गलत आदमी-कह – देवेंद्र कुमार
मैं रिक्शा में बाजार जा रहा था। एकाएक आवाज आई, “सर, प्रणाम।” और एक स्कूटर रिक्शा के पास आकर रुक गया। मैंने रिक्शा वाले से रुकने को कहा। स्कूटर सवार ने मेरे पैर छू लिए। मैंने उसे पहचान लिया—वह मेरा पुराना छात्र यशपाल था। उसने कहा, “मैंने तो आपको दूर से पहचान लिया था,” फिर … Read more