नाश्ता नहीं सुकून – कंचन श्रीवास्तव

**””””””********** कहते हैं समय बहुत बलवान होता है , ये कब कहां कैसे रंग दिखलाए पता ही नहीं चलता, इसलिए बहुत बोलना अच्छा नहीं होता । जहां रोज की सुबह तनाव भरा रहता है वहीं आज थोड़ा रिलेक्स मुड़ में उठी और सोचने लगी, क्या सचमुच रिश्तों में दरार आ जाए तो जीना मुश्किल हो … Read more

 बरसात की एक रात –    मुकुन्द लाल

#जादुई_दुनिया    अंधेरी रात थी। घंटे-आधघंटे के अंतराल पर हल्की बारिश हो रही थी। रह-रहकर बादल के गरजने और बिजली के चमकने का क्रम जारी था। हवाएँ तेज गति से चल रही थी। वृक्षों की डालियाँ इस तरह से हिल रही थी, मानों टूटकर गिर जाएगी। मेढ़कों की टर्र-टर्र की आवाजें वातावरण में कंपन पैदा कर … Read more

निर्भर – अनुज सारस्वत

******* “मैं नहीं जाऊंगी अकेले कचहरी आप आजाओगे तभी जाऊंगी मुझे कुछ समझ नही आता कोई भी पागल बना देगा मुझे “ सुरभि ने आकाश से फोन पर कहा आकाश समझाते हुए बोला “अरे पागल हो क्या एक एफिडेविट ही तो बनवाना है पासपोर्ट के लिए, देखो मैं अगर इन छोटे मोटे कामों के लिए … Read more

जादुई दुनिया” – सुधा जैन

प्रस्तुत है, इस विषय पर मेरे हृदय के भाव इस धरा पर जीवन में हम कई प्रकार के संबंध जैसे माता पिता भाई बहन , दादा दादी ,काका काकी ,बुआ ,मामा ,मौसी आदि बंधन ऐसे होते हैं जो हमें जन्मजात मिलते हैं, पर एक बंधन ऐसा है जो हमें जन्मो जन्मो तक एक बंधन में … Read more

केस का फीस – विनय कुमार मिश्रा

पेशे से हम पति पत्नी दोनों वकील हैं। पिछले साल ही शादी हुई है।दो दिन पहले इतेफाक से हमदोनों के पास तलाक के केस आये हैं। और इतेफाक ये भी कि, शालिनी के पास उस जोड़े की तरफ से पति का केस है, और मेरे पास उसी की पत्नी का। केस स्टडी में मैंने पाया … Read more

जीवनसाथी – विनय कुमार मिश्रा

जलपाईगुड़ी उतर कर, हम दोनों पति पत्नी गंगटोक के लिए टेक्सी ले रहे थे। टेक्सी वाले पैसे ज्यादा मांग रहे थे, मेरे हिसाब से। एक और जोड़ा वहीं जाने के लिए टेक्सी ढूंढ रहा था। मैंने उस जोड़े में से लड़के से बात की “हमें भी गंगटोक ही जाना है, क्या पैसे आधा आधा शेयर … Read more

गाँव – विनय कुमार मिश्रा

रामेश्वर काका का लड़का जब दसवीं में पास हुआ था, तो बाउजी पूरे गाँव को उसका रिजल्ट बताते थे। मोहन और मैं जब परीक्षा देने जाते तो रामेश्वर काका हमारे साथ जाते। सुगनी अम्मा किसी और के बच्चे को निवाला खिलाती, तो सुगनी अम्मा की बिटिया हाट बाजार में चंपा बुआ के साथ जाती। किसी … Read more

अधूरी – विनय कुमार मिश्रा

माँ को सब बाँझ कहते थे जबतक मैं नहीं हुई थी। मेरे होने के बाद उसे किन्नर की माँ। इससे अच्छा वो बाँझ ही रहती। माँ ने बारह साल मुझे सीने से लगाये रखा। एक माँ के लिए उसका बच्चा सिर्फ बच्चा होता है और कुछ नहीं। पापा हर वक़्त जलील होते जब जब मैं … Read more

सौदा – विनय कुमार मिश्रा

इस बड़े शहर में एक छोटा सा कॉस्मेटिक शॉप है मेरा। पति ने खोला था मेरे नाम पर। झुमकी श्रृंगार स्टोर। आज एक नया जोड़ा आया है मेरे दुकान पर।स्टाफ ने बताया कि सुबह से दूसरी बार आये हैं।एक कंगन इन्हें पसंद है पर इनके हिसाब से दाम ज्यादा है। इन्हें देख इस दुकान की … Read more

जादुई अंगूठी- अनुपमा

आयन छोटे से गांव से आया है , उसके मां पापा गांव मैं आई बाढ़ मैं अपना जीवन खो बैठे और अब आयन अनाथ है , आयन की मां की बहन आयन को अपने साथ शहर ले आती है , आयन के मां पापा हमेशा से आयन को अच्छी शिक्षा देना चाहते थे इसलिए आयन … Read more

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