रंजिता जी आ गई इतनी बड़ी सेविका है।औरतों और बच्चों का वो भी लड़कियों का कितना ध्यान रखती हैं।इनके परिवार में कौन कौन है? एक बेटा राघव उसकी पत्नी शमा और दो पोते विराज और मिहिर प्यारा सा परिवार है।इनके पति कैलाश नाथ जी का कुछ अरसे पहले ही निधन हो गया बीमार रहते थे।
ऐसा आश्रम की औरतें बाते कर रही थी।सीमा रीना से बोली यदि ईश्वर ने इन्हें पोती दी होती तो उसे सर आंखों पर रखती।सच में सब लड़कियां और औरतें बातें कर रही थी।उसके बाद सेक्रेटरी ने बताया मैडम आपको govt कॉलेज जाना है डिग्री देनें बच्चों को ।हा हा चलते है पहले मुझे जरा फ्रेश होना है उस आश्रम की औरतो और लड़कियों ने पास बदबू आ रही थी।
पहले जल्दी से रंजिता फाइव स्टार होटल में गई। शावर लिया साड़ी बदली और फिर कॉलेज पहुंची।सभी लोग स्वागत में जुटे थे प्रिंसिपल ने मेडिकल स्टूडेंट को बुलाया जिन्होंने अभावों में पढ़ाई कर डॉक्टर की डिग्री ली।सबसे पहले रतन कुमार जिन्होंने ने कार्डियक में स्पेशलाइजेशन किया है।
अब मै बुलाऊंगा बरखा शुक्ला का जिन्होने स्त्रीरोग में स्पेशलाइजेशन किया है और हमारे हॉस्पिटल में ही काम करेगी।बरखा का नाम सुन रंजिता ने उसे देखा।स्टेज पर सफेद कोट में एक बहुत सुंदर लड़की जिसका चेहरा अभिमान से दमक रहा था।उसे डिग्री और सर्टिफिकेट दिया ।
बरखा ने रंजिता के पैर छुए।प्रोग्राम खत्म हुआ रंजिता बाहर आई वहां पत्रकार उसी बच्ची का इंटरव्यू ले रहें थे।बरखा बता रही थी मेरी मां ने हमे अभावों में पाला मै और मेरी बहन पाखी जो CA की पढ़ाई कर रही है।हम मां को आराम देना चाहते हैं।आपके पिता किसी ने पूछा तो बरखा बोली पिताजी का देहांत हमारे बचपन में हो गया।
इसलिए हम नाना जी के साथ रहते थे फिर उनके देहांत के बाद मां ने ही सब संभाला और हमें पढ़ाया। रंजिता आगे बढ़ गई उसे बरखा पाखी नाम से कुछ याद आ रहा था।रंजिता घर आई तो उसने पूछा राघव कहा है।शमा डरते हुए बोली माजी वो अभी फैक्ट्री से आए नहीं है।
जा चाय ले कर आ मेरे लिए शमा चाय लेने चली गई।शाम को राघव आया तो बोला मां क्या बात है क्यों परेशान हो।एक बात बता दिवाकर कहा है आज कल आपको भैया की याद कैसे आ गई? बस वैसे ही वो तो भाभी वाले हादसे के बाद जो यहां से गए लौटे ही नहीं।आज कल अमेरिका में है। पर इतने सालों बाद आप क्यों पूछ रही हैं।
कुछ नहीं बस ऐसे ही। शमा चाय ले आई और राघव और रंजिता चाय पीने लगे।रंजिता बोली तू जा और रसोई देख शमा चली गई। रंजिता बोली। अरे आज कॉलेज में डिग्री देने का कार्यक्रम था तो वहां एक लड़की थी बरखा शुक्ला और अपनी बहन का नाम वो पाखी बता रही थी।
इसलिए मुझे लगा वो मनहूस रागिनी कही जिंदा तो नहीं और उसकी बेटियां भी अरे नहीं माँ आपको याद नहीं की हम उन्हें जंगल में मरने के लिए छोड़ आये थे।जानवर खा गया होगा उन्हें वो अपने पिता के घर भी कहा गई थी।वो बुड्ढा भी सब बेच कर चला गया था।
हा सही कह रहा है।राघव रंजिता के कमरे से बाहर आ गया।रंजिता बिस्तर पर लेट गई और अतीत में खो गई।दिवाकर उनका बड़ा बेटा बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई कर अमेरिका से लौटा था। रंजिता उसकी शादी अपनी सहेली मधु की बेटी पूजा से करना चाहती थी ताकि उनका बिजनेस ग्रो करे।
