सम्मोहन/ चेतना – कंचन शुक्ला
आँगन में तन्नी से सूखे कपड़े उतारती राम्या, मनमग्न है। अपनी दिनचर्या में प्रतिपल अवांछित व्यवहार ही मिलता उसे। सब के लिए दिनभर जूझती, अथक प्रयासों से सबको प्रसन्न करने का प्रयत्न करती पर सब बेकार। उद्गार, भावभंगिमा, उचित सम्मान भी नगण्य हो जाता। बल्कि कई बार परिवारजनों से उलाहना व असम्मान का भोगी ही … Read more