दर्द – सुदर्शन सचदेवा
“अजी सुनते हो… नेहा आ रही है!” रसोई से उत्साह भरी आवाज़ आई। यह सुनते ही रमेश जी के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी। “सच! कितने दिनों बाद हमारी बेटी घर आ रही है।” उन्होंने तुरंत अख़बार एक तरफ रखा और बोले, “उसकी पसंद की कचौरी, खीर और आलू के पराठे बनाना… और हाँ, उसका … Read more