सार्थक बुढ़ापा – डॉ अंजना गर्ग
शांति पति की मृत्यु के बाद बेटे बहू के साथ महानगर में आ गई। जीवन एकदम बदल गया था। पति का साथ तो छूटा ही,साथ ही 40 साल की जमी जमाई गृहस्थी और घर भी छूट गया। साथ ही छूट गया अड़ोस पड़ोस और सहेलियां भी जो हर दुख सुख में साथ रहती थी। यहां … Read more