दूरदर्शिता – निभा राजीव “निर्वी”  : Moral stories in hindi

“-अरी बहू! अगर तुम दोनों मां बेटी की गुटर गूं खत्म हो गई हो तो अब जाकर उसे स्कूल के लिए बस स्टॉप पर छोड़कर आओ…वापस आकर आगे भी कुछ काम करने हैं या नहीं। तुम्हारा आधा समय तो इसे पहुंचाने और लाने में ही बीत जाता है…. और फिर हड़बड़ी में जैसा तैसा काम … Read more

धिक्कार – हिमांशु जैन मीत : Moral stories in hindi

जीवन विविधताओं में ढला हुआ एक ताना बाना है जिसमें नफ़रत और प्यार जैसी भावनाएं कदम कदम पर आपके इम्तहान लेती रहतीं हैं…. अक्सर बेदखल जैसे शब्द को सुनकर माता पिता द्वारा अपनी संतान को बेदखल करने की तस्वीर ही ज़हन में उभरती है…… लेकिन यह कहानी ठीक इसके विपरीत है.. जी हाँ,ये कहानी है … Read more

धिक्कार है धिक्कार – सुभद्रा प्रसाद : Moral stories in hindi

रात के दो बजकर दस मिनट हो चुके   थे |प्रियंका स्टेशन के प्लेटफार्म  पर शाल ओढ़े चुपचाप बैठी थी | उसे समझ नहीं आ रहा था,  वह क्या करे? रात दो बजे वाली ट्रेन आकर आगे जा चुकी थी और उसका मन तेजी से पीछे की ओर भाग रहा था |       … Read more

प्रेम की अनुभूति – रश्मि प्रकाश  : Moral stories in hindi

“केशवी सुन तो बेटा किधर भागी जा रही है… तेरे दोस्त आते ही होंगे…अच्छे से तेल लगा लेना नहीं तो रंग छुड़ाते वक्त रोने लगेगी ।”कला अपनी बेटी को घर से बाहर जाते देख कर जोर से बोली “ आती हूँ माँ पहले अपने कान्हा के साथ होली तो खेल आऊँ नहीं तो वो ग़ुस्सा … Read more

कुछ बड़े ऐसे भी होते है … – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

क्या पापा… सुबह सुबह खटर पटर की आवाज लगा रखी है स्टोर  रूम में..??? रात के चार बज रहे है ….. सबकी नींद खराब कर दी….. कर क्या कर रहे है आप यहां ?? बतायेंगे…. ?? झल्लाता हुआ बेटा राजीव अपने पिता कैलाशजी से बोला….. जिनकी उमर यही कोई 75 वर्ष के आस पास रही … Read more

साथ की जरूरत…रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

बच्चे दरवाजे पर आज तीन दिनों से… सुबह शाम नजर गड़ाए हुए थे…कब आएंगे अंकल… गोलू बोला… “लगता है आज भी नहीं आएंगे अंकल…!” ” नहीं ऐसा मत बोलो… अंकल जरूर आएंगे…! गुड़िया बोल पड़ी…  अचानक से एक बच्चा चीखा…” वह देखो अंकल की कार…!”  सारे बच्चे उधर ही दौड़े… हां यह तो अंकल की … Read more

जब जागो तभी सवेरा – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

सत्रह वर्षीया रिया ने पुलक कर स्मिता के गले में बाहें डालकर कहा,”- पता है दीदी… आप मेरे साथ मेरे कमरे में रहोगी। माँ ने आपके रहने का प्रबंध मेरे ही कमरे में करवाया है। कितना मजा आएगा ना। हम दोनों देर रात तक खूब सारी बातें करेंगे!”                   उसकी मासूमियत पर मुस्कुरा पड़ी स्मिता और … Read more

ऐसी थी दादी अम्मा – शिव कुमारी शुक्ला : Moral stories in hindi

अरे मनीषा इन कमजलीयों के  लिए क्या जरुरत थी नये कपडे लाने की पुराने ही धोकर  पहना देती। मेरे राजा बेटे के लिए एक ही जोडी लाई उसके एक-दो जोडी और ले आती।  यह सुनकर मनीषा जी का मन आहत हो गया। दीवाली जैसे त्यौहार पर भी कोई अपने बच्चों को कोसता है क्या । … Read more

बाबू का फैसला –  बालेश्वर गुप्ता : Moral stories in hindi

   बाबू गर ये चार महीने की बच्ची न होती ना,कसम भगवान की आज तुम मुझे जिंदा न देखते।वैसे भी मैं तो अंदर से मर ही गयी हूँ।       ऐसा क्यों बोल रही हो शब्बो?बताओ तो हुआ क्या है? किसी ने कुछ कहा है?          खेती मजदूर बाबू अपनी पत्नी शब्बो और पिता धीरू के साथ मुजफ्फरनगर के … Read more

इम्तिहान ही तो है – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

नालायक.. यह सिला दिया तूने पूरे साल भर की मेहनत का… हम तो आज तक यह सोचते रहे कि तू कमरा बंद करके अपनी पढ़ाई कर रहा है, और तू हमारी आंखों में धूल झोंक रहा था! यह देख तेरे नंबर… दसवीं बोर्ड में 65% आए हैं, कैसे करेगा अपने डॉक्टर बनने का सपना पूरा, … Read more

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