घर का चिराग (भाग 5)  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : कामना चौधरी ने टोटू को गले से लगाते हुए कहा तुम ही हमारे खोए हुए बेटे हो आज से 10 बरस पहले तुम मेले में हमसे बिछड़ गए थे तुम्हारे सीने पर तुम्हारे पापा नारायण चौधरी ने श्री राम का चित्र बनवाया था जो तुम्हारे सीने में आज भी मौजूद … Read more

घर का चिराग (भाग 4)  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : अगर टोटू पुलिस के हाथ लग गया तो हम बड़ी मुश्किल में पड़ जाएंगे मोबाइल में घंटी बजी कामना चौधरी ने जल्दी से मोबाइल में देखा अरे यह तो आरती का काॅल है हा ,,आरती बहन बोलो क्या बात है ,,अरे कामना बहन तुम्हारे घर के बाहर बहुत पुलिस खड़ी … Read more

घर का चिराग (भाग 3)  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : गाड़ी तेज रफ्तार में सड़क पर दौड़ी जा रही थी नारायण चौधरी ने अपनी पत्नी से कहा —  उस तांत्रिक का पता तो ठीक से याद है ना कामना चौधरी ने एक पर्ची अपने पति के हाथ में थमा दी ,, नारायण चौधरी गाड़ी चलाते हुए पर्ची को पढ़ कर … Read more

घर का चिराग (भाग 2)  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : टोटू छत के ऊपर भूख से बिलबिला रहा है सूरज भी धीरे-धीरे ढलकर छुप गया शाम हो गई रात का पहर शुरू हो गया रात के करीब 10:00 बजने के बाद धीरे-धीरे सभी मेहमान भंडारे का स्वादिष्ट हलवा पूरी खा — पीकर जा चुके थे मेहमानों ने जाते-जाते जमकर तारीफ … Read more

घर का चिराग (भाग 1)  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : नारायण चौधरी अपने मोहल्ले का सबसे अमीर आदमी था शादी के 1 साल के बाद उसकी पत्नी कामना चौधरी ने एक सुंदर से बालक को जन्म दिया जब वह बालक 1 वर्ष का हो गया उसे एक बड़े से मेले में घूमाने के लिए ले गए वहां बहुत से लोग … Read more

रिक्त स्थान (अंतिम भाग) – गरिमा जैन

रात अंधेरी थी और इंस्पेक्टर विक्रम अपनी टीम के साथ एक सुनसान वीरान घर के इर्द-गिर्द घात लगाए बैठे थे। सुनसान में कीट पतंगों की आवाज बहुत तेज मालूम होती थी ।घर के अंदर अंधेरा था ,प्रकाश की एक किरण भी दिखाई नहीं देती। तभी झाड़ियों के पीछे झुरमुट से किसी के आने की आहट … Read more

रिक्त स्थान (भाग 44) – गरिमा जैन

जितेंद्र उस खाली वीराने घर से खाली हाथ वापस लौटता है। उसे परेशान देख उसके पिता बहुत चिंतित हैं। वह  पूछते हैं कि आखिर वह ऐसे दीवानों की तरह रात की दो ढाई बजे कहां घूम रहा था। तब जितेंद्र अपने पिता से पूछता है ” पापा क्या आपको हेमंत याद है ?” “कौन हेमंत … Read more

रिक्त स्थान (भाग 43) – गरिमा जैन

वह रात जितेंद्र के लिए सबसे भारी , सबसे लंबी ,सबसे वीरान थी।रेखा के बिना जीवन की कल्पना करना बहुत मुश्किल था ।उसे हर तरफ रेखा दिखाई देती। कमरे के हर कोने में उसकी छाप थी ।हवा के झोंके से जब विंड शाइन की घंटियां बचती तो जितेंद्र को ऐसा लगता जैसे अभी रेखा लहरा … Read more

रिक्त स्थान (भाग 42) – गरिमा जैन

रेखा : अरे रूपा  जितेंद्र के  ना जाने कितने मैसेज आए पड़े हैं !! मुझे जाना होगा ,शायद जानू उन्हें बहुत परेशान कर रहा है । रूपा :क्या लिखा है रेखा मैसेज में ?? रेखा :लिखा है जल्दी घर आ जाओ!! इस तरह से तो जितेंद्र कभी भी मैसेज नहीं करते ।कुछ खास बात होगी … Read more

रिक्त स्थान (भाग 41) – गरिमा जैन

रूपा के साथ वो हादसा हुए एक हफ्ता बीत चुका था लेकिन वह किसी से कोई भी बात नहीं कर रही ।यहां तक की रेखा से भी नहीं ।वह किसी को नहीं बता रही कि उसके साथ क्या हुआ था?? उसे हर पल बस एक ही डर समाया रहता है कि वह कातिल हर वक्त … Read more

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