प्रबंधन” – प्रीता झा

लैपटॉप पर नजरें गड़ाए  ईशा ने मुड़ कर देखा  आरव को गोद में उठाये उसकी आया लक्ष्मी खड़ी थी | ” इस महीने से मुझे 15000 रुपये चाहिए | नहीं तो मुझे दूसरा काम देखना होगा फिर मैं इतना टाइम नहीं दे पायेगी | ” ईशा वापस लैपटॉप की ओर देखने लगी लेकिन दिमाग़  लगातार … Read more

शहर की लड़की – संगीता अग्रवाल

“क्या बात है रोशन की मां क्या सोच रही है यूं अकेले बैठे?” हरिहरन ने अपनी पत्नी रमिया से पूछा। ” रोशन के बापू आप तो हमारा बेटा पढ़ लिखकर अफसर बन गया है अब जल्द ही उसका ब्याह करना पड़ेगा !” रमिया बोली। ” हां ये तो तू ठीक कहे है पर छोरा अब … Read more

तन्हाई – डा.मधु आंधीवाल

सविता जैसे ही बालकनी में सुबह की चाय लेकर बैठी सामने पेड़ पर चिड़ियाँ का जोड़ा बैठा चींची करके एक दूसरे की चोंच पर प्यार कर रहे थे । बहुत देर तक वह अपलक उसे निहारती रही । इन पक्षियों के पवित्र प्यार को ना कोई बनावट ना दिखावट । उसका और सुमित का प्यार … Read more

बायपास – ज्योति अप्रतिम

मम्मीजी , मुझे अभी अपनी माँ के पास जाना है । भूमिका ने रोते हुए कहा ।  अरे !,क्या हुआ इतना क्यों रो रही हो ?पहले यहाँ बैठो ,पानी पियो और बताओ ,क्या हुआ ? बस कुछ नहीं ।मुझे माँ की बहुत याद आ रही है। ठीक है ,चली जाना पर पहले बताओ क्या हुआ? … Read more

आखिरी विदाई – रश्मि प्रकाश

“अरे बेटा ध्यान से अपनी माँ को तैयार करो…. बिल्कुल सोलह श्रृंगार करना उसका… और हाँ उसकी शादी वाली चुनरी भी ज़रूर ओढ़ा देना।”अपनी बहुओं को हिदायत देते किशोर बाबू अपनी धर्मपत्नी को निहार रहे थे। सुनंदा जी की आँखें ज़रूर बंद थीं पर चेहरे पर मुस्कुराहट विराजमान थी ….दोनों बहुएँ जया और हिना और … Read more

तुम्हारी जबान बहुत ज्यादा चलने लगी है! – किरण विश्वकर्मा 

दीदी ये कपड़े अल्टर के लिए आए थे क्या इनमें सिलाई लगा दूं …. बुटीक चलाने वाली प्रतिभा से उसके यहां काम करने वाली आराधना ने पूछा….आराधना प्रतिभा के बुटीक में सिलाई का काम करती थी। नहीं बच्चे घर पर अकेले हैं कल आकर बाकी का करेंगे अब तू भी घर जा…. यह सुनते ही … Read more

शादी बचाने के नाम पर कब तक जुल्म सहेंगी?? – संगीता अग्रवाल 

स्वाति के कानों में अभी भी अपने पति करण के कहे शब्द गूंज रहे थे ..” तुम हो कौन क्या वजूद है तुम्हारा तुम जो खाना खाती हो या जो महंगे महंगे कपड़े पहनती हो ये सब मेरी बदौलत है वरना तुम्हारे बूढ़े मां बाप की सामर्थ तुम्हे पटरी से सौ रुपए के कपड़े लेकर … Read more

स्त्री होना इतना सरल कहाँ है – सोनिया निशांत कुशवाहा

स्त्री होना इतना सरल कहाँ है। उस पर भी वह स्त्री जो अपनी पलकों में आसमान को छू लेने का स्वप्न बसाए हो उसके लिए जीवन दुरुह हो जाता है। समाज हो या परिवार सभी ने सदा से ही नारी के लिए दायरे तय किए हुए हैं। एक महिला से अपेक्षा यही होती है कि … Read more

ऐ जिन्दगी गले लगा ले… – सरोज प्रजापति

4 पैकेट लहसुन वाली नमकीन 4 पैकेट कच्चे केले की चिप्स। मेरे दो पैकेट बूंदी। मेरे चार पैकेट मूंगफली पट्टी!! मेरे…… सामने बैठी वह अधेड़ महिला जल्दी-जल्दी सबके ऑर्डर का सामान गिन गिन कर पैकेट में डाल रही थी। थोड़ी देर बाद ही उसका बैग लगभग खाली हो गया। उसने एक बार मेरी तरफ तो … Read more

पुरस्कार – सुधा शर्मा

  माँ ने आवाज़ दी ,’ जल्दी कर अनु , तेरे जाने का समय हो रहा है । जल्दी नाश्ता कर ले।’ यह लडकी भी न अपने अलावा सबकी चिन्ता है ।जाने कहाँ कहाँ से पकड़ लाती है दीन दुखियारे ।जाने कितना सेवा भाव भरा है इसके मन में ।  ‘ माँ कहती रह गई और … Read more

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