तिरस्कार अब और नही – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” तुम होती कौन हो मुझे रोकने वाली मुझे जो करना है वही करूंगा !” पांच साल के आदित्य के मुंह से ये शब्द सुन सकते मे आ गई निशा। ” क्या बोल रहे हो ये मम्मा से ऐसे बात करते है क्या ? कहाँ से सीखे हो ये सब ?” निशा बेटे को डांटते … Read more

सुधार ली भूल – डॉ संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

आज फिर नमक तेज कर दिया सब्जी में? चिल्लाते हुए उदित बोला तो रश्मि कांप गई, थोड़ी सी चख के देखी, ठीक तो है बिल्कुल..इन्हें क्या हो गया है आजकल, बात बेबात चिड़चिड़े हो जाते हैं, उसने सोचा। दिल कहीं और रहता है क्या? उसके पास आए ही उदित ने कहा तो रश्मि की आँखें … Read more

पछतावा – डॉ संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

चंदनपुर गांव में रहते थे लाला हरदयाल, किराने की छोटी सी दुकान के मालिक,बाप दादा की काफी जमीन थी जिसपर खेती बाड़ी का काम भी करते साथ में।बहुत मेहनती और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे, उनके पड़ोस में रहता बनवारी लाल जो उनकी समृद्धि से चिढ़ता था,कहने को उसके पास भी खेत खलिहान की कमी … Read more

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