बात एक रात की – स्नेह ज्योति
घनी बरसात की रात थी,बस की धीमी रफ़्तार थी,ड्राइवर भी बेहाल था बारिश में मुसाफ़िरों को सही पहुँचाना जान जोखिम का काम था।धीरें-धीरें यात्री अपनी मंजिल पे उतरने लगे..…अचानक मेरी नज़र पीछे बैठी महिला पे पड़ी जो सोच में डूबी बेचैन दिखी,शायद घर जाने का सोच रही थी,अगले ही पल बस ख़राब हो गयी ड्राइवर … Read more