मेरी संजीवनी बूटी – लतिका श्रीवास्तव : Short Moral Stories in Hindi

 लक्ष्मण जी की मूर्च्छा को जीवन देने वाली संजीवनी बूटी थी मां ,और मैं जानता हूं प्रिया की संजीवनी बूटी मां आप सब हो….अविनाश अपनी सास यानी प्रिया की मां से  बहुत आत्मीयता से मोबाइल में बात कर रहा था…इतने में प्रिया ने पीछे से आकर हंसकर कहा अच्छा जी तो फिर तुम्हारे हनुमान बनने … Read more

कशमकश – रीटा मक्कड़

“आंटी ये लो प्रशाद”अनिता ने पीछे मुड़ कर देखा तो दरवाजे से अभी अंदर आयी थी मीरा..   मीरा अनिता के घर मे पिछले सात आठ महीने से काम कर रही थी। आज पहली बार उसने मीरा को इतनी सजी धजी और खुश देखा था। रंग बिरंगी कढ़ाई वाली साड़ी, बड़े से झुमके ,हाथ मे … Read more

महत्व – कंचन श्रीवास्तव

****   माना काम का विशेष महत्व है जीवन में पर ये तब और बढ़ जाता है जब मन का हो। वैसे तो संतुष्टि शब्द है ही नहीं जीवन में क्योंकि अनंत इच्छाओं के मकड़जाल में फंसा है आदमी।अब इन्हें ही ले लो पचास पूरा करते करते जाने कितनी नौकरियां बदले,जाने क्या है कि कहीं … Read more

सामान्य समझ – तरन्नुम तन्हा

नई नई शादी होकर घर में आई थी मैं। ‘एम ए बी एड है बहू मेरी’, मेरे ससुर साहब तो सबसे मेरी तारीफ़ करते, लेकिन घर में मेरी सासुमाँ हर समय बुराई ही करतीं, ‘इसे ये नहीं आता, इसे वो नहीं आता’। ससुर जी चुप रह जाते, और मैं खुद को समझाती, ‘अगली बार और … Read more

रेनकोट- विनय कुमार मिश्रा

“मम्मी! मेरा रेनकोट देखा है क्या आपने?” “पता नहीं बेटा.. वैसे भी तू तो कल रेनकोट में भी थोड़ा भीग गया था, वो फट गया है कहीं से” “हाँ माँ फट तो गया है पर फिर भी उससे बहुत सेफ रहता हूँ। अच्छा ये रोहन कहाँ है?” “अब समझी, वही शायद तेरा रेनकोट पहनकर तेरी … Read more

अभिनेत्री – नीरजा कृष्णा

अपनी वैनिटी वैन में मेकअप करवा रही सुनैना मंद मंद मुस्कुरा रही थी। वहीं शूटिंग कर रहे सुपरस्टार रवि भूषण  और वो दोनों आज डेट पर जा रहे थे। वो बहुत खुश थी…देश के सबसे बड़े सुपरस्टार का दिल उस पर आ गया था और वो उससे शादी करना चाह रहे थे। इसके लिए वो … Read more

भाभी का घर – नीरजा कृष्णा

भैया भाभी ने बहुत मेहनत और अरमानों सें छोटा सा बंगला बनवाया है… बाबूजी और अम्मा तो तरसते ही रह गए… बहुत इच्छा थी बेटे बहू के प्यारे से नीड़ को देखने की…वो चाह कर भी उनकी इच्छा पूरी नही कर पाए…उन दोनों की बीमारी… छोटी बहन के विवाह की जिम्मेदारी… अपने  दो बेटे और … Read more

दिल की व्यथा – डा. मधु आंधीवाल

कल तक खूब रंगो की बहार थी । आज फिर वही सन्नाटा । सब अपने फ्लैटों में बन्द । रेखा सोच रही थी । वह अपने गांव की होली का त्यौहार एक हफ्ता पहले और एक हफ्ता बाद तक बच्चों की तो लाटरी निकल आती थी पर इन बड़े शहरों में त्यौहार कम मनते हैं … Read more

माएके का ज़ख्म – अनुपमा

मां बार बार फोन कर रही थी इतने सालों से देखा नही तुझे मालती और बच्चों को , आ जा इस बार फिर पता नही मुलाकात हो या न हो । मालती हां मां आती हूं जल्दी ही ये कह कर फोन रख देती थी ।  ये सिलसिला पिछले दस सालों से चल रहा था … Read more

मैं हूँ न – प्रीति आनंद अस्थाना

***** “अरे तुमने रामेश्वर बाबू के बारे में सुना? बेचारे बहुत परेशान हैं आजकल!” रामेश्वर बाबू? ये नाम तो पुष्कर को  जाना-पहचाना लग रहा था। वही तो नहीं जिन्होंने आज से दस वर्ष पहले उसकी मदद की थी? पूरी कहानी तैर-सी गई आँखों के सामने! उसका इंटरव्यू था दिल्ली में, उसके लिए उसे कुछ सर्टिफिकेट्स … Read more

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