आखिरी पड़ाव का दु:ख
पिछले कुछ दिनों से मुआं पेशाब बहुत आ रहा है। रात को दो-तीन बार मुझे उठना पड़ता है। घुटनों के दर्द के कारण जान निकल जाती है मेरी ! मन करता है, कमरे के बाहर वाली नाली पर ही बैठ जाऊँ, पर बहू की झिड़कों से डरती नहीं बैठती। एक बार बैठी थी तो अगली … Read more