अतीत की परछाइयां – डोली पाठक : Moral Stories in Hindi

भीमा को आज बार बार अतीत की परछाइयां आकर घेर रही थीं और वो चाह कर भी उनसे मुक्त नहीं हो पा रहा था। जाने वो कौन सी मनहूस घड़ी थी जब इस शहरी बाबू ने उसके जीवन में प्रवेश किया था। और भीमा की जिंदगी को एक  दम से बदल कर रख दिया। भीमा … Read more

दिशा भूल – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

रीना और मीना दोनो बचपन की सहेलियां थी। साथ पढ़ती, साथ खेलती, खाना भी साथ ही होता। दोनों का ससुराल भी एक ही शहर में था। मैत्री का झरना अविरल बहता रहा। रीना के पति रूचित गंभीर स्वभाव के थे। कर्मठ और इमानदार। आमदनी ठीक-ठाक थी। फुरसत के पलों में लिखना, पढना, दूरदर्शन पर कोई … Read more

समझौता अब नहीं – सीमा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

जैसे-जैसे मानसी के मौसेरे भाई तेजस के विवाह का शुभ दिन निकट आ रहा था, उसके हृदय में उल्लास की लहरें हिलोरे ले रही थीं। “घुड़चढ़ी की रस्म में यह मखमली हरी साड़ी पहनूँगी और बारात के लिए वह सुनहरी लहंगा। सभी आत्मीयजनों से भेंट होगी! अहा, कितना आनंद आएगा!” मानसी अपने मन के भीतर … Read more

सही फैसला – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

भाभी आ गईं, भाभी आ गईं, चलो चलकर देखते है। रीता और मीता के बड़े भाई रमेश क़ी कल शादी थी और आज दुल्हन को लेकर बारात लौटनी थी। बस आज सुबह से ही रीता और मीता अपनी सहेलियों के साथ बड़ी बेचैनी से अपनी भाभी का इंतजार कर रही थी। गाड़ी की आवाज सुनते … Read more

रिश्ता – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

डोर बेल सुनकर मैंने दरवाजा खोला, तो देखा कि सामने मेरा दोस्त अनुज खड़ा हुआ फोन पर किसी से बात कर रहा था, ओर हँसते हँसते ओके ओके, ठीक है, ठीक है,  बोल रहा था। उसका हँसना मुझे बड़ा अजीब लगा, क्योकि अक्सर गंभीर रहने वाला इंसान आज हँस रहा था। फोन बंद होने पर … Read more

समझौता – अनिता मंदिलवार “सपना” : Moral Stories in Hindi

 राधा, किस सोच में डूबी हो, कहते हुए सुधीर अंकल कब उसके केबिन में आ गये उसे पता ही नहीं चला ।     जी अंकल, कहिए  । आप कब आए ?      राधा, तुम इतनी उदास क्यों रहती हो । बताओ क्या बात है? कुछ दिनों से देख  रहा हूँ । किसी से बातचीत नहीं करती । … Read more

समझौता अब नहीं – डोली पाठक : Moral Stories in Hindi

मालकिन अब मुझसे नहीं हो सकेगा…. ये देखिए मेरे हाथों का हाल…  आपने जो फर्श साफ करने वाला लिक्विड दिया था उसने मेरे हाथों को जला दिया….  बुचन बोली… देखो बुचन तुम शायद भूल रही हो कि,अभी तुमने जो पैसे लिए थे वो दिए नहीं है तुमने…. प्रमिला बोली। बुचन प्रमिला के घर का सारा … Read more

बेटी की चाहत – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

इमरजेंसी वार्ड के लेबर रूम के बहार प्रभा देवी और उनके पति नरेंद्र बाबू चिन्तित चहलकदमी कर रहे। अन्दर उनकी छोटी बहू रमा की डिलीवरी जो होने वाली है। दो घंटे बाद लेबर रूम का दरवाजा खुलता है। नर्स हाथों के दस्तानों को उतारती उत्सुकता से बोली बधाई हो अम्मा पोता हुआ है। नर्स ने … Read more

बहू और बेटी – रश्मि वैभव गर्ग : Moral Stories in Hindi

सपना, रोज़ तड़के ही उठ जाती थी ।उठते ही घर का बुहारा निकालती , साफ़ सफ़ाई करती, अपने बुज़ुर्ग सास ससुर को चाय बनाकर देती.. फिर उनके साथ बैठकर ,ख़ुद भी चाय पीती थी । उसकी सेवा और संस्कार देखकर उसके सास ससुर फूले नहीं समाते थे ,लेकिन उन्हें एक ही दुख था कि उनके … Read more

एहसास – डॉक्टर संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

कविता आज भी तुमसे मिलने नहीं आई देव? शिखा ने पूछा तो देव थोड़ा खिसिया गया,उसे बर्दाश्त नहीं था कि कोई उसकी कविता के बारे में कुछ बात बनाए। नहीं..उसकी तबियत ठीक नहीं होगी नहीं तो वो ऐसा कभी नहीं करती…बहुत विश्वास से कहा देव ने। कल ही तो अपने फ्रेंड्स के साथ पिकनिक पर … Read more

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