भरोसा अपनों का – सुभद्रा प्रसाद
रात के बारह बज रहे थे | आभा अपने कमरे की खिड़की के पास चुपचाप खड़ी थी |आसमान में तारे चमक रहे थे |बाहर वातावरण एकदम शांत था, पर आभा का मन बेहद अशांत था | उसे अपना घर, अपने माँ -पापा बेहद याद आ रहे थे |उसका तन तो स्थिर था पर मन तेजी … Read more