कर्जदार – विनय कुमार मिश्रा

“सरिता! वो कपड़े की दुकान वाले भाई साहब ने उधार देने से मना कर दिया।कहा कि अभी शादी की खरीदारी के ही थोड़े पैसे बाकी हैं” मैंने मायूस होकर धीरे से कहा।दामाद बाबू दूसरे कमरे में थे। शादी के बाद पहली बार नीरू को लेकर आये हैं। बड़े साधारण तरीके से शादी निपटाई फिर भी … Read more

खेल खेल में -कहानी-देवेंद्र कुमार

अंजू नाराज है और उदास भी। नाराज इसलिए कि रमा ने एक सप्ताह की छुट्टी देने से साफ़ मना कर दिया और कह दिया कि कहीं और काम देख ले। अंजू की माँ गाँव में बीमार है। छुट्टी के साथ वह कुछ एडवांस भी लेना चाहती थी लेकिन अब… अब क्या करेगी अंजू। वह जल्दी … Read more

जगह बदलने से मर्यादा व संस्कार नहीं बदलते – श्रद्धा खरे 

मिश्रा जी व  दीक्षित जी पड़ोसी थे। जहां दीक्षित जी सरकारी विभाग में कार्यरत थे। वही मिश्रा जी पंडिताई करके अपना जीवन यापन कर रहे थे दोनों के परिवारों में बहुत घनिष्ठता थी । दीक्षित जी की बेटी मानसी मिश्रा जी के पास  बैठ कर वेद ज्ञान मंत्र उच्चारण आदि का पाठ करती जो उसी … Read more

नित्या को मिली अम्मा – नीरजा नामदेव

          नित्या और नमन नवविवाहित जोड़ा मध्य भारत से पहुंच गया सुदूर दक्षिण भारत के महानगर में अपनी नई गृहस्थी बसाने। नमन वहां एक कंपनी में काम करता था। वहां की संस्कृति, भाषा सब अलग थी।फिर भी धीरे-धीरे उन्हें अच्छा लगने लगा। घर व्यवस्थित करने के बाद नित्या कुछ देर के लिए बाहर निकल कर … Read more

कहां लिखा है कि नौकरी वाली लड़कियां अपनी मर्यादा भूल जाती हैं – गीतू महाजन

शालिनी सुबह से ही रसोई में लगी थी।आज उसके पति सुरेश की नंदिनी मौसी आने वाली थी।मौसी को उसके हाथ की बनी आलू की सब्ज़ी और कचौड़ियां बहुत पसंद थी।मांजी ने उसे साथ में हलवा बनाने को भी बोल दिया था तो बस.. इन्हीं सब की तैयारी में शालिनी  आज जल्दी उठकर काम निपटा रही … Read more

‘नदी सी मर्यादा’ – अनीता चेची

जैसे ही पलक को कॉलेज की ओर से मनाली भ्रमण की सूचना मिली  खुशी से झूम उठी। सफर पर जाने के सपने बुनने लगी परंतु भीतर ही भीतर संशय भी था कि पापा जाने देंगे या नहीं। अगले दिन सुबह पलक ने अपने पापा  से कहा ,पापा जी कॉलेज की सभ छात्र-छात्राएं ट्रिप पर मनाली … Read more

फिर से – सुधा शर्मा

 आज अपने को बार बार बहला रही थी वसुधा ।’ठीक किया मैने , यह कोई समय है प्यार मुहब्बत में पडने का ?कितनी पागल हूँ न मै ? कैसे इतनी जल्दी भावनाओं में बह जाती हूँ ।      बस खूबसूरत शब्दों के मोह जाल में भूल जाती हूँ कि जीवन के इस मोड पर क्या हक … Read more

‘ गुल्लक ‘ – विभा गुप्ता

    ” माँ, आप इसमें पैसे क्यों रखती हैं?” मुझे गुल्लक में पैसे रखते देख मेरे छोटे बेटे चेतन ने मुझसे पूछा तो मैंने कह दिया कि इससे मेरी बचत होती है।कभी ज़रूरत पड़ने पर ये पैसे काम आ जाते हैं।मेरे छह वर्षीय बेटे ने क्या समझा,ये तो मैं नहीं जानती लेकिन उसने कहा कि माँ,मुझे … Read more

धूसर चंद्रमा – राजेन्द्र पुरोहित

पूजा की थाली सजाती उर्मि के सामने बैठी भागवंती मन ही मन बुदबुदा रही थी, “सुबह से भूखी प्यासी सोलह श्रृंगार कर के किसकी प्रतीक्षा कर रही है पगली। वह नीच तो पड़ा होगा उसी लिली की बाहों में। हे माँ भवानी, तूने मुझे इतनी गुणवंती बहू दी तो बेटा इतना अधम क्यों दिया?”  तभी … Read more

मर्यादा-एक सीख – शुभ्रा बनर्जी

आज बच्चों का लंच बॉक्स पैक करते हुए विनीता की आंखों से आंसू गिर रहें थे।सुबह से उठकर सास ससुर की देखभाल,नाश्ता,खाना सब कुछ करके बच्चों को तैयार‌ करके फिर ख़ुद स्कूल जाती थी।हर दिन देर हो जाती थी पहुंचने में।दौड़ते दौड़ते थक‌ गई थी।फ़िर दोपहर में आकर सब को खाना परोस कर दो।पांच मिनट … Read more

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