रिश्तें और प्रथा – उषा वेंकटेसन
रेखा ने धीरे से अपनी आंखें खोली ! ऐसा लग रहा था की पूरा कमरा घूम रहा है । वह सुस्त और कमजोरी महसूस कर रही थी। वह जानती थी कि उसे उठकर खाना बनाना है। “दादी उठ गयी! दादी उठ गयी!” उसका पोता दौड़ते हुआ अपने पप्पा को बता रहा था। चिंतित अमित कमरे … Read more