मम्मी मैं सुबह से देख रही हूं । आप आते-जाते इस अलमीरा में कुछ ढूंढ रही हैं। अगर मुझे भी पता चले तो,मैं शायद कोई आपकी मदद कर दूं कहते हुए नीति ने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी।
नीति को इस तरह पूछते देखकर मैं भी मुस्कुरा कर कहने लगी।
नीति मैं वह प्योर सिल्क की साड़ी ढूंढ रही हूं जो मेरी शादी के वक्त मुझे उपहार स्वरूप तुम्हारी नानी ने मुझे दी थी।
आज मेरी शादी को तीस वर्ष बीत चुके हैं मगर पता है नीति आज भी वह साड़ी मेरे दिल के उतनी ही करीब है जितनी कि पहले थी।
उसके बाद लगभग वैसी ही सिल्क की साड़ी मैंने बाजार से भी खरीदी मगर उन साड़ीयों में वह बात नहीं… जो उस साड़ी में है।
मेरी बात सुनकर नीति फिर मुझसे पूछने लगी।
मम्मी आखिर उस साड़ी में ऐसी क्या बात है आखिर इतना लगाव कैसे… जरा मैं भी तो सुनूँ….
ठीक है बताती हूं मगर उसके पहले तू दो कप चाय तैयार करके लेकर आ क्योंकि हम दोनों चाय की चुस्की भी लेंगे और तब ही उस साड़ी से लगाव के बारे में भी बताऊंगी।
मेरी बात सुनते ही नीति ठीक है मां अभी लेकर आती हूं कहकर रसोई घर में चली गई और पांच मिनट बाद ही दो कप चाय और मठरी लेकर आ गई।
चाय पीते पीते ही मैं फिर नीति से कहने लगी… नीति जब मैं छोटी थी तो यही देखती थी कि मां जब कभी भी घर से बाहर निकलती तो सिर्फ सिल्क की साड़ियां ही पहना करती थी। और वह इतने सलीके के साथ पहनती थी की घर के बाकी सदस्य तो क्या मैं भी मां को निहारते रह जाती थी।
यहां तक की मोहल्ले में भी मां की पहचान सिल्क की साड़ीयों से ही होती थी। यह बात अलग है वे गर्मियों में समर सिल्क और ठंडी के दिन में प्योर सिल्क, बनारसी सिल्क बगैर पहन लेती थी और पता है नीति उनके गले में हमेशा एक मंगलसूत्र और कानों में भी बहुत सिंपल हीरे के ही टॉप्स होते थे।
वह इस पहनावे के साथ जब भी कहीं जाती तो सब उनकी तारीफ किए बगैर नहीं रहते । वैसे देखा जाए तो उनका पहनावा बहुत सिंपल और सलीकेदार होता था ।
सच कहूं तो मैं तो उनकी बहुत कायल थी। मेरा नन्हा मन अक्सर सोचा करता था कि जब मैं बड़ी हो जाऊंगी तो मैं भी मां की तरह सिल्क की साड़ियां ही पहना करूंगी।
मेरी बात सुनते ही नीति बीच में ही बोल पड़ी। अच्छा तो इसीलिए आप ज्यादातर सिल्क की साड़ियां ही पहनती है और हां सच कहूं तो मम्मी आप पर जचती भी बहुत है।
वैसे देखा जाए तो आपकी उस साड़ी का रंग लाल चटकदार
ऐसा है। वह जिसके बदन से भी लिपट जाए । उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा दे। वैसे सच कहूं तो मेरी मम्मी का तो मन भी बहुत खूबसूरत है कहते हुए नीति हंस पड़ी।
मैं नीति की चटपटी बातें सुनकर मुस्कुरा कर कहने लगी। बस बस अब यह झूठी तारीफ रहने दे और हां वह साड़ी मुझे इसीलिए आज भी बहुत पसंद है क्योंकि वह तुम्हारी नानी यानी कि मेरी मां की दी हुई निशानी है या फिर यूं समझले मेरे लिए ढेर सारी ममता है, इसीलिए मैं जब भी देखती हूं या फिर उसे पहनती हूं तो अक्सर उनका प्यार, उनका आशीर्वाद झलक उठता है । मुझे उसे वक्त ऐसा लगता है ।
मानो कल की ही बात है। जब उन्होंने मुझे इतने प्यार से वो साड़ी उपहार स्वरूप दी थी। और हां यह बात शायद तुम अभी ना समझ पाओ मगर जब तुम्हारी शादी हो जाएगी । तब तुम जरूर समझ जाओगी। अच्छा छोड़ अब यह पुरानी बातें और साड़ी ढूंढने में मेरी मदद कर….
मेरी बात सुनते ही नीति मुस्कुरा कर कहने लगी।
अरे मम्मी ढूंढने की जरूरत नहीं है। वह कल ही मैंने ड्राई क्लीन में दी है।
और रही बात मां के प्यार की तो, मम्मी मैं ज्यादा नहीं तो कुछ-कुछ तो जरूर समझने लगी हूं। और मम्मी वैसे भी अभी आपकी शादी की सालगिरह आ रही है ना….मैं जानती हूं जब आज इतनी बातें उस साड़ी की हो चुकी है तो क्या इस सालगिरह पर आप उसी साड़ी को पहनना चाहेगी ?????
नीति और कुछ कहती उसके पहले ही राज गेट के अंदर आते हुए बोल उठे।
नीति उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि आज मैं तुम्हारी मम्मी की पसंद की ही साड़ी लेकर आया हूं । मुझे उम्मीद ही नहीं बल्कि यकीन भी है कि तुम्हारी मम्मी को मेरी दी हुई यह साड़ी बहुत पसंद आएगी कहकर साड़ी वाली पैकेट राज ने मेरी ओर बढ़ा दी।
मैने जैसे ही पैकेट खोली। मेरा चेहरा खिल सा गया।
उसमें सिल्क की साड़ी थी । जिसका रंग हल्की गुलाबी रंगत लिए हुए था। मैं तुरंत मुस्कुरा कर राज से बोल उठी। राज सच कहूं तो यह साड़ी मेरे दिल को उतनी भा गई है। जितनी आपकी अच्छाई और सच्चाई। वैसे भी राज आज तक आपने जो भी उपहार स्वरूप मुझे दिया है । वह सब मेरे दिल के करीब है।
और हां मैं सालगिरह पर आपकी दी हुई साड़ी ही पहनूंगी कहकर मैं मन ही मन सोचने लगी कोई अपनी मां और जीवनसाथी के सच्चे रिश्ते और सच्चे प्यार को बिना महसूस किए कैसे समझ पाएगा। इसके लिए तो दिल की गहराई में उतरना पड़ता है और वह मैं उतरी भी…..तभी शायद मैं इन दोनों रिश्ते की अहमियत को समझ पाई।
#सिल्क की साड़ी
स्वरचित
सीमा सिंघी
गोलाघाट असम