तीसरा घर: एक पिता की अनोखी वसीयत – संगीता अग्रवाल 

“विदाई की बेला में जब पूरी दुनिया दुल्हन के गहने और दहेज का हिसाब लगा रही थी, तब एक पिता ने अपनी बेटी की हथेली पर कुछ ऐसा रख दिया, जिसने समाज की सदियों पुरानी रीत को हमेशा के लिए बदल दिया।” “पगली, बाप हूँ तेरा। मेरा फ़र्ज़ है तुझे शान से विदा करूँ। तू … Read more

  शगुन का एक रुपया – संगीता अग्रवाल   

“जब एक अमीर समधी ने गरीब पिता के सामने हाथ फैलाकर कहा—’मुझे आपकी दौलत नहीं, आपकी वो धरोहर चाहिए जिसे आपने अपनी गरीबी की भट्टी में तपाकर कुंदन बनाया है… मुझे दहेज में आपकी बेटी के संस्कार और आपकी जेब का वो एक सिक्का चाहिए।’” शहर के सबसे पॉश इलाके में बने ‘सिंघानिया विला’ के … Read more

एक सखी, जो देवरानी के रूप में आई थी – संगीता अग्रवाल 

कमरे में बिखरे हुए कपड़ों के ढेर के बीच मीरा हताश होकर बेड के किनारे बैठ गई। माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। अलमारी के सारे रैक खाली हो चुके थे, साड़ियाँ, सूट, शॉल—सब कुछ बेड पर एक पहाड़ की तरह जमा था, लेकिन वह … Read more

ससुराल में भी कोई अपना होता है – संगीता अग्रवाल 

शाम के सात बज रहे थे, और बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। बारिश की बूंदें खिड़की के कांच पर ठीक वैसे ही टकरा रही थीं जैसे नैना के दिल पर डर की दस्तक हो रही थी। वह अपने बेडरूम के कोने में, अलमारी के पास ज़मीन पर बैठी थी। उसके हाथ में एक मखमली … Read more

नया घर – संगीता अग्रवाल 

बारिश की बूंदें कार के शीशे पर लगातार टकरा रही थीं, मानो बाहर का मौसम गाड़ी के भीतर बैठे हरिशंकर बाबू के मन में चल रहे तूफ़ान को भांप गया हो। कार की पिछली सीट पर बैठे सत्तर वर्षीय हरिशंकर अपनी गोद में रखे पुराने ब्रीफकेस को कसकर पकड़े हुए थे। उस ब्रीफकेस में न … Read more

पूजाघर मे कैसा भेदभाव – संगीता अग्रवाल 

“रसोईघर मेरे लिए पूजाघर के समान है बहू इसलिए ध्यान रखना कभी यहां बिना नहाए मत घुसना क्योंकि यहां खाना नहीं प्रसाद बनता है !” दिव्या की शादी के बाद की पहली रसोई पर ही उसकी सास सीता देवी ने उससे कहा। ” जी मांजी मैं ध्यान रखूंगी इस बात का और आपको शिकायत का … Read more

रिटायरमेंट – जिंदगी की दूसरी पारी – संगीता अग्रवाल

” सुधा तैयार हो जाओ हमें फोटो खिंचवाने चलना है !” ऑफिस से आते ही जयेश जी पत्नी से बोले । ” पर फोटो क्यो खिंचवानी है मेरी ?” सुधा आश्चर्य से बोली।  ” अरे भाग्यवान रिटायरमेंट का फॉर्म भरना है उसमे हम दोनो की फोटो लगेगी !” जयेश जी बोले। ” ओह्ह हां आपकी … Read more

लोगो का काम है कहना – संगीता अग्रवाल

” हैलो भाभी कैसी हैं आप ?” नंदिता अपनी भाभी राखी को फोन करके बोली। ” मैं ठीक हूं दीदी आप बताइए !” राखी आज नंदिता के खुद से फोन करने से हैरान हो बोली। ” बस भाभी सब ठीक है और बताओ आराध्या ( राखी की बेटी) कैसी है ?” नंदिता ने फिर पूछा। … Read more

अपना अस्तित्व – संगीता अग्रवाल

“कमला आज रागिनी की पसंद का खाना बनाना तुम!” राज अपनी घरेलू सहायिका से बोला। ” पर साहब मेमसाहब की पसंद क्या है ? आप बता दीजिये मुझे मुझे तो अभी चार दिन ही हुए आये मैं कैसे जानूँ !” कमला बोली। ” रागिनी को बैंगन आलू और पापड़ की सब्जी बहुत पसंद है तुम … Read more

अपने बच्चो को बचाइये – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” निखिल क्या कर रहे हो इतनी रात को!” पानी ले जाती आशा अपने बेटे के कमरे से आती रौशनी देख उसके कमरे मे आई और बोली. ” मम्मा हम कुछ दोस्त है जिनकी पहचान ऑनलाइन गेम खेलते हुई थी.. इसमे कुछ इंडिया के है कुछ बाहर के भी बस उन्ही से थोड़ी चैटिंग चल … Read more

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