खानदानी कंगन – शुभ्रा बैनर्जी
दीपावली की छुट्टियों में बेटी दस दिनों के लिए आ रही थी।मधु को बड़ा आराम मिल जाता था,बेटी के आने से।पूजा -पाठ की पूरी तैयारी अपने जिम्मे ले लेती थी वह।बचपन से मां के कामों में हांथ बंटाती थी वह।बिना बोले भांप जाती थी मां के मन की पीड़ा।बेटा(राघव) भी खुश था बहन के आने … Read more