पर दिवाकर को पूजा पसंद नहीं थी दिखावा मॉर्डन ड्रेसेस वो उसके नेचर की नहीं थी।वो एक सुबह अपने पिता के साथ मंदिर गया वही पर उसने रागिनी को देखा और अपना दिल हार गया।रागिनी के पिता नंदकिशोर प्रोफेसर थे घर में नंदकिशोर और रागिनी थे।माता का देहांत कुछ 2 साल पहले कैंसर से हो गया था।रागिनी मनोविज्ञान की छात्रा थी जो phd कर रही थी।
दिवाकर ने रागिनी से मेलजोल बढ़ाया और दोनों एक दूसरे को चाहने लगे।ब्रेकफास्ट टेबल पर रंजिता बोली मै सोच रही हूं अगले हफ्ते तुम्हारी और पूजा की एंगेजमेंट कर दूं।नहीं मां प्लीज़ पूजा का और मेरा कोई मेल नहीं है वैसे भी मैं किसी को पसंद करता हूं।
क्या बक वास है।तुम किसी को कैसे पसंद कर सकते हो।मां मेरी जिंदगी तो फैसला भी मेरा ही होगा ।कौन है जरा सुनु रागिनी नाम है उसका मनोविज्ञान में phd है उसके पिता प्रोफेसर है और खुद रागिनी भी प्रोफेसर लगने वाली है।ओह तो किसी मिडिल क्लास की लड़की ने फंसा लिया है।
पैसा दो और जान छुड़ाओ ।मां प्लीज़ मैं रागिनी से प्यार करता हूं आप रिश्ता ले कर जाइए वरना मैं कोर्ट मैरिज कर लूंगा और ये घर छोड़ दूंगा।कैलाश नाथ ने रंजिता को समझाया कारोबार और बेटे के प्यार को मत तोलो।रंजिता कैलाश नाथ के कहने पर रागिनी को दुल्हन बना तो लाई पर उसे एक नौकरानी से ज्यादा कुछ नहीं समझा।
रागिनी घर में नौकर होते हुए भी काम करती कम दहेज गरीबी का ताना सुनती फिर उसने बरखा को जन्म दिया तब तो रंजिता पागल हो गई।हमारे खानदान में सिर्फ लड़के है तू आ गई और अपने जैसी मनहूसियत ले आई।रागिनी कॉलेज की 6 महीने की छुट्टी पर थी जब तक वो घर थी तानो के बावजूद भी वो बरखा का अच्छा ध्यान रखती थी उसे कॉलेज ज्वाइन करना पड़ा तो उसने लक्ष्मी को बरखा की देख भाल के लिए कहा ।
रंजिता ने लक्ष्मी को काम में उलझाए रखा था बच्ची भूख से बिलखती रही और बेहोश हो गई।रागिनी कॉलेज से जल्दी आ गई तो उसने देखा बच्ची को साँस नहीं आ रही।जल्दी से दिवाकर को बुलाया दोनो डॉक्टर के पास दौड़े ।बड़ी मुश्किल बरखा की जान बची।
रागिनी अब घर रहती और बेटी को संभालती दिवाकर उसे सपोर्ट करता पर दिवाकर के जाते ही रंजिता अपने असली रूप में आ जाती।उधर राघव की शादी तय हो गई शमा बिजनेस पार्टनर गोविंद जी की इकलौती बेटी थी जिन्होंने अपना बिजनेस राघव को सौंप दिया क्योंकि वो बीमार रहते थे।शमा पैसा गहना सब लेकर आई दो बेटों की मां बनी।
उसके माता पिता का रोड एक्सीडेंट में देहांत हो गया तब रंजिता और राघव का व्यहवार बदल गया अब वो घर की बहु थी फैशन की गुड़िया जो गहने से लदी है।पर कोई सम्मान नहीं।उधर रागिनी ने दूसरी बेटी पाखी को जन्म दिया तो रंजिता पागल हो गई दो दो मनहूसियत की पोटली ले आई इसे निकालो मेरे घर से मेरे बेटे पर बोझ डाल रही है।
रागिनी का जीना मुहाल था।शमा भी आते जाते बोलती अरे एक बेटा पैदा कर लेती तुम।फिर दिवाकर को बिजनेस के किसी काम से बाहर जाना पड़ा।बस रंजिता को मौका मिल गया उसने रागिनी और बच्चों को गाड़ी में बिठाया राघव साथ था।वो उन्हें जंगल में छोड़ कर आ गए और खबर फैला दी कि वो भाग गई ।
रागिनी के पिता को भी कुछ पता नहीं था वो भी ढूंढ रहे थे।दिवाकर टूट गया 6 महीने तक ढूंढता रहा जब कुछ पता नहीं चला तो उसने भी मान लिया जो उसकी मां ने झूठ सच बताया और वो सब कुछ छोड़ अमेरिका चला गया। रंजिता वर्तमान में लौट आई।
उधर 2 महीने रागिनी एक गांव में रही जहां के लोगों ने उसको जानवरों से बचाया था।फिर उसने अपने पिता को फोन किया वो आए उन्होंने शहर के बाहर एक घर किराए पर लिया और बेटी को नातियों को ले गए और कुछ समय बाद अपना रहता घर बेच दिया।
और उन्होंने वही जमीन ले ली घर बनाया रागिनी ने दोबारा नौकरी शुरू कर दी और बच्चों को पढ़ाया उसे दुख इस चीज का था उसका दिवाकर भी उसे नहीं समझा था ।आज का दिन बरखा घर आई मा मा आप कहा है मेरे इतने बड़े दिन आप नहीं आई ये क्या बात हुई।
पाखी बोली दी मां सो रही थी वो और मै आए थे पर पता नहीं उन्होंने किसे देखा और वो मुझे लेकर भाग कर घर आ गई।ऐसा क्या हुआ बरखा सोच रही थी ।शाम को रागिनी उठी तो बरखा ने पूछा क्या हुआ था मां ।रागिनी बोली जिस औरत ने आज तुम्हे डिग्री दी वो कौन थी पता है? हा कोई समाजसेवी है जो लड़कियों और औरतों के लिए काम करती हैं।
औरतों और लड़कियों के लिए उनसे तो वो नफरत करती है।नफरत आप उन्हें जानती है हा वो तुम्हारी दादी है जिन्होंने हमें मरने के लिए जंगल में फेक दिया। वो तो ईश्वर की कृपा हुई और हम बच गए तुम्हारे पिता को मेरे चरित्र के बारे में बताया मै ड्राइवर के साथ भाग गई।
तुम्हारे नानू को कितना परेशान किया।वो दोहरे चेहरे वाली औरत है जो समाज के लिए कुछ और और घरवालों के लिए कुछ और तुम्हारे बाद मुझे दिन रहे लड़की है एबॉर्शन करवा दिया इसलिए पाखी के समय मैने बताया ही नहीं। तुम्हारी चाची तो पैसे वाली थी उसकी भी गत बना रखी थी।
रागिनी बोली इसका सच मै सामने लाओगी।नहीं बेटा तुम दूर रहो उनसे ।कुछ दिन बीते दिवाकर के पिता की बरसी थी सब उसी मंदिर में आए थे जहां पहली बार रागिनी और दिवाकर मिले थे।पूजा की तैयारी चल रही थी पाखी और बरखा भी आई थी दर्शन करने बरखा को देख रंजिता बोली तुम वही हो ना जिसे उस दिन डिग्री और अवार्ड मिला था।
जी और आप वही है ना जो औरतों और लड़कियों की भलाई करने का दिखावा करती है।ए लड़की क्या बोल रही है जानती है मै कौन हूं।हा जानती हूं दोहरे चेहरे वाली औरत जिसने अपनी बहु और पोतियों को मरने के लिए छोड़ दिया।दिवाकर बोला बेटा क्या कह रही हो जी मैं सच कह रही हूं और बरखा ने सारी बातें बताई
और रागिनी ऊपर आ रही थी उसे दिवाकर ने देख लिया वो दौड़ता हुआ रागिनी के पास गया बोला तुम कहा चली गई थी।मैने तुम्हे कहा नहीं डूंडा ऊपर उस बच्ची ने सच बताया।रागिनी ने रंजिता को देखते हुए कहा ये आपकी बेटियां है बरखा और पाखी मेरे बच्चे ।
बाप के होते हुए अनाथों की तरह रही छी मा ये क्या किया आपने आपका ये दोगोला चेहरा मेरे सामने आ गया है।मै जा रहा हूं दिवाकर ने रागिनी और बच्चों का पासपोर्ट बनवाया 3 महीने बाद वो सब अमेरिका में थे।दिवाकर बोला जो समय तुमने मेरे बिना काटा है उसकी भरपाई करने की कोशिश करूंगा।
उधर ये सब वीडियो में कैप्चर हो गया और सारी दुनिया को रंजिता की असलियत पता चल गई।उसे प्रेसिडेंट के पद से भी हटा दिया गया।घर में पोते भी कह रहे थे दादी बहने होते हुए हमारी कलाई तीज त्यौहार पर खाली रही ।आप औरत हो कर ऐसा करती रही आपकी छवि आज धूमिल हो गई।
रंजिता शीशे में अपना चेहरा देख रही थी कि क्या सच में मै दो चेहरों के साथ जी रही थी।मेरी अकड़ और घमंड ने बेटे से दूर किया । अब वो दिवाकर को फोन करती तो फोन ब्लॉक था।पोते भी दूर ही रहते अपने कर्मों की सजा वो वही भुगत रही थी।एक औरत दूसरी औरत की दुश्मन हो गई।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी