामने वृद्धाश्रम का बड़ा सा फाटक था। फाटक के ऊपर लिखा था *स्नेह सदन वृद्धाश्रम* कमला देवी ने बेटे की ओर देखा और मुस्कुरा दीं अरे पगले, मैं कोई बच्ची हूँ क्या? तू अपनी चिंता … Read more

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