बेटे की मर्यादा निभाए मातृभक्त कहलाए,, पत्नी के प्रति मर्यादा निभाए जोरू का गुलाम हो जाए.. गलत कौन?? – नीतिका गुप्ता

 क्या हुआ… इतनी रात में कमरे में क्यों टहल रही हो?? यार मुझे ना गुलाब जामुन खाने की क्रेविंग हो रही है लेकिन फ्रिज में है ही नहीं… ऐसे कैसे तुमने ठीक से नहीं देखा होगा,, आज ही तो दोपहर में मैंने आधा किलो का डब्बा ला कर रखा है.. चलो मैं तुम्हें देता हूं। … Read more

ह्रदय से सींचा है – नीरजा कृष्णा

विभा इधर काफ़ी दिनों से महसूस कर रही थीं…उनका सात वर्षीय पुत्र अनुपम बहुत उदास और सुस्त सा हो गया है। खाना पीना भी कम हो गया है। आज तो हद ही हो गई। स्कूल से आकर सीधे अपने कमरे में जाकर रोने लगा था। वो व्याकुल होकर उसके पास गई और उसे गोद में … Read more

 मैं ही क्यों * –  मधु शुक्ला

सुबह नम्रता जैसे ही बिस्तर त्यागती, उसकी पाँच महीने की बेटी रोने लगती। वह उसको गोद में लेकर घर के काम निवटाया करती थी। लेकिन फ्रेश तो उसको लेकर नहीं हो सकती थी। यह बात। कोई नहीं सोचता था। बल्कि जब वह अकेले होने पर रोती तो उसकी ननद और पति दोनों ही उसको खरी … Read more

घर की मर्यादा – सविता गोयल

मिनाक्षी की शादी एक सम्पन्न परिवार में हुई थी। किसी चीज की कोई कमी नहीं थी ससुराल में| शहर में बहुत इज्जत और नाम था उसके ससुर जी का| घर में एक जेठ-जेठानी और एक कुंवारा देवर था जो बाहर पढ़ता था| मिनाक्षी की जेठानी बहुत ही सीधी-साधी सी थी, बस अपने काम से मतलब … Read more

मुझे अपने संस्कारों से समझौता पसंद नहीं – अर्चना कोहली “अर्चि”

माया का रंग कुछ दबा हुआ था। इस कारण उच्च पद पर होने के बावजूद उसकी शादी में रुकावट आ रही थी। माता-पिता द्वारा बहुत चप्पलें घिसने के बाद एक जगह उसकी बात बन गई। शादी का मुहूर्त दो दिन बाद निकला। समय कम था। ज़ोर-शोर से शादी की तैयारियाँ शुरू हो गई।। एक दिन … Read more

मर्यादा – निभा राजीव “निर्वी”

“तेरा दिमाग तो नहीं चल गया कहीं! क्या अनाप-शनाप बके जा रही है तू! तू इस घर की बहू है बहू! हमारा मान और सम्मान !हमने तुझे थोड़ी छूट क्या दे दी तू तो सर पर चढ़कर बैठ गई। अरे मेरे बेटे को तो खा ही गई, अब क्या घर की मान मर्यादा और इज्जत … Read more

मंत्र – नीलम सौरभ

“अरे दीपक! क्या है ये सब? इतना पढ़ा-लिखा होकर तू कैसे इन सब चक्करों में फँस गया भाई!” दोस्त से मिलने पहुँचा गौरव उसके कमरे का दृश्य देख कर अचरज से बेसाख़्ता बोल उठा। टीवी के कुछ चैनलों पर रोज दिखने वाले उस चीज को वह तुरन्त पहचान गया था। दीपक व गौरव प्रतियोगी परीक्षाओं … Read more

परिवर्तन – शालिनी गुप्ता

सुबह का वक्त है और आरती जी टेबल पर बैठी चाय पी रही है। अभी थोड़ी देर पहले उनका बेटा शोभित ऑफिस के लिए निकल चुका है और उनके पति शेखर बाहर लॉन में बैठे अखबार पढ़ रहे हैं। तभी उनकी नई नवेली बहू सोनिया किचन में आई और अपने लिए ब्लैक कॉफी बनाकर वापिस … Read more

मर्यादा – उमा वर्मा

माँ, मै जा रही हूँ ।तुम मेरे पास नहीं हो ।एक परम शान्ति महसूस कर रही हूँ माँ ।गहन अंधकार छा रहा है ।कल ही दिन  में तो तुम से बात हुई ही थी ।तब कहाँ पता था कि यह मेरे जीवन की आखिरी तारीख होने वाली है ।कल शाम को अचानक तबियत खराब होने … Read more

 दाखिला – गुरविन्दर टूटेजा

  वंशिका जल्दी करो जरा भी देर हो गयी तो सारे किये धरे पर पानी फिर जायेगा….तुम्हे पता तो है मैं सुबह चार बजे लाईन में लगा  तब जाकर एडमिशन फार्म मिला…!!!   हाँ समर पता है मुझे सबसे अच्छा स्कूल है ये दिल्ली का….वंश का एडमिशन तो हमें इसी स्कूल में कराना है…चलो चले |  स्कूल … Read more

error: Content is protected !!