वजूद का सौदा – रमा मिश्रा
“चुप रहो!” हेमंत बाबू ने हाथ उठाया। “मैं गलत नहीं समझ रहा। मैं साफ़ देख रहा हूँ। तुझे डर है कि तेरे गंवार रिश्तेदार, तेरे फटेहाल पिता और तेरी साधारण माँ तेरी ‘हाई प्रोफाइल’ दुनिया में धब्बा लगा देंगे? तुझे शर्म आती है न कि तेरे मामा धोती पहनते हैं? अरे, उसी मामा ने अपनी … Read more