आखिरी पड़ाव का दु:ख

पिछले कुछ दिनों से मुआं पेशाब बहुत आ रहा है। रात को दो-तीन बार मुझे उठना पड़ता है। घुटनों के दर्द के कारण जान निकल जाती है मेरी ! मन करता है, कमरे के बाहर वाली नाली पर ही बैठ जाऊँ, पर बहू की झिड़कों से डरती नहीं बैठती। एक बार बैठी थी तो अगली … Read more

अनुपमा का प्रेम

  ”चाहै जिसे हाथ पकड़ा देने का नाम ही विवाह नहीं है। मन का मिलन न होने पर विवाह करना भूल है !” बड़ी बहू चकित होकर अनुपमा के मुंह की ओर देखती हुई बोली, ” हाथ पकड़ा देना क्या बात होती है? पकड़ा नहीं देंगे तो क्या ल़ड़कियां स्वयं ही देख-सुनकर पसंद करने के बाद … Read more

कड़ियां

राज के बाल सुलभ मन पर दादाजी की पहली छवि यह बनी थी कि दादाजी उसे अपने साथ नहीं रखना चाहते। आख़िर क्यों?       दफ़्तर के लिए तैयार होने लगा राज। उसका मन कुछ उचाट-सा हो रहा था। रह-रहकर एक ही बात उसके दिमाग में घुमड़ रही थी कि दादाजी के जीवन में … Read more

घीसू

संध्या की कालिमा और निर्जनता  में किसी कुँए पर नगर के बाहर खड़ी प्यारी स्वर लहरी गूंजने लगती। घीसू को गाने का चस्का था, परन्तु जब कोई न सुने? वह अपनी बूटी अपने लिए घोटता और आप ही पीता। जब उसकी रसीली तान दो चार को पास बुला लेती, वह चुप हो जाता। अपनी बटुई … Read more

तपिश

 आशिक मिज़ाज लगते हैं ज़नाब?  “ “  नहीं भाई, लोफर किस्म का आदमी नहीं हूँ मैं।  बरसों बाद मुल्क लौटा हूं, इसलिए चप्पा-चप्पा आंखों में भर लेना चाहता हूँ। “  मेरे लिए  अब अपनी सफाई में कुछ कहना बहुत ही ज़रूरी हो चला था, पर जाने क्या था उन भेदती छोटी-छोटी, सलेटी और  मटमैली पड़ती  … Read more

पिया वही जो दुल्हन मन भाए

इधर रोजी के लिए तीन सप्ताह मानो तीन दिन की भांति उड़े जा रहे थे। जिस दिन संबंध तय हुआ रोजी की मनःस्थिति बिल्कुल बदल गई। अब तक जिसे वह लापरवाही से ले रही थी, आज वही बात जीवन की सबसे गंभीर घटना बन गई। विवाह का क्या अर्थ होता है, वह पापा-मम्मी के जीवन … Read more

क्षमा का अमृत

गले में शब्द जैसे अटक गए हों, सुधीर कुछ बोल ही नहीं पाया। माधवराव ने फल और मिठाइयों का थैला रोहन के हाथ में दिया। फिर वे सुधीर के बिल्कुल करीब गए, अपने दोनों हाथ जोड़े और भारी, भर्राई हुई आवाज में बोले, “सुधीर मेरे भाई… इतने सालों में मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है। … Read more

एहसास का आईना

कौशल्या देवी की आंखों से पछतावे के आंसू बह निकले। वे वहीं जमीन पर बैठ गईं और रोने लगीं। “मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई दीनानाथ जी। सच में, मैं अपनी सत्ता और अधिकार के नशे में इतनी अंधी हो गई थी कि मैंने यह सोचने की कोशिश ही नहीं की कि श्रुति के माता-पिता … Read more

आँगन की देहरी और आसमान

मालती देवी धीरे-धीरे चलकर अंजलि के पास आईं। उन्होंने उसके सिर पर अपना झुर्रियों भरा, कांपता हुआ हाथ रखा। “मत रो अंजलि बहू। यह दुनिया ऐसी ही है। जब औरत कमज़ोर होती है, तो उसे रौंद देती है, और जब वह मज़बूत बनती है, तो उसे बदचलन कहने लगती है। जा, उठकर मुँह-हाथ धो ले। … Read more

खामोशी की गहराई

अमन रोते हुए बोला, “जीजाजी, मुझे माफ कर दीजिए। मैं दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ख हूँ। मैंने हमेशा आपको गलत समझा। मुझे लगा कि जो लोग मीठी-मीठी बातें करते हैं, हंसी-मजाक करते हैं, वही अच्छे होते हैं। मैं आपको बोरिंग और घमंडी समझता रहा। लेकिन आज मुझे समझ आया कि बातें तो कोई भी कर … Read more

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