सविता की शादी एक भरे पूरे परिवार में हुई।दो ननद राधा और मीरा एक देवर मोहन सविता के पति केशव ससुर दीनानाथ ऐसा परिवार था।जिसमें चलती सिर्फ सविता की सास रूक्मिणी की थी बाकी सब तो प्यादे थे।रुक्मिणी एक तेज गुस्से वाली महिला थी जिन्हें हर चीज समय पर चाहिए होती थी देर हो गई तो खैर नहीं।सविता ब्याह कर आई तब ननद राधा 10 वीं में और मीरा 9 वी कक्षा में थी।
मोहन 2 साल में था इंजीनियरिंग के केशव पिता के साथ पेट्रोल पंप संभालते थे।सविता का दिन 5 बजे शुरू होता नहा कर 6:00 बजे चाय देती रुक्मिणी जी को और ससुर जी को रुक्मिणी चाय पी नहाने जाती और सविता पूजा की तैयारी करके रखती।फिर नाश्ता खाना सब बनाती।देवर ननदों को बच्चों की तरह तैयार कर स्कूल कॉलेज भेजती।ससुर जी और केशव नाश्ता कर पेट्रोल पंप जाते ।
कभी कभी तो केशव सुबह सुबह ही चले जाते।फिर घर की सफाई रसोई की सफाई बर्तन कपड़े करते सविता का आधा दिन निकल जाता वो तो केशव को तरस आ गया और एक सफाई बर्तन वाली लगा ली गई।फिर दिन का खाना बनाती पेट्रोल पंप भिजवाती ।राधा मीरा आ जाती उनका खाना सविता और रुक्मिणी भी तभी खाना खाती।फिर शाम को चार बजे फिर रोटी बनती जब मोहन आता ।चाय नाश्ता बना कर वो पेट्रोल पंप भेजती फिर रात का खाना पीना।
इसी में उसकी जिन्दगी कट रही थी।सविता इतना अच्छा लिखती थीं पर यहां क्या उसकी कीमत थी।रुक्मिणी के इशारों पर घूमने वाली गुड़िया थी वो बस।धीरे धीरे समय बीता मोहन इंजीनियर बन गया और वो इलाहाबाद चला गया उसकी शादी हुई तो उसकी पत्नी मीनू भी वही गई उसने तो साफ कह दिया था मै हिटलर के साथ नहीं रहूंगी दीदी आपकी कमाल है में तो 7 दिन में ही पक गई।
रुक्मिणी की बहुत इच्छा थी कि मीनू वही रहे पर मोहन ने अपने खानेपीने का वास्ता दिया तो मीनू की जान बच गई।फिर कुछ सालों में राधा और मीरा भी अपने घर की हो गई।पहले भी कोई मदद नहीं करती थी अब तो ससुराल वाली थी तो मतलब ही नहीं हर 15 दिन में चक्कर लगता पर रुक्मिणी ऐसे उत्सुक रहती जैसे सालों बाद आई हो और सविता को कभी जाने नहीं देती थी कि हमारे घर में ऐसा नहीं होता।
इस बीच सविता भी दो बच्चों की मां बन चुकी थी नमन और प्रिया।नमन सविता जी जैसा शांत स्वभाव का था।उधर प्रिया में दादी और बुआ वाले गुण उतरे थे। सबके बच्चे बड़े हो रहे थे। दीनानाथ जी का देहांत हो चुका था। मीरा सपरिवार कानपुर चली गई थी।मोहन भी लखनऊ में था अपना हिस्सा ले।
कर अपना घर बना लिया था।नमन सी. ए था और शाम को पेट्रोल पंप भी संभालता था। सविता अब नमन की शादी करना चाहती थी उसने शालिनी को नमन के लिए चुना ।रुक्मिणी ने बहुत शोर मचाया पैसे वाली लाती ये क्या मास्टर की बेटी पकड़ लाई है।
