सिया और अमन की शादी को पांच साल हो गए थे।अमन एक आटोमोबाइल कंपनी में था।घर में माँ मनोरमा, पिता आदित्य और भाई रवि थे। सिया एक खुशमिजाज लड़की थी जिसने पूरे घर को अपना बना लिया। परन्तु शादी के पांच साल भी सिया की गोद नहीं भरी। डाक्टर कहते सब ठीक है पिछले साल देवर रवि का विवाह हुआ अवंतिका से वर्ष भर में ही वो सुंदर स्वस्थ बेटे की मां बनी। बच्चे के जन्म का समय नजदीक आ रहा था
अवंतिका की मां उसे अपने घर ले गई की इस समय सिया का साया उस पर नहीं पड़ना चाहिए। मनोरमा ने खूब समझाया पर वो नहीं मानी।अमन और आदित्य ने कहा बात बढा़ने का फायदा नहीं बस सिया को कुछ पता नहीं चलना चाहिए। सिया उस समय बाजार गई हुई थी।
वो घर आई तो उसने अवंतिका के बारे में पूछा तो सबने कहा कि वो अपनी मां के घर गई है। अवंतिका ने बच्चे को जन्म अपने मायके में ही दिया। सिया फोन करती या मिलने जाती तो या तो अवंतिका बात नहीं करती या फिर उसकी मां उसे जल्दी से ही किसी काम के बहाने भेज देती।
बच्चे के जन्म के बाद जब अवंतिका घर आई तो वो अपने बेटे को बिल्कुल भी सिया के पास नहीं देती। वरुण के नाम करण वाले दिन भी सिया ने सारा इंतजाम किया पर जब बच्चे का नाम रखने का समय आया तो अवंतिका की मां ने सिया को पीछे कर दिया ये रस्में तो बाल-बच्चों वाली औरत करती है।सब बच्चे में व्यस्त थे और सिया टूट रही थी।
फिर एक दिन जन्माष्टमी का दिन था । सिया का व्रत था वो पूजा पाठ निपटा कर हाल में आई तो सास ससुर और अमन तैयार थे । उन्हें किसी रिश्तेदार के यहां बच्चों के जन्म दिवस के कार्यक्रम के लिए जाना था सिया व्रत होने के कारण नहीं जा रही थी और अवंतिका बच्चा छोटा था इसीलिए नहीं जा रही थी।
सास ससुर के जाने के बाद देवरा रवि बोला भाभी मैं भी जरा बाहर जाकर आता हूं। वरुण सो रहा है और अवंतिका नहाने गई है। सिया बोली ठीक है मैं यही हूं ध्यान रखूंगी वरुण के जाने के बाद सिया ने राधा को
दिन का काम समझाया और वह थोड़ी देर बैठ गई तभी जोर-जोर से वरुणके रोने की आवाज आने लगी। वह भाग कर कमरे में पहुंची और वरुण को उठाया चुप करने लगी तभी अवंतिका बाथरूम मे से बाहर आई और सिया के हाथ से वरुण को छीन लिया। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे बच्चों को हाथ लगाने की तुम मेरे बच्चे को क्या कर रही थी।
सिया बोली यह रो रहा था घर में कोई नहीं था इसीलिए मैंने वरुण को उठाया तुम मेरे बच्चों को हाथ मत लगाया करो दूर रहो इससे तुम्हारी परछाईभी इस पर नहीं पड़ना चाहिए। तभी बाहर से रवि आ गया रवि बोल क्या हुआ। अवंतिका बोली यह हमारे बच्चे को पता नहीं क्या कर रहे थे।
सिया ने कहा रवि मैंने कुछ नहीं किया वो तो वरूण रो रहा था बस इसीलिए मैंने उसे उठाया। भाभी अवंतिका को पसंद नहीं है आप प्लीज वरुण को हाथ मत लगाया कीजिए। सिया बाहर आ गई सिया की आंखों में आंसू थे वह अपने कमरे में आकर लेट गई ।
वह ईश्वर से कहने लगे मैंने ऐसा कौन सा गुनाह किया है जो आप मुझे इतनी बड़ी सजा दे रहे हैं मुझे क्यों इतने बड़े सुख से वंचित रखा।
रोते-रोते पता नहीं कब उसे नींद लग गई। अमन आए तो उन्होंने सिया को उठाया पूरा चेहरा आंसू से भीगा था पर सिया ने कुछ नहीं बताया। राधा को चाय का कह अमन अंदर आए तभी अवंतिका के माता-पिता आए आज कृष्ण जन्माष्टमी थी तो वह अपने नाती क लिए
कृष्णा के कपड़े लेकर आए थे सिया न भी। वरुण के लिए कपड़े खरीदे थे जो अवंतिका ने अपनी सास को साफ पहनाने से मना कर दिया था। सिया बहुत दुखी थी आज। राधा ने सारी बात अमन को बता दी थी कि उनके पीछे क्या हुआ था। सिया ने चाय पी और वह नहा कर पूजा की तैयारी करने लगी।
