वो डरावनी काली रात – संगीता अग्रवाल :

 Moral Stories in Hindi ” कितनी देर कर दी तुमने निकलने मे देखो तो कैसा अंधेरा हो रहा है !” गाडी मे बैठते हुए स्नेहा मयूर से बोली। ” अरे अभी बारह ही तो बजे है आज अमावस की काली रात है अंधेरा तो होगा ही !” मयूर हँसते हुए बोला और गाडी चलाने लगा।  … Read more

कुछ बेटे भी पराये होते है – संगीता अग्रवाल :  Moral Stories in Hindi

” माँ मुझे भी अपना कमरा चाहिए जैसे भैया का बनवा रहे हो मेरा भी एक बनवा दो ना!” पंद्रह साल की नंदिनी अपनी माँ गीता से बोली. ” तू दादी के कमरे मे रहती तो है अपना कमरा क्यों चाहिए फिर तुझे!” गीता ने उससे पूछा. ” माँ दादी मुझे उस कमरे मे कुछ … Read more

प्यार की डोर – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” नहीं मां मैं अभी शादी नहीं करूंगी!” आराध्या अपनी मां गीता जी से बोली। ” अब नहीं तो कब करेगी पच्चीस की हो गई है लोग क्या कहेंगे जवान बेटी को घर में बैठा रखा है जिससे वो खर्चे चला सके घर के!” गीता जी दुखी हो बोली। ” मां ये लोग तब तो … Read more

कभी कभी कठोर कदम उठाने पड़ते है – संगीता अग्रवाल :

Moral Stories in Hindi “ये क्या है हर्ष जब देखो तब टीवी में लगे रहते हो पढ़ाई कौन करेगा!” साधना अपने चौदह वर्षीय बेटे से बोली। ” मम्मी बस थोड़ी देर में करता हूं थोड़ी देर और टीवी देख लूं!” हर्ष बोला। ” नहीं बिल्कुल नहीं तुम पहले ही दो घंटे से टीवी देख रहे … Read more

” बच्चे तो बच्चे ठहरे” – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

नियति दुनिया की नज़र मे एक बेहतरीन पत्नी ( जो अपने पति को एक गिलास पानी भी खुद से ना लेकर पीने दे ) एक बेहतरीन माँ ( जो अपने बच्चों पर बिना क्रोध किये उनकी बेहतर परवरिश करती है ) । जब भी कोई मेहमान घर आता नियति की तारीफ करते नही थकता कि … Read more

वो सांवली सी लड़की – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“उसकी सांवली सूरत भी बहुत आकर्षक थी कुणाल चौराहे पर मिली थी फिर एक दम ओझल हो गई!” रश्मि घर आ अपने पति कुणाल से बोली। ” किसकी बात कर रही हो तुम रश्मि!” कुणाल अपने मोबाइल से निगाह हटा कर बोला। “मैं जब बाज़ार से सामान ले कर आ रही थी तो लाल बत्ती … Read more

 प्यारा रिश्ता – संगीता अग्रवाल 

“बेटा शादी के बाद तो सबको एडजस्ट करना ही पड़ता है तुम नए थोड़ी हो!” बेटे बहू की खटपट का पता लगने पर स्वाति जी अपने बेटे श्रेयांश को समझाते हुए बोली। ” पर मम्मा मेरी खुद की भी तो लाइफ है महक चाहती है मैं उसके साथ रहूं बस , यार दोस्त सब छोड़ … Read more

क्योकि वो इंसान थी – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

जख्मी तन और मन के साथ पड़ी थी वो एक कोने मे , सुनसान जगह थी वो जहाँ दिन ढलने के बाद इक्का दुक्का लोग ही नज़र आते थे । रात धीरे धीरे गहराती जा रही थी पर वो वही पड़ी थी दीन दुनिया से बेखबर , उसकी हालत ऐसी थी ही नही कि वो … Read more

लड़की बिना कैसा अस्तित्व !! – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“अरे सुधा आज तो मोहल्ले में कोई कंजक ही नजर नहीं आ रही !” मनोहर जी बाहर से आ बोला। ” अरे ऐसे कैसे जी इतनी कंजक तो है हमारे मोहल्ले में फिर नजर क्यों ना आईं आपने ठीक से देखी ना होगी ।” सुधा जी बोली। ” सब जगह ढूंढा दूसरे मोहल्ले में भी … Read more

” पिता का आशीर्वाद ” – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” पापा कब छोड़ेंगे आप अपना गँवार पन , इतनी इज्जत कमाई है मैने अपनी मेहनत के बल, सब मिट्टी मे मिलाने मे लगे हो आप !” मेहमानों के जाते ही अरुण मानो अंगारे उँगलने लगा। ” बेटा मुझे पानी पीना था कमरे मे था नही बस इसलिए रसोई मे पानी लेने जा रहा था … Read more

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