*दर्द* – तोषिका

ये जो तुमने मुझे *दर्द* दिया है ना, मैं इसको कभी भी नहीं भूलूंगी। रोती हुई स्नेहा ने अपने भाई विजय को बोला। *कुछ साल पहले* स्नेहा अपने पूरे परिवार के साथ रहती थी और बहुत ही संस्कारी भी थी, दूसरी तरफ उसका छोटा भाई विजय मस्तीखोर था लेकिन पढ़ाई में भी अच्छा था। दोनों … Read more

“भाई मैं तेरी तरह स्वार्थी नहीं हूं” – सुनीता मलिक सोलंकी 

बागपत  की एक तंग सी गली में दो भाई रहते थे — बड़ा भाई मुकेश और छोटा अनिल । उम्र में पाँच साल का फासला, पर सोच में ज़मीन-आसमान का। उनके पिता जी की परचून की दुकान थी । पिता के बाद  मुकेश ने दुकान संभाल ली। अनिल पढ़ने में तेज़ था, सो पढ़ाई कर  … Read more

दर्द – मधु वशिष्ठ

बहुत समय बाद हैदराबाद में जब दोनों सहेलियां मिलीं तो उनकी बातें ,हंसी ,खुशी कुछ भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी।  बहुत समय बाद मिली थी इसलिए अपने सारे दर्द और खुशियां भी साझा कर रही थी।  डोमिनोस में जाने वह कब से बैठी थीं तभी हंसते हुए मीनल ने राखी से … Read more

कशमकश – प्रतिमा श्रीवास्तव

लड़कियों की उम्र गुजर जाती है दो घरों को आपस में बांधने की लेकिन सच कहूं तो वही घर हमेशा की तरह इतिहास दोहराते हुए प्रश्न पूछ ही बैठता है कि आखिर कौन से घर को वो अपना कहें? एक मायका जहां के आंगन के हर कोनों में उसकी मौजूदगी दर्ज है,दूसरा ससुराल जहां वो … Read more

असहनीय दर्द – गीता वाधवानी

 पल्लवी नींद में चिल्ला रही थी” छोड़ो मुझे, अंकल ऐसा मत करो, मुझे छोड़ो। ”   उसका पति आकाश हैरान परेशान था। उसकी कल ही पल्लवी से शादी हुई थी और आज वह नींद में चिल्ला रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्यों चिल्ला रही है। उसने झकझोर कर पल्लवी को जगा … Read more

दर्द – डाॅ संजु झा

 मनुष्य के जीवन में सुख-दुख का मेला लगा ही रहता है।नियति के खेल निराले हैं, उसमें कभी तो सुखों की बरसात होती है और कभी दर्द के काले बादल  उसकी जिंदगी में अंधेरा कर जाते हैं । फिर अचानक से उसकी जिंदगी के आसमान में बिजली चमककर एक नया रास्ता भी दिखा देती है। बारह … Read more

आखिरी फोन कॉल – लतिका श्रीवास्तव

पैर पत्थर से टकराया और दर्द की एक तीखी लहर रमिया के शरीर में दौड़ गई। वह लड़खड़ाकर सड़क किनारे बैठ गई। घुटने से रिसते खून को देखकर उसने अनायास ही एक फीकी मुस्कान भर दी। “इतना दर्द तो नहीं था…” उसने मन ही मन सोचा। दर्द की असली परिभाषा तो उसे उस आखिरी फोन … Read more

ख्वाहिश का दर्द – अंजना ठाकुर

सुनो जी इस बार मेरी बहन गुजरात घूमने जाने का प्रोग्राम बना रही मुझे द्वारकाधीश के दर्शन करने का बड़ा मन है मुझसे भी पूछ रही इस बार हम चलें क्या नीलम ने डरते -डरते अपने पति गिरीश से पूछा ‘हर बार की तरह गिरीश का बही जवाब, अभी पहले घर की जिम्मेदारी तो पूरी … Read more

दर्द – सुदर्शन सचदेवा

“अजी सुनते हो… नेहा आ रही है!” रसोई से उत्साह भरी आवाज़ आई। यह सुनते ही रमेश जी के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी। “सच! कितने दिनों बाद हमारी बेटी घर आ रही है।” उन्होंने तुरंत अख़बार एक तरफ रखा और बोले, “उसकी पसंद की कचौरी, खीर और आलू के पराठे बनाना… और हाँ, उसका … Read more

मेरे माँ बाप ने मुझे ऐसे संस्कार नहीं दिए है – मंजू ओमर

माँ मै आज से अलग घर मे रहने जा रहा हूँ सलोनी के साथ। क्यों बेटा उर्मिला जी ने पूछा बेटे कपिल से, क्योंकि सलोनी अब इस घर मे आप लोगो के साथ नहीं रहना चाहती। तभी पीछे से सलोनी आ गई। इसी महारानी ने तुझे भडकाया होगा वरना मेरा बेटा तो ऐसा नहीं है … Read more

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