सबका शाम का खाना बनाकर सिया कृष्ण भगवान का प्रसाद बनाने लगी। अमन ने आज अपनी आंखों से अवंतिका और उसकी मां का सिया को इग्नोर करना देख लिया था। दिन वाली बात से वह बहुत परेशान थे। तभी अगले दिन जब मैं अपने दफ्तर गए तो उनके बॉस ने बताया कि जमशेदपुर में अपनी कंपनी का दूसरा ऑफिस है वहां पर हमें तुम्हारे जैसे ईमानदार मैनेजर की जरूरत है और तुम्हें अपने कंपनी के घर भी रहने को मिलेंगे यदि तुम हां करो तो मैं तुम्हारा नाम सुझाव में दूं।
कोई और मौका होता तो अमन अपने परिवार को छोड़कर भी न जाते परंतु वह घर की परिस्थिति से वाकिफ थे और सिया के दुख से भी किसी प्रकार अवंतिका और रवि उसका अपमान करते हैं और अवंतिका की मां भी सिया को कुछ ना कुछ बोल देती है इसलिए अमन ने फौरन हां कर दी।
घर जाकर अमन में अपने माता-पिता और सिया को बताया सिया बोली हम अकेले कैसे रहेंगे मां पिताजी फिर घर में एक छोटा बच्चा भी है अवंतिका से भी इतना काम नहीं होता। अमन बोला सिया तुम चाय बना ओ । सिया रसोईमें चली गई अमन ने सारी स्थिति अपने माता-पिता के सामने रखी और उनसे कहा सिया का दुख मुझे बर्दाश्त नहीं होता
और बार-बार उसका अपमान सहन नहीं होता है इसी कारण मैंने यह ट्रांसफर ली है। आप मेरा साथ दें और हमें जान दे ताकि घरमें कोई कलह ना हो। भाई-भाई का रिश्ता खराब नहीं होनाचहिए। आप किसी से भी यह बात नहीं कहेंगे कि हमकिस वजह से जा रहे हैं। अमन के माता-पिता समझदारथे उन्होंने अमन की बात समझी और उन्हें जाने की इजाजत दी।
सिया बहुतभ।री मन से वहां से गई वह लोग जमशेदपुर आ गए वहां पर उन्हें कंपनी की तरफ से ही घर मिले थे उनके पड़ोसी वर्मा जी थे। वर्मा जी के परिवार में उनकी पत्नी गीता तीन बच्चे मधुसूदन निहाल और बेटी रीवा थे। निहाल औररीवा का जीवन अलग था परंतु मधुसूदन चुप-चुप रहता था वह 7वर्ष का बालक था
और मैं घर के कामों में अपनी मां की सहायता करता तब भी गीत सारा दिन उसे पर चिल्लाती। सिया को मधुसूदन को देखकर तरह आता 2 दिन के बाद वर्मा जी अमन के पास आए बोले मेरे ससुर की तबीयत खराब है इसीलिए मुझे सपरिवार बडोदरा जाना क्या क्या आप दो दिन मेरे मधुसूदन का ख्याल रखेंगे
क्योंकि उसे मैं अपनी ससुराल नहीं ले जा सकता वह मेरी पहली पत्नी की संतान है। अमन बोल कोई बात नहीं आप हमारे यहां छोड़ दीजिए सिया ने मधु को बहुत प्यार से रखा उसे नया-नया बनाकर खिलाता अच्छे से पढ़ाती हूं उसका ध्यान रखती उसे नए कपड़े भी लेकर देता मधुसूदन का लगाव भी सिया की तरफ बढ़ र हा था।
इस बात से गीता को परेशानी होने लगी क्योंकि मधुसूदन अब ज्यादा समय सिया के पास ही रहता था। उसने लोगों से सिया के बारे में उल्टा सीधा बोलना शुरू कर दिया कि मेरे बेटे को फंसा रही है। अपने बच्चे तो है नहीं मेरे मधु को पता नहीं क्या कर रही है।
सिया ने मधु को अपने घर बुलाना कम कर दिया परंतु फिरभी मधु चुपके उसके पास आता सिया भी मधु को बहुत प्यार करती थी उन दोनों के बीच कैसा अनोखा बंधन था जो कोई समझ नहीं सकता था मधु हमेशा कहता आपमें मुझे मां दिखाई देती है।
आप मेरे जीवन में सबसे अनमोल है दसवीं पास करके मधु पढ़ाई के लिए बाहर चला गया और सिया मैं भी एकस्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया मधु जब भी घर आता सिया से मिलने जरूर आता और सिया भी जब तक मधु को पढ़ाई के लिए लगेने वाला पैसा और कपड़े भेजती। मधु की पढ़ाई का अमन और सी आने ही उठाया था
क्योंकि वर्मा जी के ऊपर उनके परिवार की जिम्मेदारी और ससुराल की भी जिम्मेदारी थी। उनका साला निकम्मा था तो घर का सारा खर्चा वर्मा जी उठाते थे इसीलिए जब मधु को बाहर भेजने की बात हो रही थी तो उन्होंने यह सारी बातें सिया और अमन से की थी। तब अमन ने कहा कि हम मधु की पढ़ाई का सारा खर्चा उठायेंगे।
