शिकायत नहीं – मधु वशिष्ठ  : Moral Stories in Hindi

आज शाम को विनय को ऑफिस के काम से मुंबई जाना था। शताब्दी की बुकिंग थी और ट्रेन रात को 9:30 बजे। स्टेशन तक पहुंचने के लिए लगभग 8:00 बजे तक तो निकलना ही था ना। 6:00 बज गए थे पर विनय का कोई अता पता न था। जब भी विनय को कहीं बाहर जाना … Read more

बात मेरे स्वाभिमान की है – निशा जैन  : Moral Stories in Hindi

सुमेधा, सुमेधा …. मेरी येलो शर्ट कहां है , मिल नही रही अरे मुझे क्या पता  ? मैं तो कब से कपड़े नही संभाली हूं। ये आपकी छुटकी हुई है तब से मैं इसी में व्यस्त रहती हूं और मम्मी ने कहा है तुम्हारी अभी अभी जचगी हुई है, आराम करो  बाकी के काम मैं … Read more

नृत्यमं – मंजू ओमर  : Moral Stories in Hindi

नृत्यमं ,यही नाम था इशिता के नृत्य क्लास का ।जिसका बड़ा सा ग्लोसाइन बोंड लगवाते हुए इशिता फूली नहीं समा रही थी।आज बरसों का सपना जो पूरा हो रहा था उसका।वो अपने सासू मां को धन्यवाद दे रही थी जिनकी बदौलत आज उसका सपना पूरा हो रहा था।कई घंटों के मेहनत से इशिता का का … Read more

” हक ” – अमिता कुचया  : Moral Stories in Hindi

सीमा ही बहुत ही खुश थी कि उसके मम्मी पापा की पचासवीं शादी की सालगिरह है वह बड़ी ही कश्मकश में थी कि पापा मम्मी के लिए क्या ले जाए। पापा मम्मी ने जीवनभर हर इच्छा पूरी की है। घर में भाई भाभी की शादी की सालगिरह मनाने की तैयारी कर रहे थे। वह शादी … Read more

खुशियों पर सबका हक है – हेमलता गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

बहू … क्या यह अच्छा लगता है तुम्हारी बहन हर दूसरे दिन यहां आ जाती है और फिर तुम दोनों दोपहर की गई हुई रात को घर वापस आती हो, बेटा.. अभी तुम्हारी नई-नई शादी हुई है अभी तुम्हें अपना सारा समय प्रतीक के साथ गुजारना चाहिए, तुम दोनों साथ-साथ घूमो फिरो, दोनों एक दूसरे … Read more

मैं आपसे जुदा नहीं बाबूजी – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

“बाबूजी आप समझने की कोशिश कीजिए। मैं आपको सलाह नहीं दे रही हूं बस बता रही हूं आप जो कर रहे हैं वह गलत है। इसमें उसकी क्या गलती है। वह तो बच्ची है अभी! अभी दिन ही कितने हुए हैं उसके शादी को?”बड़ी बहू मंजूषा को यह कहते हुए जब सुना तो  मनोहर बाबू … Read more

अपना घर… – मधु वशिष्ठ   : Moral Stories in Hindi

दरवाजा खुलते ही मीना ने देखा कि सामने माताजी भी अपने फ्लैट में वापस आ गई थीं। हैरानी और खुशी से माताजी को मिलने के लिए गई। माताजी उसके सामने वाले फ्लैट में ही अकेली रहती थीं। 10 साल पहले जब सरकारी विभाग में कार्यरत वर्मा जी संसार छोड़ कर गए थे| माता जी के … Read more

अपना घर… – रश्मि झा मिश्रा   : Moral Stories in Hindi

“मां अपना जरूरी सामान सब देखकर रख लेना… दवाइयां ध्यान से ले लेना… एक महीना तो कम से कम रहना ही पड़ेगा ना…!”  “अरे चारू… बेटा मुझे मत बुला इतने दिनों के लिए… तेरी सासू मां तो हैं ही… उनका स्वभाव मुझसे नहीं मिल पाता… तू तो जानती है बेटा… पिछली बार कितनी परेशानी उठानी … Read more

बहू के सामान पर बेटी का हक़ – रश्मि प्रकाश   : Moral Stories in Hindi

“ क्या बात है जबसे नित्या के घर से आई हो तुम्हारा चेहरा उतरा उतरा हुआ सा क्यों है?” निकुंज ने राशि से पूछा  “ कुछ नहीं जाने दीजिए… आप भी मुझे नहीं समझेंगे और चार बात सुना देंगे ।” कहकर राशि कपड़े बदल कर बिस्तर पर आकर लेट गई  नीँद आँखों से कोसों दूर … Read more

एहसान – अमिता कुचया   : Moral Stories in Hindi

सोमी की गरमी की छुट्टी हुए काफी दिन हो गये थे। वो मामा के यहाँ जाना नहीं चाहती थी। उसे बुआ के यहाँ जाना अच्छा लगता था, वो जब भी जाती तो दो चार दिन के लिए ही जाती थी। इस बार भाभी की बेटी मौली के साथ खेलना था, वो दो साल की थी, … Read more

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