सास पर भारी पड़ी एक मां  

रागिनी और विपुल की शादी को दो साल बीत जाते है. इन दो सालो में रागिनी की सास देवयंती अपने चिड़चिड़े और गुस्सैल स्वभाव के कारण घर वालों को बड़ा परेशान करती है. इस चक्कर में वो अपनी बहु रागिनी को भी नही छोड़ती. उसकी सास की सिर्फ अपनी बेटी से ही बनती थी. जिसकी … Read more

अपनापन – नताशा हर्ष गुरनानी

नई नई नौकरी लगी घर से दूर दूसरे शहर में, यहां किराए का घर लिया, घर के सामने बुजुर्ग दंपति रहते थे। मैं भी संयुक्त परिवार में रही हूं इस तरह उनको अकेले देखकर मन बार बार उनके बारे में सोचने लगता। सुबह ऑफिस जाती तो देखती दादी दादा जी को कांपते हाथो से चाय … Read more

अच्छे वक्त का इंतजार .…. – रंजीता अवस्थी

सामने से गाने की आवाज आ रही थी… “वक्त करता जो वफा आप हमारे होते…” बड़े मगन होकर गाना सुने जा रही थी और सोचती जा रही थी… सही तो है “वक्त अच्छा है तो सभी कुछ अच्छा है” लोग ऐसे ही नहीं कहते हैं। मैं एक साधारण से परिवार की लड़की संघर्षों में जीवन … Read more

हां !मैं हाउस वाइफ हूं! – ज्योति आहूजा

 “कार्तिक उठो बेटा। उठो बच्चे। 6:30 बज गए। स्कूल नहीं जाना क्या? “मां भूमिका ने बेटे कार्तिक को आवाज लगाई। “उसे उठाकर बाथरूम में फ्रेश होने भेज दिया और खुद किचन में जाकर उसका नाश्ता और स्कूल का टिफिन तैयार करने लगी। उसके बाद कार्तिक के कुछ और छोटे-मोटे कामों को निपटा कर उसे स्कूल … Read more

किसे होना चाहिये शर्मसार – संगीता त्रिपाठी

“वो देखो अमित की मम्मी को देखो, कितनी अजीब सी लगती हैं,”नील के ये कहते ही बच्चों के एक झुण्ड के साथ उनकी मॉर्डन ड्रेस पहने मम्मियों की निगाहें अमित की मम्मी पर पड़ीं, व्यंग की मुस्कान सबके चेहरे पर आ गई। बॉर्डर वाली साड़ी, तेल से चिपके बाल, माथे पर गोल बड़ी बिंदी, होठों … Read more

गहने भी भला कभी उतरन होते हैं क्या!!! – सविता गोयल

” क्या दे दिया तेरी मां ने आज तुझे ??”  पलक के हाथों में थैला देखकर  सुधा जी ने चश्में के नीचे से झांकते हुए पूछ लिया। हिचकते हुए पलक ने थैले में से निकालकर एक साड़ी अपनी सास सुधा जी के सामने रख दी।  साड़ी को उलट पुलट कर देखते ही सुधा जी की … Read more

बूढ़ी घोड़ी, लाल लगाम – सोनिया कुशवाहा

“बहन जी देखा आपने अंजू को?” मिसेज़ कुमार ने मिसेज़ सक्सेना से पूछा। “हद हो गई भई, दोनों बेटियों की शादी क्या हुई ये दोनों मिया बीवी को तो पर ही लग गए। जमीन पर पैर ही नहीं टिकते इनके। ना शर्म है ना उम्र का लिहाज।” इस बार  मिसेज़ पांडेय ने जुमला उछाला। “छोड़ो, … Read more

दो कुँवारे हुए एक – संगीता अग्रवाल

“अरे यार ये गाड़ी के ब्रेक क्यो नहीं लग रहे लगता है आज तो यमराज से साक्षात् दर्शन होंगे !” रागिनी स्कूटी चलाते हुए बड़बड़ाई। ” ओ मैडम , मैडम देख क…!” इससे पहले की सामने से आती गाड़ी मे बैठे शख्स का वाक्य पूरा होता रागिनी की स्कूटी एक पेड़ से टकरा गई और … Read more

बहू मुझे जाने के लिए मत कहना… – रश्मि प्रकाश

“ नमस्ते मम्मी जी , आप कब आ रही है..?” कृतिका ने सासु माँ रत्ना जी से पूछा. “ बहू अभी तो मेरी तबियत ठीक नहीं चल रही है… ठीक होते ही खबर करूँगी फिर रितेश से कह कर टिकट करवा देना..।” कराहती सी आवाज़ में रत्ना जी ने कहा. “ ओहह…. सोच रही थी … Read more

वक्त करता जो वफ़ा –  सुषमा यादव

शुभा जब जब बाहर धूप सेंकने अपने आंगन में बैठती,तब तब उसके पड़ोस में रहने वाले दो बुजुर्ग पति पत्नी आपस में खूब प्रेम से हंसते बतियाते रहते। दोनों खूब देर तक धूप में बैठते,पति अपनी पत्नी को अखबार से समाचार पढ़ कर प्रतिदिन सुनाते, कुछ हास्य व्यंग भरी खबरें भी सुनाते,जिसे सुनकर दोनों खूब … Read more

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