” स्वार्थी औलाद ” – सरोज माहेश्वरी
औलाद मनुष्य की सच्ची संपत्ति होती है। मनुष्य अपनी इस संपत्ति को संवारने, तरासने में तन, मन,धन की समग्र शक्ति को लगा देता है । वह संतान के लिए दुनियां और विपरीत परिस्थितियों से भी लड़ने की ताकत रखता है, परंतु जब स्वार्थी औलाद सालों की कठिन परवरिश को नकार माता पिता के सपनों को … Read more