अंगूठी – गीता वाधवानी
एक दिन सुबह सुबह अचानक मन हुआ कि चलो आज बाग में सैर कर ली जाए और मैं सुबह 6:00 बजे पहुंच गई बाग में। आधे घंटे की सैर करने के बाद मैं थककर एक बैंच पर बैठ गई। तभी अचानक मैंने देखा की बगिया की हरी हरी घास में कुछ चमक रहा है। पहले … Read more