ये शादी नहीं होगी नमन बोला दादी मुझे अपनी मां की परछाई चाहिए ।तेज तरार फैशन वाली लड़की के साथ मेरा निबाह नहीं होगा।फिर वो आपका भी कुछ नहीं करेगी देख लो आप ।रुक्मिणी को लगा कह तो सही रहा है वो प्रिया को अपनी नातिन नीति को देखती थीं कि कुछ नहीं करती सिर्फ जबान चलाती है।इसलिए यह शादी हो गई।सविता ने शालिनी को पहले दिन ही कहा बेटा एक बेटी ले कर जा रही हूं हमेशा मां ही समझना।
शालिनी की मां का बचपन में ही देहांत हो गया था इसलिए वो भी मां के प्यार से अछूती थी । यहां वो सविता के प्यार के आँचल में खुश थी । प्रिया कभी कभी उल्टा सीधा बोलती पर वो ज्यादा ध्यान नहीं देती थी।दादी का भी कुछ ना कुछ चलता पर सविता के कहे अनुसार वो सुन लेती पर चुप रहती।इधर प्रिया की शादी सुमित से तय हुई।सुमित के परिवार में माता कृष्णा और पिताजी प्रशांत थे एक बहन रीना थी जिसका विवाह हो चुका था ।
सुमित एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था।प्रशांत वकील थे और कृष्णा घर पर रहती थी।सुमित बहुत सुलझा हुआ और समझदार लड़का था।जो अपने माता पिता का आज्ञाकारी बेटा था।जिसे उसके माता पिता ने अच्छे संस्कार दिए थे। प्रिया तुनक मिज़ाज़ थी जरा जरा सी बात पर मुंह फूला लेती थी।
एक दिन सविता और केशव किसी शादी में दूसरे शहर गए थे घर में नमन दादी और शालिनी थे। नमन ऑफिस चला गया और शालिनी ने क्लासेज उस दिन ऑनलाइन अरेंज कर ली ताकि वो घर में दादी का ध्यान रख सके।दिन का खाना खा कर रुक्मिणी सो गई और शालिनी ने अपनी क्लास लेना शुरू कर दिया।
आधे घंटे बाद बेल बजने लगी दरवाजा खोला तो प्रिया थी। प्रिया अंदर आई मां कहा हो किस मुसीबत में मुझे फंसा दिया सास ससुर ना हुए जी का जंजाल और एक वो है श्रवण कुमार मुझे नहीं रहना वहां। मां पापा तो शादी में गए हैं यहां नहीं है आओ बैठो ।
शालिनी ने क्लासेज को छुट्टी दे कर प्रिया को खाना दिया और उसे समझाया कि सुमित तो बहुत समझदार है शांति से बात निपटा सकते है।तुम ना मां जैसे मत बोलो।देखो दादी ये भी मुझे घर से निकलना चाहती है।हा तेरी मां की लाडली जो है सही कहा दादी वो मेरी मां कम भाभी की मां ज्यादा है उन्हें यही सही लगती हैं और मैं गलत ।नहीं प्रिया ऐसा नहीं है मां तो हम सब को बराबर ही प्यार करती हैं और हम सब यही तो चाहते हैं कि आप का घर हंसी खुशी बसा रहे।
प्रिया प्लीज़ तुम समझो और एडजेस्ट करने की कोशिश करो। नई नई शादी में थोड़ा समझाना पड़ता हैं।तुम चुप रहो तुम्हे क्या पता है सब मेरी मां जैसे बेवकूफ नहीं होते जो अपनी बेटी को छोड़ दूसरी लड़की को अपना लेते हैं।तुम बाहर की हो बाहर की रहो हमारे घर के मामले में दखल मत दो।
जाओ यहां से प्रिया चिल्लाई तब तक नमन भी आ गया क्या बात है क्यों चिल्ला रही हो?ओह मा को तो ये शीशे में उतार चुकी है अब ये भी आ गया। तुम लोग जाओ यहां से। रुक्मिणी बोली बेटी तू यहां आ जा।ओ महारानी जी जाओ चाय बना कर लाओ।शालिनी चाय बनाने चलीं गई ।