मधु जैसे होनहार बच्चे को शिक्षा का अधिकार है जो उसे मिलेगा उसके फार्म भरवाना अच्छेकॉलेज में एडमिशन कराना सब कुछ अमन औरसिया ने किया परंतु उन्होंने यह बात कभी भी मधुसूदन से नहीं कहीं। वर्मा जी ने भी अपने घर में यही बताया एक साधारण से सरकारी कॉलेज में इसे भेज दिया है।
आज दिवाली का दिन था 20 साल बाद आज सिया और अमन भी अपने घर आए थे दिवाली मनाने रवि और अवंतिका अब दो बच्चों के माता-पिताथे वरुण और आभा । सभी खुश थे कि इतने सालों बाद सारा परिवार एक है शामको पूजा की तैयारी थी की एक सरकारी गाड़ी उनके घर के सामने आ कर रुकी ।
गाड़ी में से एक 28 साल का नौजवान और दूसरी तरफ से एक लड़की शायद उसकी पत्नी थी उतरे अमन ने रवि से कहा शायद तुम्हारे मेहमान आए हैं आकर जरा देखो पर तब तक एक नौकर अंदर आया बोला अमन भैया आपसे और सिया दीदी से मिलने कोई आया है हमसे मिलने कौन आया? अमन और सिया बाहर है तब तक वह दोनों बच्चे अंदर आ चुके थे और आते ही उन्होंने अमन और सिया के पैर छुए।
वह लड़का बोला नंदिनी यह मां है इनके पैर छुओ और यह पिताजी जिनकी वजह से मैं आज यहां हूं। सिया ने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया मधु मेरा मधु हां मां तुम्हारा मधु आज देखो कहां से कहां पहुंच गया सिर्फ तुम दोनों के कारण। नहीं बेटा ऐसा मत करो अमन बोला तुम्हारे अंदर काबिलियत थी
इसीलिए तुम इतने आगे बढ़े मैं शायद इतना आगे कभी ना बढ़ता यदि आप लोगों ने मेरा साथ ना दिया होता मां ने मुझे प्यार दिया जो एक छोटे बच्चेकी सबसे पहले जरूरत होती है। आप लोगोंने मेरे जीवन में मुझे सब दिया पिताजी गुजरने से पहले मुझे सब बता गए थे।
उन्हें अपना पुश्तैनी घर और जमीन ज्यादाद सब मेरेभाई बहनों के नाम करना पड़ा मां के स्वभाव के कारण वह कुछ नहीं बोल पा रहे थे। बस जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब थी तो उन्होंने मिलने बुलाया औरसारी बातें बताएं आपके घर का पता भी उन्होंने नहीं दिया अब आप लोग दोनों मेरे साथ मेरे पास रहेंगे
ताकि मेरे बच्चोंको भी आप संस्कारी और एक अच्छा व्यक्ति बना सके। यह मेरी पत्नी नंदिनी जब से नंदिनी को मैंने आपके बारे में बताया है तबसे वह आप लोगों से मिलना चाहती हैं थी क्योंकि वह भी प्यार और ममता इस सुख से वंचित रही इसीलिए हम दोनों चाहते हैं आप दोनों हमारे साथ चलें और हमें वही प्यार और ममता दे ।
हमारे बच्चों को और हमें आपकी जरूरत है। मधु और सिया दोनों रो रहे थे किसी को समझ नहीं आ रहा था यह कैसा बंधन है। आज अवंतिका भी अपने आप को ठगासा महसूस कर रही थी कि मैं इस औरत केसाथ गलत किया जो दूसरे के बच्चे को इतना प्यार दे सकती है।
मेरे बच्चों का अनर्थ क्यों सोचेगी? रवि और अवंतिका ने भी अपने व्यवहारिक के लिए सिया से माफी मांगी। सब ने मिलकर साथ में लक्ष्मी पूजन किया। मधु ने अमन के घर के पास ही घरले लिया अब सिया और अमन कभी अपने घर रहते कभी मधु के घर रहते हैं वह रवि के बच्चोंका भी बराबर ध्यान रखते।
नंदिनी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया और सिया के हाथ में देते हुए बोले मां इसे आप बिल्कुल मधु जैसे बनना। सिया सोच रही थी कहां ईश्वर ने एक संतान भी नहीं दी थी। आज वह तीन-तीन बच्चों की मां है। सिया नंदिनी से बोली हम दोनों मिलकर इसकी परवरिश करेंगे
और इसे संस्कारी बनाएंगे तब तक सब लोग आ गए अमन ने पूरे अस्पताल में मिठाई बंटवाई और सिया नंदिनी और बच्चेकी नजर उतार घर की तरफ चल पड़ी नंदिनी के स्वागत की तैयारी के लिए। आज उसके बच्चे घर आ रहे थे और वह सच में मां बन गई थी। आज भी कृष्ण जन्माष्टमी थी आज कान्हा जी ने उसे बच्चे उपहार स्वरूप दिए थे जो सबसे अनमोल थे।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी