बहू के द्वारा श्वसुर का दाह संस्कार – सुषमा यादव

मेरा रीति रिवाजों को तोड़ने का कोई इरादा नहीं है,पर किस्मत कभी कभी ऐसा दिन दिखाती है कि मनुष्य की सोचने, समझने की शक्ति ज़बाब दे जाती है, और जब कोई उपाय नहीं सूझता तो जो सामने परिस्थितियां दिखाई देती है उसको क्रियान्वित करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता है,, फिर हम रीति … Read more

बोझ – रीटा मक्कड़

पति को दफ्तर और बच्चों को स्कूल भेज कर मीता दोपहर के खाने की तैयारी में जुटी थी। हर रोज बच्चों की कोई न कोई फरमाइश होती तो वो बाकी काम मेड से करवाती लेकिन खाना पति और बच्चों की पसंद का खुद ही बनाती। इतने में फोन की घण्टी बजी देखा तो राजीव का … Read more

ऐ ज़िंदगी गले लगा ले – कमलेश राणा 

ज़िंदगी कितनी खूबसूरत और अनमोल है,,यह वही बता सकता है जिसके पास ज़िंदगी के थोड़े ही दिन बचे हों,,और वह इस सत्य से वाकिफ हो,, जानकी का जीवन हर तरह से खुशी और संतुष्टि से भरपूर चल रहा था,,बच्चों,घर और नौकरी के बीच कब दिन गुजर जाता,,पता ही नहीं चलता,,बस वक़्त की लहरों के साथ … Read more

‘ पापा,  मेरी टाई खोज दीजिए ‘ – विभा गुप्ता 

  ” पापा, आप इतने चुप-चुप क्यों बैठे हैं? कुछ चाहिए क्या?” पिता को उदास, आसमान को एकटक निहारते देख विपुल ने उनसे पूछा। ” नहीं बेटा, कुछ नहीं…, बस यूँ ही..।” पिता ने अनमने भाव से उत्तर दिया।उसने कहा, ” मन न लग रहा हो तो आपके फोन में गेम डाउनलोड कर देता हूँ, आप … Read more

रिमोट कंट्रोल – कमलेश राणा

जब से ये निगोड़ा रिमोट आया है दुनियां में, जीना हराम कर दिया है,, मजाल है जो कोई अपनी पसंद का कार्यक्रम चैन से देख पाये,, सारे दिन चिल्ल पौं ही मची रहती है,, विमला जी बड़बड़ाये जा रही थी,, देखो दादी भाई ने फिर अपना कार्टून लगा लिया,, अब वो दो घंटे से पहले … Read more

अब और नहीं -सुधा शर्मा

  रानी स्तब्ध रह गई थी ,  सामने फिर वही दृश्य उभरने लगे थे बरसों पहले के, शरीर जैसे निष्प्राण हो गया था ।             उसकी देवरानी शीला की हृदय विदारक चीत्कारे दिल दहला रही थीं ।रानी जैसे जड बनी , पत्थर के बुत सी बैठी थी ।          गौना हो कर चार दिन पहले ही तो आई … Read more

“अपनो से धोखा ” – कविता भड़ाना

  धोखा आपको कब ,कौन और कहां दे जाए,..कुछ नहीं पता होता।…परायो से मिले धोखे को इंसान एक बार सहन भी कर लेता है पर धोखा देने वाला जब अपना कोई हो तो बड़ा असहनीय हो जाता है।  आज मैं एक सच्ची घटना को कहानी के रूप में आप सबके सामने प्रस्तुत कर रही हूं … Read more

धोखा – कुमुद चतुर्वेदी

        “सुनो आज फिर हॉस्पिटल से फोन आया था “पति मुकेश के मुँह से यह सुन चंदा पूरी बात सुने बिना ही बोल पड़ी”ऐँ फिर से,तो तुमने क्या कहा?”मुकेश गहरी साँस लेकर बोला”क्या कहता?चुपचाप सुनता रहा और वही फिर से कह दिया कि अभी घर पर मैं अकेला ही हूँ कृपया कुछ समय की मोहलत … Read more

बहू, बहू रहे और बेटी, बेटी तो ही अच्छा  –  संगीता अग्रवाल 

“देखिए बहनजी हमारी बेटी बहुत लाडली है बस हम तो यही चाहते हैं ये जिस भी घर जाए वहां इसे बेटी बना कर रखा जाए!” सीमा को देखने आए लड़के की मां अनीता जी से शांति जी बोली। “देखिए शांति जी हमे सीमा बहुत पसंद है हम इसे अपने घर की बहू बनाना चाहते हैं … Read more

पापा का वादा – डा. चंद्रकान्ता वर्मा

रोली एक साधारण परिवार में पली बड़ी पर उसके सपनें बड़े बड़े थे। चार बहन दो भाई थे किसी से पटती नहीं थी थोडा देखनें में अच्छी थी रंग साफ था।मां भी हमेशा कहतीं ये बेटी तो राजकुमारी है फटा फट कोई राजकुमार इसे ले जायेगा, और इस तरह बचपन से ही उसके मन में … Read more

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