नमन ने सुमित को फोन लगाया तो पता चला आज प्रिया और सुमित को बाहर जाना था पर पापा की शुगर स्पाइक कर गई उन्हें डॉक्टर के यहां ले जाना पड़ा इसलिये वह गुस्सा हो गई। दो दिन बाद सविता और केशव वापस आए तो उन्हें सारा ड्रामा पता चला।
प्रिया सविता से भी लड़ पड़ी ।सविता ने समझाना चाहा तो बोली तुम मुझसे ज्यादा तो भाभी की मां हो मेरी बात क्यों सच मानोगी।क्या कह रही हो। प्रिया बहुत देर बड़बड़ाती रही क्योंकि उसे रुक्मिणी का सपोर्ट था। फिर वो अपनी सहेली के साथ मूवी देखने चली गई।नमन अपने माता पिता से बोला यह समझने से मानने वाली नहीं है इसके लिए कुछ और ही सोचना पड़ेगा।अगले दिन शालिनी उठी नहीं सविता उठाने गई
तो चिल्लाने लगी आपकी बेटी तो खुद ग्यारह बजे उठती है मुझे 6 बजे उठा देती है।नमन बोला मां से कैसे बात कर रही हो।सहीं कर रही हूं सारा दिन तुम्हारी बहन की चिक चिक या तुम्हारी दादी की सेवा या माता पिता का काम मुझसे नहीं होता मैं अपने पिता के घर जा रही हूं अगर दूसरा घर ले लो तो मुझे ले आना।
शालिनी चली गई। प्रिया बोली तुम्हारी लाडली तुम्हे कितना कुछ सुना कर चली गई और लाड लगाओ।उधर सुमित की तरफ से तलाक का नोटिस आया प्रिया के हाथ पैर फूल गए क्योंकि वो सुमित को चाहती थीं और ये भी जानती थी कि उसके पिता वकील है तो कोई भी एलिगेशन लगा सकते हैं।
कोर्ट ने 6 महीने का समय दिया प्रिया अपना घर तोड़ना नहीं चाहती थी इसलिए उसने अपनी मां की बात मान घर को समझना शुरू किया उसे अहसास हुआ कि सब उसे कितना प्यार करते है उसे अपनी गलती का अहसास हुआ आज वो सुमित के साथ अपने ससुराल आई वहां घर में सब हंसी मजाक कर रहे थे कि सही सलाह और सबक ने प्रिया को घर में बसा दिया आज वो खुश है जी मां शालिनी बोली और सॉरी अगेन उस दिन के लिए।
अरे कितनी बार माफी मांगेगी बेटा तेरा और नमन का प्लान चल गया और बेटी का घर बस गया। प्रिया ऊपर आई और बोली अच्छा तो ये आप सबकी चाल थी कि मैं वापस चली जाऊं।सब डर गए अब क्या होगा? और तुम शालिनी मेरी मां तो तुम्हारी ही मां है ।
शालिनी डर गई कि अब क्या होगा? आओ बेटा बैठो सविता बोली कैसी हो? जी बहुत अच्छी और शालू थैंक्स मेरा मेरे घर से परिचय करवाने के लिए मै भी कोशिश करूंगी तुम्हारी तरह सबका दिल जीतने की। I am sorry और प्रिया शालिनी के गले लग गई।
मां आपकी सीख सच में काम आई अब वो घर ही मेरा अपना है। मैं और सुमित आपको मम्मी जी के बर्थडे पार्टी का इनविटेशन देने ही आए थे।आप सब जरूर आना और मां अपनी प्यारी बेटी को लेकर आना।जी मां हम मां बेटी अपनी प्यारी सी छोटी सी बेटी से मिलने चलेंगे।उसकी खुशियों में शामिल होने।
सब मुस्कुरा दिए और सविता मन ही मन प्रार्थना कर रही थी ईश्वर मेरी दोनो बेटियों के घर प्यार और विश्वास से भरे पूरे रहे।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी