ये क्या दीदी ये कैसा व्यवहार करते है आप लोग ज्योति के साथ। मैंने तो आपको और आपके व्यवहार को देखकर आपके बेटे पंकज के लिए ज्योति का रिश्ता दिया था। मुझे नहीं पता था आप मेरे भरोसे को इस तरह तोड देंगी। वो तो मै न आती आपके घर तो मुझे पता ही न चलता कि ज्योति के संग ऐसा व्यवहार किया जा रहा है सुमन बोली।
आप तो इतना कुछ झेल चुकी हो अपने ससुराल मे दीदी, जीजा जी का व्यवहार तुम्हारे प्रति अच्छा नहीं था। कितना गंदा व्यवहार करते थे आपके साथ। मैंने तो सोचा था इतना सब झेलने के बाद कम से कम आप अपने बेटे को तो अच्छा संस्कार दी होगीं कि अपनी पत्नी की इज्जत करे। पति के ही भरोसे पर तो एक लडकी ब्याह कर ससुराल आती है।
पति के नाम का मंगल सूत्र और मांग मे सिंदूर लगाती है उसके लम्बी उम्र के लिए उपवास और पूजा पाठ करती है उसके साथ ऐसा व्यवहार, नहीं नहीं इस तरह अपमान सहकर मै ज्योति को यहाँ नहीं रहने दूंगी।
माना कि वो बिना बाप की बेटी है सबकुछ शांत होकर सह रही है, उसने कभी आप लोग की या पंकज की कोई शिकायत नहीं की, लेकिन हर समय उसका निरादर और अपमान, किस बात की सजा दी जा रही है उसे। सुमन लगातार बोले जा रही थी और शकुन चुपचाप सुन रही थी।
ज्योति सुमन के चचेरी नंद की बेटी थी और सुमन और शकुन दोनों का नंद भाभी का रिश्ता था गरीब परिवार से थी ज्योति पिता बचपन में ही जब ज्योति6 बरस की थी तभी देहांततो चुका था एक एक्सीडेंट में।वह ताई ताऊ के घर पल कर बड़ी हुई थी ज्योति बड़ी शांत और सुशील संस्कारी थी वह तो जैसे उसकी मुहं में जुबान था ही नहीं। बी तक पढीथी ।
सुमन और शकुन दोनों ननद भाभी होते हुए भी बहुत पटती थी शकुन जब शादी हुई थी जगदीश से तो वह भी बड़ी गुस्से वाला था बात-बात में शकुन को तेवर दिखता था। अगर जगदीश ने खाना मंगा और तुरंत दे दो यदि 5 मिनट भी लेट हो गया तो जगदीश खाने की थाली उठाकर फेंक देता था।
और चिल्लाता भी था शकुन थरथर थी।सुमन जगदीश की बड़े भाई की बेटी थी उसकी भी शादी हो चुकी थी ।शकुन और सुमन ने खूब अच्छी पटरी बैठती थी जगदीश पत्नी पर बहुत चिल्लाता था। सास भी थी शकुन की शादी के 2 साल बाद ससुर की भी डेथ हो गई थी।
सास भी अकेली थी। जब जगदीश पत्नी को चिल्लाता तो सास बहुत समझती थी देख बहू पर इतना गुस्सा नहीं किया कर नहीं तो कल को वह चलीं जाएगी छोड़कर तो रहना अकेले लेकिन जगदीश सुधारने का नाम ना लेता था। शकुन की सास बताती थी तुम्हारे ससुर जी को भी बहुत गुस्सा आता था
उनको भी उनके बड़े भाई थे वह समझते रहते थे । लेकिन आदत है तो जाती नहीं है इतनी जल्दी। लेकिन इस उम्र मे आकर तेरे ससुर जी थोड़ा ठीक हो गए थे। वही आदत जगदीश की भी पड़ी है बहू उसे नाराज ना हुआ करो धीरे-धीरे को संभल जाएगा।
शुरू शुरू में कुछ दिन तो शकुन जब जगदीश चिल्लाता था या गुस्सा करता था तो समझती थी लेकिन फिर बाद में कभी-कभी जवाब भी दे देती थी। जगदीश का चिल्लाना और उसके ये कहना कि मुझसे जवान ना लड़ाया कर। 2 साल बाद सुकून के एक बेटा हुआ सास कहने लगी अब बच्चा हो गया तो जगदीश का स्वभाव बदल जाएगा
लेकिन यह सब बातें की बातें ही रह गई धीरे-धीरे बच्चा बड़ा होने लगा सुकून ने उसका नाम पंकज रखा। जगदीश किसी फैक्ट्री में सुपरवाइजर था और आते-जाते देर हो जाती थी। आज पंकज का पहला जन्मदिन था। शकुन ने कहा ने कहा से जगदीश सुनिए जी आप थोड़ा जल्दी आ जाएगा पंकज का जन्मदिन है
पंकज की बुआ फूफा और ऐसे ही कुछ लोग घर के आ जाएंगे। अब आते समय मिठाई ले आइएगा । अब रात के 8:30 नहीं आया सब इंतजार कर रहे थे सभी ने खाना पीना शुरू कर दिया जगदीश गरीब 9:00 बजे घर आया तो माँ कहने लगी बेटा आज तो जरा जल्दी आ जाते तेरे बेटे का पहला जन्मदिन था उनके साथ-साथ शकुन भी बोल पडी मैंने आपसे कहा भी था कि थोड़ा जल्दी आ जाना और साथ में मिठाई भी ले आना
लेकिन आप तो बस अपनी मर्जी के मालिक है। चल हट तेरे बाप का घर है क्या जब तू कहे मैं आ जाऊं नौकरी करता हूं मालिक नहीं हूं बेकार की बकवास करती है किसने कहा था तेरे से जन्मदिन मनाने को चल जा अपने काम कर और शगुन को धक्का दे दिया। बस ऐसे ही चलता रहा और ऐसे ही माहौल में पंकज बड़ा होता रहा और फिर एक दिन शंकुन की सास भी इस दुनिया से चली गई।
पंकज बड़ा हो रहा था थोड़ा-थोड़ा समझने भी लगा था और घर में पापा उसकी मम्मी के साथ कैसा व्यवहार करते हैं यह भी देखता रहत देखता रहता। उस नन्हे से बालक के दिमाग में यह सब बातें घर करती गई औरतों से ऐसे ही चिल्ला कर बात करी जाती है वह भी अपने पापा से समा सहमासा रहता था जब भी घर में आते थे जगदीश तो वह दरवाजा के पीछे छिप जाता था । पंकज जैसे ही माहौल में बड़ा हुआ था उसे पापा को कभी अपनी मम्मी से ठीक से बात करते नहीं देखा पंकज पढ़ा लिखा और नौकरी करने लगा। ऐसे ही एक दिन जगदीश जी का मृत्यु हो गई
हृदयाघात से।और परिवार में शकुनऔर पंकज रह गए।पंकज को भी गुस्सा आता था आता था तो शकुन उसको समझा बूझकर शांत करती थी कि देखो बेटा इतना गुस्सा ठीक नहीं है अपने पापा जैसा व्यवहार मत करो।क्योंकि तुम्हारी शादी होगी यदि ऐसा व्यवहार रखोगे तो कैसे कोई लड़की रहेगी तुम्हारे साथ पंकज शांत हो जाता।
पंकज की शादी शकुन के नंद की चचेरी बेटी से हो गई। जगदीश जैसा स्वभाव तो नहीं था लेकिन गुस्सा तो पंकज को भी आता था आखिर खून तो वही था ना। एक दिन पंकज काम से घर लौटा तो बहुत गर्मी थी घर की घंटी बजाई तो अपनी ज्योति ने दरवाजा खोलने में थोड़ी देर लग गई तब अपनी बाथरूम में थी। शकुन पड़ोस मे पूजा मे गई थी इतनी देर लगती है दरवाजा खोलने मे, मैं बाथरूम मेंथी,,,,,।।
अच्छा अब जबान भी लडाती है।तभी शकुन आ गई उसने देखा की ज्योति जमीन पर गिरी है। क्यों दिया तुमने उसको धक्का दरवाजा देर से खोला मैं कब से घंटी बजा रहा हूँ बाहर बहुत गर्मी थी। देख पंकज तू अपने पापा की तरह हरकतें ना कर नहीं तो हम दोनों और बहू दोनों छोड़कर तुम्हें चल जाएगें।तेरे नाम का मंगलसूत्र पहन कर तेरी भरोसे ही अपने मां-बाप को छोड़कर इस घर में आई है। बेटा तेरे बाप को तो सही न कर पाई पर तुम ठीक हो जाओ।
और इसपे गुस्सा उतरेगा यह ठीक नहीं है बेटा तेरे बाप को तो सह नहीं कर पाई लेकिन तेरी बदतमीज़ी बहू पर मैं बर्दाश्त नहीं करूंगी समझे मां यह औरतें दिन भर घर में करती क्या है, तुमने क्या कहा तुमने और करती क्या है औरत के बिना आज की पुरुष का वजूद ही क्या है ।
एक मां ने तुझे पैदा किया वह भी औरत थी और एक पत्नी ने तुम्हें सहारा दिया वह भी औरत है । और एक पत्नी एक औरत ही तुम्हें आप का दर्जा देगी वह भी एक औरत है तुम पुरुष होकर पिता बनते एक औरत से ही होते हो इसलिए औरत की इज्जत करना सीखो। चल बहू। बहू से अपनी गंदी व्यवहार की माफी मांग और अब आगे से सब कुछ नहीं करेगा इस बात की गारंटी दे।
और औरत की इज्जत और उसका सम्मान करना सीख समझा पंकज। कुछ देर चुपचाप खड़ा रहा है शकुन बोली चल ज्योति से चल माफी मांग ,पकंज से चुपचाप खड़ा रहा है सही कह रही हो मां पापा ने आपके संग बहुत गंदा व्यवहार किया वही व्यवहार में भी ज्योति के संग करूंगा तो हमारे उनमें फर्क क्या रह जाएगा। मुझे माफ कर दो ज्योति और मुझे माफ कर दो मां मैं ऐसा कभी कुछ नहीं करूंगा तुम्हारे भरोसे को अब मैं कभी नहीं तोडूगां। माफ कर दो माँ आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा। मै एक अच्छा इंसान बनकर दिखाऊँगा माँ। शकुन ने बहू बेटे को गले से लगा लिया।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
1जून