दिखावे की जिंदगी – सुनीता माथुर : Moral Stories in Hindi

रश्मि जब देखो तब तुम मुझे छोटी नौकरी का ताना मारती रहती हो—— और मेरे सारे पैसे—- अपनी साड़ियां खरीदने में और दिखावे में उड़ा देती हो! अपनी अमीर सहेलियों की बराबरी करती हो—- उनके घर इतना महंगा सामान है! तो हमारे घर भी होना चाहिए—- तुम्हें मालूम होना चाहिए मैं एक क्लर्क हूं और … Read more

सरेआम बेइज्जती – प्राची अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

संगीता मध्यम वर्गीय परिवार में पली बड़ी, खूबसूरती में बेजोड़। समय रहते ही उसके पिता ने अपने जैसा ही एक घर देखकर उसके हाथ पीले कर दिए। लोग हमेशा से ही उसकी खूबसूरती की तारीफ करते इसलिए थोड़ा इतराती भी थी। अपने परिवार में अपनी सब जिम्मेदारियां निभा रही थी। उसकी एक सहेली की शादी … Read more

व्यवहार – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

 ‘माँ,भाभी शिक्षित अवश्य हैं,किंतु रसोई के काम में बिल्कुल भी माहिर नहीं हैं। देखो न,सब्जियों में तेल-घी तो न के बराबर ही डालती हैं। रोज ही उनकी बनाई सब्जियों में नमक और मिर्च मसाला कम होता है। इतनी रूखी-सूखी और  बेस्वाद सब्जियां कोई कैसे खा सकता है ? आप कभी कुछ कहती क्यों नहीं उन्हें … Read more

पिता के सपने – जया शर्मा प्रियंवदा : Moral Stories in Hindi

सूरज और किशोर बचपन से ही एक साथ ही खेलकूद कर बड़े हुए। दोनों के ही परिवार शुरू से ही एक दूसरे के सुख दुख में साथ रहते हुए, एक अच्छे पड़ोसी होने का धर्म निभाते रहे । सूरज और किशोर की उम्र बराबर होने के कारण ,दोनों दिनभर एक साथ खेलते रहते । सूरज … Read more

नई दिशा – सीमा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मयंक ने माही के पास जाकर कहा, “हाय, मैं मयंक! दुल्हे का सबसे खास दोस्त! क्या आप यहाँ लड़की वालों की ओर से मेहमान हैं?”  माही ने उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा, ” अरे वाह! बिल्कुल सही पहचाना आपने! जैसे आप दुल्हे के खास दोस्त, वैसे ही मैं दुल्हन की खास सहेली! बस यहीं … Read more

नमक मिर्च लगा कर कहना – खुशी : Moral Stories in Hindi

शीला एक गृहणी थी।जिसका समय अपने घर में कम गैलरी में ज्यादा बीतता था। गली में क्या चल रहा है कौन आया कौन गया उसे सब पता था और फिर वो लोगों को नमक मिर्च लगा कर बताती।उसके सामने वाले घर में राजीव ,नीति और उसकी सास विद्या रहने आई।दोनो बेटा बहु नौकरी करते थे।विद्या … Read more

खैरात के पंख – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

मिशिका जल्दी जल्दी अपना काम निपटा रही थी, उसने जो पर्सनेलिटी विकास की क्लास ज्वाइन की थी, उसका समय हो रहा था, उसकी भतीजी बार बार बुलाने आ रही थी, बुआ , क्लास के लिए जाना नहीं है क्या, बस सोमा हाथ का एक काम खत्म कर लूं, पर बुआ तुम्हारी बस , भी तो … Read more

असलियत कुछ और है – शुभ्रा बैनर्जी  : Moral Stories in Hindi

रीना की सासू मां ने चहकते हुए कहा”बहू,ओ बहू !!!खुशखबरी है।तुम्हारे बड़े भांजे की शादी पक्की हो गई।रजनी(बड़ी ननद)ने अभी बताया।दामाद जी ने सबसे पहले हमें ही खुशखबरी दी है।अच्छे से तैयारी कर लेना।मुझे जल्दी ही ले जाएगी आकर।शादी के नियम नहीं जानती ना वो।अमित को बोलना,बहू के लिए सोना तो देना ही पड़ेगा।” रीना … Read more

बेटे की माँ बनना ही काफ़ी नहीं है… – रश्मि प्रकाश  : Moral Stories in Hindi

“ये क्या बेटा  बाहर से आए हो कपड़े तो बदल लो… आते ही आराम कुर्सी पर आराम फ़रमाने लगे… देखरही हूँ दिन प्रतिदिन तुम बिगड़ते जा रहे हो।” ग़ुस्से में नयना अपने बेटे आदि के कपड़े बदलने की जुगत करती बोली  तभी उसने देखा देवरानी अदिति की बेटी इरा खुद ही कपड़े बदल कर अपनी … Read more

मैं तो बहुत खुश हूँ – विभा गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

 ” सुनिये ना.. सोफ़ा खरीद लीजिये ना..बच्चों के दोस्त आते हैं तो उन्हें कुरसी पर बैठाना बहुत खराब लगता है..सबके घर में…।” छवि की बात पूरी होने से पहले ही मानव बोल पड़ा,” ओफ़्फ ओ…तुम फिर से शुरु हो गई..।”      ” तो आप मेरी बात मान क्यों नहीं लेते…।” मनुहार करते हुए वो बोली तो … Read more

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