रोज रोज का मिलना – विमला गुगलानी
अभी तुलसी लेटी ही थी कि घंटी बजी। उसका बिल्कुल भी मन नहीं था उठने का लेकिन मजबूरी में उठना पड़ा। उसे मालूम था नीलू ही होगी, और वही थी, नीलू , उसकी अपनी बेटी। नीलू आई , डेढ़ साल के बेटे वरूण को गोदी से उतारा और सोफे पर पैर फैला कर बैठ गई।” … Read more