अकेलापन – चम्पा कोठारी : Moral Stories in Hindi

संस्मरण 20 बर्ष पुराना है।बुजुर्ग अम्मा को दया पिछले कई सालों से मोहल्ले में घूमते हुए देखती थी । कई बार वह जिस मकान में कोई बड़ा गेट नहीं होता था सीधे अंदर चली जाती थी और वहाँ पर कहीं पर भी सीढ़ियों में  बैठ जाती। मकान में रहने वालों को कभी कभी पता भी … Read more

दूसरों को बदलने से पहले स्वयं को बदलना जरूरी हैं – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

“रजत तुझसे कितनी बार कहा है कि बहु को समझा दे बड़े बुजुर्गों के सामने छोटे कपड़े ना पहना करे..रिश्तों में एक सीमा रेखा होनी चाहिए। आज तेरे ताया जी आए थे उनके सामने बहु स्कर्ट और टी शर्ट पहनकर आ गई।वो बेचारे कुछ बोले नहीं सारा समय मुंह नीचे करके बैठे रहे। क्या सोचते … Read more

नई शुरुआत… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“कैसी सीमा रेखा अतुल… आप कहना क्या चाहते हैं…? क्या इतने सालों बाद भी ऐसी बात आपको शोभा देती है… बीस साल हो गए हमारी शादी को… इतने बड़े-बड़े बच्चे हैं… अगर उन्हें पता चला की मां पापा में किस बात की बहस चल रही है तो वह क्या समझेंगे…?” ” सुनने दो और समझने … Read more

कमरे की सीमा रेखा – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

क्या मम्मी आपसे कितनी बार कहा है कि कमरे में रहा करों बाहर मत आया करो वही पर आपको सब चीजें खाने पीने कि मिल जाया करेगी फिर भी आप  पता नहीं क्यों सुनती नहीं हो ।बार बार आ जाती है बाहर ।ओ बेटा जरा चाय पीने कि इच्छा हो रही थी,,,। मिल तो जाती … Read more

वादा … – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

अक्सर लोगों के मुँह से सुना है कि रूप से ज्यादा गुण का महत्व है । पर मैं नहीं मानती, मेरे साथ तो हर कदम हर मोड़ पर मेरे अपनों ने ही मुझे रूप की वजह से अनदेखा किया है । मैं पूर्णिमा ! सिर्फ नाम ही अच्छा रखा माँ – बाप ने , ज़िन्दगी … Read more

हर रिश्ता थोड़ा स्पेस मांगता है – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” देखो प्राची ये अनामिका पता नही इतना सज धज कर कहां जा रही है ?” प्राची अपने घर के दरवाजे पर खड़ी थी तब उसकी पड़ोसन नीतू उससे बोली। ” जा रही होगी किसी काम से या किसी फंक्शन में !” प्राची लापरवाही से बोली। ” अरे ये तो अपने मिस्टर के बिना कही … Read more

ग्लानि – रेणु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

दोपहर का खाना पीना निपटा, नौकरानी को घर भेज अंजुरी तनिक कमर सीधी करने लेट गई और कुछ ही देर में वह गहन निद्रा के आगोश में समा गई।  कब न जाने किस अबूझ  अनुभूति वश वह अचानक जाग गई और अपनी आंखों के समक्ष सुदूर बंगाल में रहने वाली अपनी सहोदरा पाखी को देख … Read more

आखिर मेरे साथ ही यह सब क्यों होता है – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

अवंतिका के मन में आज बार बार यह प्रश्न उभरकर उसके सामने आ रहा था कि आख़िर मेरे साथ ही यह सब क्यों होता है । उसे याद आ रहा था जब वह दसवीं कक्षा में पढ़ रही थी । उसके प्री फ़ाइनल परीक्षा चल रही थी । उसकी वजह से माता-पिता ने उसे घर … Read more

बड़ा है तो क्या! – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” भाई…आप हद से आगे बढ़ रहें हैं..।” विनय चीखा।    ” अच्छा.. तो तू अब मुझे मेरी हद बताएगा।तूने अपनी ज़बान पर कंट्रोल नहीं किया तो मैं क्यों करूँगा…।” प्रकाश ने तमतमाते हुए कहा।         अपने दोनों बेटों को झगड़ते देख गायत्री जी का कलेजा छलनी हो रहा था।वो धम्म-से सोफ़े पर बैठ गईं और अपने … Read more

जीवन की वास्तविकता – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

कौशल्या देवी ने पति के गुजर जाने के बाद बड़ी कठिनाइयों  से अपने बेटे नरेश को पढ़ा-लिखा कर बड़ा किया था। बेचारी पढ़ी लिखी तो थी नहीं, जो उसे कोई नौकरी देता।उसे झाड़ू पोछा, बर्तन कटका का ही काम मिला। खुद अनपढ़ थी पर बेटे को पढ़ाना चाहती थी। कई बार सोच कर रो पड़ती … Read more

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