औरतों को इतना सर पे नहीं चढ़ाना चाहिए – डॉ उर्मिला शर्मा

 अजय  और नीतीश गहरे दोस्त थे। वह गर्मी की छुट्टियों में महानगर से अपने होमटाउन आया था। जैसा कि वह हर साल आया करता था। प्रायः रोज ही वो दोनों मिलते थे। फोन पर भी अक्सर उनकी बातें होती रहती थीं। एक सप्ताह अभी आये हुए थे। और हर बार  की तरह इस बार नीतीश … Read more

बालमन –  आरती झा

रसोई घर से राकेश की मम्मी की आवाज आती है राकेश तुम्हें स्कूल नहीं जाना है ?   टिफिन बना दिया है   फटाफट तैयार हो जाओ । राकेश स्नान के लिए तुरंत चला जाता है और स्कूल जाने के लिए वह रेडी हो जाता है ।मम्मी उसका टिफिन और पानी बोतल बैग में रख … Read more

 बंधन – ऋतु अग्रवाल

 राध्या यही कोई नौ दस बरस की रही होगी। राध्या एक बहुत बड़ी सोसाइटी के अपार्टमेंट नंबर 502 में अपने पापा, मम्मी, दादी और छोटे भाई नभ के साथ रहती थी। राध्या के पापा,मम्मी दोनों ही नौकरी करते थे। वैसे भी महानगरों में महंगाई के चलते एक की नौकरी से कहाँ गुजारा होता है। राध्या … Read more

एक बंधन ऐसा भी” – तृप्ति उप्रेती

 बात लगभग 25-30 वर्ष पहले की है। सुदूर सिक्किम के सीमावर्ती इलाके में भारतीय फौज की एक टुकड़ी तैनात थी। अक्सर ऐसे  दुर्गम इलाकों में फौजियों को दोहरे शत्रुओं से सजग रहना पड़ता है। एक तो पड़ोसी देश की तिर्यक दृष्टि और दूसरी हाड़ कंपा देने वाली ठंड। दूर दूर तक बिछी बर्फ की चादर … Read more

‘ शिक्षक ‘ – विभा गुप्ता

” सुनो, आज चार तारीख हो गई,पेंशन लेने का समय आ गया है।बैंक जा रहा हूँ,आने में देर हो जाए तो परेशान मत होना।युवाओं को समय की कद्र कहाँ, छोटे-छोटे काम में भी घंटों लगा देते हैं।” पत्नी को कहकर रामनिवास जी बाहर जाने लगे तो पत्नी ने पीछे से कहा, ” आपके इतने सारे … Read more

 पिंजरा – बालेश्वर गुप्ता

  कितना सुख है बंधन में, रजनी गंधा—      कहीं दूर से इस गाने की आवाज आ रही थी।रमेश ने पूरे घर की अकेले सफाई कर ली थी।बिटिया सोनिया का कमरा उसने बड़ी ही तन्मयता से साफ किया,कौन सी चीज सोनिया कहाँ रखती थी, वो सब उसने सोच सोच कर उसी की रुचिनुसार सजाया था। इतना करने … Read more

पुनरावृत्ति – डॉ उर्मिला सिन्हा

 घनी झाड़ियों ,ऊंचे पेड़ों से आच्छादित , शहर के कोलाहल से दूर निर्जर वन प्रांतर में बसा हुआ यह महिला महाविद्यालय मुझे अपने एकाकी जीवन जो कभी अभिशाप लगता था ; वरदान साबित हुई। यहां प्रकृति से सीधा साक्षात्कार मेरे रोम रोम में न‌ई स्फूर्ति भर देती है।     चपरासी ने एक पूर्जा आगे बढ़ाया। मैं … Read more

सांवली रंगत उस पर प्रेम का गठबंधन ,,,, – मंजू तिवारी

सुबह-सुबह प्रेरणा कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी जहां वह पढ़ाती थी तभी मम्मी ने कहा आज तुम अपने कॉलेज में दो-तीन दिनों की छुट्टी के लिए बोल देना नाश्ता बनाते हुए उसकी मम्मी ने प्रेरणा से कहा,,,, मम्मी छुट्टी क्यों लेनी है क्या बात है।,,, पापा ने तुम्हारे लिए एक अच्छा सा लड़का … Read more

पहले पहले प्रेम का बंधन” – ऋतु गुप्ता

घर में घुसते ही देखा मेज पर एक शादी का कार्ड रखा है, उत्सुकता वश कार्ड खोलकर देखा,कार्ड पर दुल्हन के नाम में अपनी नंदिनी का नाम देखकर जी धक से रह गया, सोचा ये क्या मेरी नंदिनी ही मेरे शहर आ रही है… किसी और की दुल्हन बन कर! पता नहीं कभी कभी किस्मत … Read more

 कस्तूरी ” – रणजीत सिंह भाटिया

  बहुत ही सुहानी सुबह थी I गुनगुनी धूप निखरी  थी l पंछी चाह- चाहा  रहे थे l जसबीर रोज की तरह प्रातः भ्रमण  के लिए घर से निकला घर समुंदर के पास था,और वहां बहुत ही खूबसूरत पार्क था l जहां सुबह-सुबह लोग टहलने आते थे l जसबीर भी पार्क में चक्कर लगाने लगा, अचानक … Read more

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