खोखले रिश्ते – गीता वाधवानी
रिटायर प्रोफेसर देवाशीष मुखर्जी आज अपने अकेलेपन से जूझ रहे थे। इतना बड़ा घर और वह बिल्कुल अकेले। मानो अकेलापन उन्हें निगल रहा था। रोज सुबह सवेरे सैर करने जाते थे, तब थोड़ी देर उन्हें बहुत ही अच्छा लगता था। पक्षियों की चहचहाट, ताजी हवा, खुला नीला आसमान, हल्की-हल्की धूप, सुंदर पेड़ पौधे और अपनी … Read more