अव्यक्त पितृत्व: अनुपस्थिति का स्पर्श – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

सर्दियों की उस सुबह, जब सूरज की किरणें धुंध को चीर रही थीं, रवि खिड़की के पास खड़ा था। उसकी बेटी आरती का विवाह-कार्ड उसकी उंगलियों के बीच था – चमकीला, भारी कागज पर सुंदर टाइपोग्राफी। एक पल के लिए उसकी निगाह कार्ड पर पिता के नाम के खाली स्थान पर अटक गई। **”श्रीमान…”** वहां … Read more

मेरी सासु माँ बहुत समझदार है – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

कुमुद ऑफिस से आकर कॉलवेल बजाने ही जा रही थी कि देखा कि दरवाजा खुला है और उसे अपनी ननद की आवाज सुनाई दी। उसने सोचा चलो अच्छा है दीदी आ गईं तो माँ का मन लगा रहेगा।कुमकुम दिनभर घर मे रहती थी तो माँ को बहुत अच्छा लग रहा था, पर दो दिन पहले … Read more

शुभम के दादाजी – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

     ”  पापा जी , यह दादा जी कब तक हमारे यहां रहेंगे ? बारह वर्षीय शुभम ने अपने पापा से पूछा|                ” ये अब यही रहेंगे हमारे साथ |  तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो ?”  पापा ने शुभम से कहा |                            … Read more

फर्ज – रेणु सिंह : Moral Stories in Hindi

बीना ,तुमने क्या सोचा? किस बारे में मम्मी! देखो बेटा अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है  सारी उम्र ऐसे यहां बिना किसी सहारे के कैसे रहोगी तुम , आज पूरे छः महीने हो गए है राघव को गए हुए कभी तो हमारी बात सुन लिया करो  मां …. कितनी बार यह बात बोलोगी तुम  मैंने … Read more

“रेखाएं जो जोड़े रखती हैं” – रेखा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रायन और श्रुति – एक परफेक्ट कपल कहे जाते थे। दोनों ही मल्टीनेशनल कंपनियों में ऊँचे पदों पर थे, आधुनिक जीवनशैली जीते थे और स्वतंत्र सोच के समर्थक भी थे। शादी को पाँच साल हुए थे, पर अब रिश्ते में वो गर्माहट नहीं रही जो शुरू के दिनों में थी। शुरुआत में सब कुछ अच्छा … Read more

घर बनाम आश्रम – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू : Moral Stories in Hindi

———————– सामान उठा कर जाते जाते उसकी नज़र अपने पति की तस्वीर पर पड़ी और पड़ते ही उसे उसके बीत दिन एक रील की तरह मन मस्तिष्क में घूमने लगे कितने अरमानों से शादी  करके घर बनाया थी ।पर क्या पता था कि बढ़ती उम्र के साथ इतना कुछ बदल जायेगा। कहते है ना कि … Read more

“रंगोली रिश्तों की” – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

मीना का भरापूरा परिवार था| अधिकतर सभी रिश्तेदार शहर में ही रहते थे।सास-ससुर के जाने के बाद भी उसने सबसे व्यवहार बनाकर रखा था। मिलनसार होने के कारण मीना के घर रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहता था।मीना ने अपने बेटे रोहित की शादी बड़ी धूमधाम से की थी।बहु नैना को भी वह बहुत प्यार करती … Read more

“रिश्तो की मर्यादा” – सरोजनी सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रघुनाथ जी गांव के जाने-माने किसान हैं ।उनके पिताजी का काफी समय से पुश्तैनी संयुक्त परिवार रहा है । अब पिताजी रहे नहीं । रघुनाथ जी दो भाई छोटे भाई हरि कृष्ण, उनकी पत्नी राधा रानी । हरि कृष्ण जी के दो बच्चे एक बेटा राजू एक बेटी राज । बेटा तो अभी पढ़ रहा … Read more

रिश्तों की मर्यादा – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय

“देखो शुभी यह क्या है मेरे पास!” ,शुभी का पति शुभम मुस्कुराते हुए कमरे में आया। उसे मुस्कुराते हुए देखकर शुभी ताजुब में पड़ गई “ऐसा क्या हो सकता है?” वह सब काम छोड़कर उसके पीछे पीछे गई “क्या है दिखाओ?” “नहीं ऐसे नहीं शुभम ने अपने हाथ पीछे कर लिया। “ नहीं मुझे दिखाओ … Read more

क्या मैंने गलत किया? – पुष्पा जोशी   

उम्र के इस पड़ाव पर जब  सब कुछ सामान्य चल रहा है, एक प्रश्न को लेकर मेरे मानस में हमेशा मंथन चलता रहता है कि मैंने रिश्तों की मर्यादा निभाई या नहीं? परिवार से अलग होकर क्या मैंने गलत किया? कहने के लिए मैं परिवार से अलग हो गई, मगर मेरे जीवन में उनका महत्व … Read more

error: Content is protected !!