किचन क्वीन – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

 उनकी पोती के जन्मदिन की पार्टी खूब जोरों-शोरों से चल रही थी. कोविड की एहतियात के मद्देनजर उनकी बहू ने अपने पाँच-छः पारिवारिक मित्रों के साथ एक छोटी सी पार्टी का ही आयोजन किया था. अपनी-अपनी पसंद के अनुसार प्लेटों में स्नैक्स लेकर सभी मित्र यहाँ-वहाँ गपशप में मशगूल थे. पुरुष वर्ग अपनी राजनीतिक तथा … Read more

एक वेडिंग – हरीश श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

लीजिए सक्सेना साहब,मिल लीजिए लड़के से और बुलाइए बिटिया को ताकि दोनों लोग बात कर सकें। वीरेन्द्र सक्सेना कार्पोरेशन में सीनियर सिविल इंजीनियर थे।अच्छा खासा नाम और कमाई थी।पर एक हद में ही रहते थे।एक लड़की थी बड़ी रत्ना जिसने हाल में ही एमबीए किया था और एक लड़का जो किसी प्राइवेट कम्पनी मे इंजीनियर … Read more

कभी नहीं… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

गुस्से से पैर पटकती दामिनी… खुद से बड़बड़ाती… किचन में जाकर फटाफट सब्जियों पर छुरी पटक पटक कर… अपना गुस्सा निकालने लगी… जल्दी-जल्दी हाथ चलाते हुए… उसने कुकर में सारी सब्जियां डालकर सूप बनने को चढ़ा दिया…  बच्चों की तो कब से फरमाइश हो रखी थी… मशरूम की सब्जी और साथ में पूरी… सब बनाकर … Read more

भाभी – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

हेलो दीपिका कैसी हो , हां ठीक हूं भाभी।तुम लोग तो अपनी भाभी को जैसे भूल ही गई हो ।आज मैंने गीतिका को भी फोन लगाया था । जबसे सासूमां इस दुनिया से गई हैं तुम लोग तो मुझे और भइया को जैसे भूल ही गई हो अरे अभी भाभी भइया की भी खोज खबर … Read more

कलंकित रिश्ता – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

संध्या ने चीखते हुए कहा..”बस कर अंशिका ! कुछ भी बोलती रहती है, जब देखो तब चाचू की शिकायत करती रहती है । एक तो तेरे चाचू नहीं हैं कोई ,ऊपर से ये पवन चाचू तेरे पापा के ममेरे भाई ! हमारे पड़ोसी होने के साथ – साथ तुम्हें पढ़ाने में भी कितनी मदद करते … Read more

जब बच्चों को अकेले रहने की आदत हो जाती है तो बड़े बुजुर्गों से उन्हें बंधन दिखाई देने लगता है – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

प्रणति और हरिप्रसाद मध्यम वर्गीय परिवार के थे । हरिप्रसाद सरकारी स्कूल में गणित पढ़ाया करते थे । उनकी शादी के दो साल बाद उनके घर पुत्र का जन्म हुआ। उसका नाम आदित्य रखा ताकि सूर्य की तरह वह चमकता रहे । उसी समय उन्होंने सोच लिया था कि अपने बेटे को बहुत पढ़ा लिखाकर … Read more

पछतावे के ऑंसू – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

स्नेहा जैसे ही तैयार होकर ब्रेकफास्ट टेबल पर पहुॅंची।वहाॅं अंशुल को ना देख उसने रामू काका से पूछा “काका,अंशुल ने ब्रेकफास्ट कर लिया।” “नहीं बिटिया, अंशुल बाबा तो अब तक उठे ही नहीं है।” “क्या! अब तक नहीं उठा। 9:00 बज रहे हैं। 10:00 बजे तो उसकी कोचिंग है। हद होती है, लापरवाही की। दिल्ली … Read more

चुप एकदम चुप — संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

चुप एकदम चुप…..! एक शब्द भी नहीं बोलोगी तुम किसी से इस विषय पर समझी……। अब जो करना है मैं करुँगी श्वेता ने कड़े शब्दों मे डांटने के लहजे में समझाते हुए  नौ वर्षीय बेटी महक से कहा……! पर क्यों माँ क्यों….?  मैं चुप क्यों रहूँ , मेरी गलती क्या है…..मैंने क्या किया है महक … Read more

पछतावे के आंसू – मंजू ओमर  : Moral Stories in Hindi

शिवम् के पिता बचपन में ही एक एक्सीडेंट में गुजर गए थे ।शिवम् की मां सुजाता जी ने स्कूल में टीचर की नौकरी करके शिवम् को अकेले ही पाला था।और पढ़ा लिखा कर लायक बनाया था ।आज शिवम् किसी प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करता था।शिवम् अट्ठाइस का हो चुका था । सुजाता अब शिवम् की … Read more

रिश्तों में यूँ ही नहीं आती खटास – रश्मि प्रकाश  : Moral Stories in Hindi

आज सभी लोग अपने अपने घर को चले गए पीछे फिर से वही लोग रह गए जिनको कहीं जाना ही नहीं था पर सबकी विदाई करने के बाद भी मानसी को किसी भी बात का कोई मलाल नहीं था…. होता भी कैसे एक वक्त वो भी था जब वो बस पश्चाताप के आँसू बहाया करती … Read more

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