रिश्ता – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

राजू के पैदा होते ही उसकी मां गुजर गई थी और जब वो 7 साल का था, उसके पिता भी गुजर गए थे। दादी थी नही, इसलिए दादा ने जैसे तैसे बड़ा किया। 15 साल की उम्र में दादा भी साथ छोड़ गए। पेट भरने के लिए उसने पढ़ाई छोड़ दी और एक स्कूटर रिपेयर … Read more

विश्वासघात -बिमला रावत : Moral Stories in Hindi

राधिका जी शाम की चाय पी रही थी कक तभी गेट की घंटी बजी, देखा तो श्यामा जी थी। राधिका जी ने श्यामा जी का बडे गमम जोशी से स्वागत ककया। करती भी क्यों नहीं, दोनों की दोस्ती पचास साल पुरानी थी। राधिका जी ने श्यामा जी से कहा, ‘तुम बैठो, मैंतुम्हारे ललए चाय बना … Read more

यादों की पोटली – प्रतिमा पाठक : Moral Stories in Hindi

बात उन दिनों की है, जब मैं शिक्षिका थी।दिल्ली के एस.जे. मॉडल स्कूल में मैंने तीन वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। यह केवल नौकरी नहीं थी, बल्कि आत्मा को संतुष्टि देने वाला अनुभव था। कक्षा की चौखट पर कदम रखते ही ऐसा लगता था मानो जीवन रूपी किताब का एक नया पन्ना खुल रहा हो। … Read more

कैसी सजा – देवसेना दुत्ता : Moral Stories in Hindi

रीमा आरू से फोन पर बात कर रही थी।आरू अपने घर की और बच्चों की बातें कर रही थी। खुशियां,शिकायतें और छोटी-छोटी ढेरों बातें।बातें आज की होते-होते पुराने समय तक पहुंच गई। आरू ने अपनी 25वीं शादी की सालगिरह पर उसे न्योता देने के लिए फोन किया था। शुभकामनाएं देते हुए रीमा ने आने का … Read more

पापा , मेरे लिए लोन ले लो – स्वाती जैन : Moral Stories in Hindi

पापा , मुझे फाल्गुनी पाठक वाली नवरात्री में खेलने जाना हैं , प्लीस पास लेने के लिए हजार रुपए दे दो सिम्मी अपने पापा चंदुलाल जी से प्यार से बोली !! सिम्मी की मां सीमा जी बोली – इस लड़की ने तो परेशान कर दिया हैं , कभी शापिंग , कभी घूमना , कभी फाइव … Read more

अपनों की पहचान – मधु वशिष्ठ : Moral stories in hindi

—————- मैं अपने ही घर में  हूं और यहां सब मेरे अपने ही हैं परन्तु मां को ख्याल क्यों नहीं आ रहा कि वह कह क्या रहीं है? मैं 30 साल की होने को आई हूं,  परंतु वह कह रही हैं  कि शीतल जो कि।  मुझसे 4 साल छोटी है, क्यों ना उसका विवाह कर … Read more

अपनों की पहचान – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral stories in hindi

बाहर बारिश ऐसे बरस रही थी जैसे आसमान भी किसी अदृश्य पीड़ा से रो रहा हो। बिजली की चमक, गड़गड़ाहट और भीगे शहर की निस्तब्धता के बीच डॉक्टर आरव ICU की चौथी मंज़िल पर खड़ा था। लोगों की जान बचाने वाले वही हाथ आज खुद अपने मन की जद्दोजहद से जूझ रहे थे। बचपन से … Read more

आप अपने बेटे के साथ क्यों नहीं रहते – सुधा जैन : Moral stories in hindi

“अरे यह क्या दिन भर सास बहू वाली कहानियां पढ़ती रहती हो, दूसरा कुछ पढ़ा करो “ पतिदेव ने अपनी पत्नी से कहा, तब पत्नी मुस्कुरा कर बोली ” यह इतनी जगत व्यापी, सर्वव्यापी समस्या है कि न वर्तमान में ,न भूत मे न भविष्य में इस समस्या का हल नजर आता है ….करें भी … Read more

” सुसाइड नोट “- डॉ. सुनील शर्मा : Moral stories in hindi

न जाने क्यों, अब जीने की इच्छा ही नहीं रही. बूढ़े शरीर में दिमाग़ भी अब सुस्त हो गया है. आंखों की रोशनी और जीभ का स्वाद तो कब का चला गया.पेट में कुछ पचता नहीं. दांत भी एक एक कर साथ छोड़ गए. नहीं नहीं, कुछ बीमारी नहीं. बस थकान रहती है, चलने सा … Read more

झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती – आर. एस. कुमार : Moral Stories in Hindi

लंदन की चकाचौंध का बखान करते हुए जब बबलू हर शाम हाथ में दारू की गिलास लेकर बगल में बैठे अपने बहनोई को गरियाता है , उसकी बड़ी बहन खून के आंसू रोती है। अपने बहन बहनोई को भारत के गांव से लेकर आया बबलू डिंग हांकने में कोई कमी नहीं करता है। जबकि सच्चाई … Read more

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