रिश्तें और प्रथा –  उषा वेंकटेसन

रेखा  ने धीरे से अपनी आंखें खोली !  ऐसा लग रहा था की पूरा कमरा घूम रहा है । वह सुस्त और कमजोरी महसूस कर रही थी। वह जानती थी कि उसे उठकर खाना बनाना है। “दादी उठ गयी! दादी  उठ गयी!” उसका पोता दौड़ते हुआ अपने पप्पा को बता रहा था। चिंतित अमित कमरे … Read more

मैं तो मज़ाक कर रही थी-रोनिता कुंडु

लतिका! मासी जी आई है, चाय नाश्ता लेकर आना। आशा जी ने अपनी बहू लतिका को आवाज़ लगाई। थोड़ी ही देर बाद, लतिका चाय और नमकीन लेकर आती है, जिसे देखकर आशा जी कहती हैं, यह क्या बस नमकीन? पकौड़े ही तल लेती? पर उसमें तो मेहनत लगती है, तो फिर कामचोरी कैसे हो पाती? … Read more

हर रिश्ते की एक मर्यादा है-संगीता अग्रवाल

” श्रुति बेटा तैयार हुई की नही लड़के वाले आते ही होंगे !” सरिता ने बेटी को कमरे के बाहर से आवाज़ दी । ” हां मम्मी हो गई !” ये बोल श्रुति ने दरवाजा खोल दिया। ” नज़र ना लगे मेरी बेटी को कितनी सुन्दर लग रही है !” ये बोल सरिता ने उसके … Read more

रिश्तों की मर्यादा – परमा दत्त झा : Moral Stories in Hindi

“भाभी, सुबह के पांच बज गए, उठो महारानी और चाय बनाओ” -ननद रत्ना अपनी भाभी रमा को जगाने आयी थी। इधर भाभी रमा अपनी दोनों ननदों से बुरी तरह से परेशान थी।इसी शहर में ब्याही दोनों ननदें जब-तब आ जाती और दस दिन पड़ी रहती,क्या मजाल किसी काम को हाथ लगा दे।मगर आज रमा गुस्से … Read more

रिश्तों की मर्यादा – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

कमरे में हल्का अंधेरा था। बाहर बारिश की बूँदें, खिड़की पर थिरक रही थीं — जैसे हर बूँद पूछ रही हो, “क्या आज फिर कोई रिश्ता भीगने वाला है?” नैना ने आरव को देखा — उसकी पीठ अब भी मुड़ी हुई थी, जैसे उसने बात नहीं सुनी हो। लेकिन नैना जानती थी — आरव सब … Read more

बहु ये मत भूलो, की भगवान् सब देखता है । – लक्ष्मी त्यागी :

अब नंदिनी, अपनी मन मर्जी से सभी कार्य करती है , उसे किसी की कोई  परवाह नहीं ,जब नंदिनी इस घर में नई – नई आई थी, तो चुपचाप और शांत रहती थी। देविका जी चाहती थीं – बहू !को कभी अपने घर की याद न आये , इस घर को भी अपना समझे, अपना … Read more

मर्यादा एक स्त्री की – ज्योति आहूजा : Moral Stories in Hindi

संध्या के घर में एक छोटा सा फंक्शन था। जब भी उसे ब्यूटी से जुड़ा कोई काम करवाना होता, वह अपनी जान-पहचान वाली ब्यूटीशियन रूपा को ही बुला लेती थी। रूपा वही करती थी जैसा कहा जाए — बिना चूं-चपड़, बिना बहस। संध्या को लगता था कि काम करवाना सिर्फ़ पैसे देना नहीं होता — … Read more

रिश्तो की मर्यादा – सुनीता मुखर्जी “श्रुति” : Moral Stories in Hindi

स्वरा..! तुम अपनी मर्यादा में रहो। हमारे घर के रिश्तों को कभी छेड़छाड़ करने की कोशिश भी मत करना। मत भूलो..! यह घर अब तुम्हारा भी है। “इस घर की बुनियाद प्रेम और विश्वास पर जानवी भाभी ने रखी है, जो बहुत ही मजबूत है। उसे हिलाने की कभी कोशिश भी मत करना…?” संकेत का … Read more

खुशनसीब – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

सुलोचना जी की भाभी को गुजरे एक साल से ऊपर हो गए थे । माँ से ज्यादा उन्हें भाभी से लगाव था  । भैया की कम उम्र में ही शादी हो गयी थी । माँ प्रायः बीमार रहती थीं । इकलौती बेटी घर में होने की वजह से बहुत मान और प्यार मिलता था माँ … Read more

दिल से बंधे नाजुक धागे से रिश्ते – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

डोरबेल की आवाज सुनकर निम्मी दौड़कर दरवाजा खोलने पहुंची आज उसकी किसी सहेली ने आना था। मगर दरवाजे पर बड़ी ननद नमिता को देखकर चौंक पड़ी अरे दीदी आप, बिना खबर किये कैसे आना हुआ ? क्यूँ बहु तुम तो ऐसे चौक रही हो नमिता को देख जैसे भूत देख लिया हो भई उसका घर … Read more

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