मुझे तुम्हारे पैसे नही तुम्हारा वक्त चाहिए!  – मनीषा भरतीया

सपना एक मध्यमवर्गीय परिवार से थी। ,” लेकिन उसकी शादी एक रहीस खानदान में हुई थी। ,उसे सब कुछ एक सपने जैसा लग रहा था, जैसा गुड्डे गुड़ियों के खेल में होता है.. आलीशान घर, चार- चार,गाड़ी , नौकर- चाकर।” ऐसा प्रतीत हो रहा था….जैसे वो कोई महल में आ गई हो, और वहां की … Read more

 वक़्त का ख़ेल – बेला पुनिवाला 

आधी रात को अपने ही बंगले के चारों ओर चक्कर लगाते हुए सौरभ अपनी ही धून में तेज़ दौड़ लगा रहा था। जैसे कि उसे किसी को हराना हो, उसकी आँखें गुस्से से आग बबूला हो रही थीं, उसे वक़्त और जगह का भी कोई होश नहीं था। तभी सौरभ की माँ उसे पीछे से … Read more

शादी की तस्वीर !! – स्वाती जैंन

शालू को अलमारी साफ करते – करते पुरानी तस्वीर हाथ लग गई , वह मन ही मन बुदबुदाई  हाय कितनी प्यारी तस्वीर हैं हम दोनों की , पति रोहित कितने स्मार्ट लगते थे तब और मैं भी तो किसी हिरोईन से कम ना थी !! पतली कमर , सुंदर घुँघराले कमर तक आते बाल , … Read more

एक वो भी वक़्त था बहू – मीनाक्षी सिंह 

निम्मी – माँ जी मुझे तो बहुत घबराहट हो रही हैँ ,आपकी अमेरिका वाली बहन अपने  पूरे परिवार के साथ आ रही हैं वो भी पूरे 15 दिन के लिए ! मैं खाने पीने के , बाकी सब के इंतजाम कैसे करूंगी ! वो कहाँ ऐशो आराम में रहने वाले लोग ,हाई फाई लाईफ स्टाईल … Read more

वक्त भी सास नंदों के यातनाओं पर धूल नहीं डाल पाता  – सुल्ताना खातून

मेरा नौवां महीना चल रहा होता था, तब भी इतना बड़ा पेट लेकर अकेले मैं पूरे परिवार के लिए खाना बनाती थी, मेरी नंद तो एक काम में भी हाथ नहीं बटाती थी, और तो और इंतजार करती खाना पकने का बस खाना पकते ही खाने पहुंच जाती,ये आजकल कि बहुएं हैं जिन्हे डॉक्टर बेड … Read more

वक्त का आईना  –  ऋतु गुप्ता 

शारदा जी के पास उनके प्रभाकर भैया का फोन आया था कि तेरी सरोज भाभी सीढ़ियों से गिर गई है, रीढ की हड्डी में गंभीर चोट आई है, ना जाने अब बिस्तर से उठ भी पाएगी या नहीं ,बच्चे भी पास में नहीं रहते, भले ही नौकर चाकर है पर बच्चे पास हो तो मनोबल … Read more

शून्य सी होती ज़िंदगी  –  गीतू महाजन

संदीप कमरे में बैठा शून्य में देख रहा था।ना जाने कितने घंटों से वो इसी अवस्था में बैठा हुआ था।अभी कुछ घंटे पहले ही तो वह अपनी पत्नी शिवानी की का अंतिम संस्कार कर के आया था।उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तकदीर उसके साथ ऐसा मज़ाक करेगी।हां.. मज़ाक ही तो लग … Read more

काश!! सही वक्त पर अपनों का साथ मिला होता –  शीनम सिंह

“मां ये कार्ड किसके यहां से आया है” टेबल पर पड़े इन्विटेशन कार्ड को हाथ में लेते हुए तनु बोली. “बेटा,मेरी वो सहेली है ना!! कुसुम उसकी रिटायरमेंट पार्टी है,उसी का कार्ड है परिवार सहित बुलाया है.” “ओह कुसुम आंटी की रिटायरमेंट है.. मां ये वही हैं ना जो आपके साथ दफ़्तर में काम करती … Read more

वक्त की अदालत  –  सुषमा यादव

वक्त की अदालत। ##वक्त#, शिवानी आज़ बहुत दिनों बाद अपने ससुराल अकेले ही आई थी,,वो खामोश बैठी घर के चारों ओर देख रही थी,, इतने में लेखपाल आये, और बोले, बहुत बहुत बधाई हो आप को,,आप के नाम ये पूरी प्रापर्टी हो गई है,अब आप ही पूरी जायदाद की अकेली ही मालकिन हैं,, और पेपर … Read more

 मुक्ति ”   –   कुमुद चतुर्वेदी

 मैं जब संसार में आया तब मैंने देखा मेरे पापा एक बहुत बड़े इंजीनियर थे, और मेरी माँ सद्गृहणी मित्भाषी और ममतामयी थीं। मैं  अपने पापा को हमेशा अपने काम में व्यस्त देखता था और साथ में अपनी माँ को घर गृहस्थी के काम में हमेशा लगा देखता था। मुझे समझ नहीं आता था कि … Read more

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