ईश्वर- अरविंदा ब्रजेश महाजन
एक दिन सुबह सुबह दरवाजे की घंटी बजी । दरवाजा खोला तो देखा एक आकर्षक कद- काठी का व्यक्ति चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान लिए खड़ा हैं । मैंने कहा, *”जी कहिए..”* तो उसने कहा, अच्छा जी, आप तो रोज़ हमारी ही गुहार लगाते थे, मैंने कहा *”माफ कीजिये, भाई साहब ! मैंने पहचाना नहीं, … Read more