बहु की समझदारी – मधु वशिष्ठ

पब्लिक डीलिंग वाले सरकारीऑफिस में  नीता ,शशि और मैं  एक कमरे में ही बैठते थे लेकिन फुर्सत के क्षण सिर्फ लंच ब्रेक में ही मिलते थे। कमरा बड़ा होने के कारण और सहकर्मी भी हमारे ही कमरे में लंच करने के लिए आते थे। मोहन जी और नितिन जी के सहकर्मी भी उसी कमरे में दूसरी तरफ अपना लंच करते थे ।  सब अपना लंच कर ही रहे थे  कि ,  मोहन जी का फोन  बजा ,उन्होंने फोन उठाया, और बोले —-“अरे यार “गलती हो गई ,”मैं तो बताना ही भूल गया था “तुम्हारी अंगूठी तो मेरी गाड़ी में ही गिर गई थी ,हां हां !मेरे पास है,” सॉरी सॉरी “तुम परेशान मत हो ,रो मत ,शाम को ले आऊंगा। —–  क्या हुआ ,मोहन जी? मेरे साथ बैठी मीरा बोली ।

  “कुछ नहीं “घर में निधि की अंगूठी खो गई थी –और वह परेशान होकर रो रही थी। वही महंगी डाइमंड वाली, “जो तूने फंड निकालकर ली थी,? सिंह साहब बोले!  —-“हां”।  मोहन जी ने जवाब दिया।  —मीरा बोली ! अंगूठी मिलते ही आपने बताया क्यों नहीं वाइफ को ?

“लेकिन मुझे अंगूठी मिली नहीं है, मीरा जी”। क्या?” खो गई “? सिंह साहब चौंके !  यह औरतें भी ना,–कमाल है! कमाना तो आता नहीं है, घर में बैठकर सिर्फ नुकसान करती है ,कल मेरी वोट्टी ने भी इतने महंगे टी सैट के दो कप तोड़ दिए थे।  बहुत सुनाया उसे, बाकि  भड़ास वो अब निकाल रहे थे। अंगूठी नहीं मिली है तो तूने झूठ क्यों बोला भाभी को? विपिन बोला? ——- तो! मोहन जी बोले — रोने देता क्या? दुखी होने देता उसे ?सवेरे  उठती है, बच्चों को देखना घर को देखना, मेरे मम्मी डैडी को देखना ,यह सब वही तो करती है, मम्मी को समय पर दवाई ना मिले तो मेरी मम्मी का क्या हाल हो जाए ,मुझे पता है । खाना ,”डैडी के लिए अलग से बनता है”  परहेज़ वाला।घर की मालिन, बावर्ची क्या-क्या नहीं  है वह  ?  मैं घर जाता हूं तो पूरा घर सुगंध से भरा होता है, फूल मैंने तो नहीं लगाए  ना ?

बच्चे जब अपनी क्लास में फर्स्ट आते हैं ,और मैं उनकी  पेरेंट्स टीचर मीटिंग में से सिर उठा कर आता हूं, बच्चे मैंने तो नहीं पढ़ाए  ना?     “हां यार”, फर्क तो पड़ता ही है ,विपिन जी बोले , इतनी महंगाई में अगर एक ही आदमी कमा रहा हो तो मुश्किलें तो आतीं हैं।   विपिन की पत्नी किसी प्राइवेट कंपनी में बहुत ऊंचे पैकेज पर थी , विपिन हमेशा ब्रांडेड कपड़े  पहनकर बढ़िया कार में ऑफिस आता था ।”बोला ”  मुझे तो यह भी नहीं पता प्रिया कब क्या खरीदती है ?और क्या खोती है?  यह सुनकर मोहन जी बोले —–जमीन तो हमारी भी बहुत है ,और मेरे डैडी की पेंशन भी कम नहीं है ।निधि अनपढ़ भी नहीं है। चाहे तो  कुछ भी कर सकती है ,लेकिन संस्कृति सिर्फ निधि जैसी लड़की ही संभाल सकती है ।घर बहुओं की समझदारी से ही चलता है।

मुझे आज भी याद है अपनी दादी मां की गोद में बैठ कर के बढ़िया से बढ़िया गरम खाना खाना। और मेरी मां हम सबको खाना देते हुए हाथों में मेहंदी लगा कर माथे पर बिंदिया लगा कर, रंग बिरंगी साड़ी पहन कर, सुंदर बन कर त्योंहारों  में पूरे घर के लिए दुआ मांगती रहती थी ।  अब जबकि मैं घर जाता हूं तो देखता हूं, निधि उसी परंपरा को निभा रही है। मेरे बच्चे आज भी अपनी दादी की गोदी में बैठे होते हैं ,और निधि वैसे ही घर में काम करते हुए हर त्योहार उमंग और उत्साह से मनाती है । मेरे सारे रिश्तेदारों का आज भी वैसे ही  स्वागत होता है , जैसे तब होता था।

मेरा घर और मेरे घर की हर परंपरा उसी की बदौलत जिंदा है।  मेरे घर के पितर भी उसके कारण तृप्त होते होंगे। मोहन जी बेहद भावुक हो उठे थे।  ख्यालों में तो विपिन जी भी खो गए थे, उन्हें याद आया कि अपनी माता जी के श्राद्ध में उन्होंने पंडित जी को सिर्फ पैसे ही दे कर  कहा था कि जो मन करे वह खा लेना। प्रिया तो नाइट ड्यूटी करके 4:00 बजे घर में आई थी, और उसके ऑफिस आने तक तो वह सो ही रही थी ।सिंह साहब भी सेंटी हो चले थे ,बोले “यार सही कह रहा है “मैं भी आज नया टी सैट लेकर जाऊंगा और वोट्टी को बोलूंगा लै  तोड़ ऐन्नू”। हम सब हंस पड़े ।

मोहन जी बोले तभी तो हम में से अगर कोई भी अपनी बेटी से पूछे कि बड़े होकर के तू क्या बनना चाहती है ?  वह कुछ भी बनना चाहती हो,  लेकिन हाउसवाइफ नहीं। यही सच है , अगली जेनरेशन  शायद ही इतनी भाग्यवान होगी कि उसे कोई हाउसवाइफ मिले।

दो बज रहे थे ,बाहर पब्लिक  के शोर मचाने की आवाज बढ़ती जा रही थी ।हम सब हाथ धोने को उठ गए ।श्रेया ने पूछा ,मोहन जी शाम को जब आपकी वाइफ पूछेंगी अंगूठी कहां है? तो आप क्या कहोगे?  मोहन जी बोले ।” कुछ भी”! वह मान जाएंगी ? “पता नहीं “,पर हां, यह तो जान जाएगी कि उसके सामने” मेरे लिए “,अंगूठी की कीमत, कुछ भी नहीं है।

शाम को घर जाते हुए जब बायोमैट्रिक अटेंडेंस लगाने के लिए हम बाहर खड़े थे तो मोहन जी ने खुश होकर बताया निधि की अंगूठी घर पर ही मिल गई है  ।श्रेया बोली ,मैडम ,अगर मुझे भी ऐसा ही पति मिले ना ,तो नौकरी छोड़कर मैं भी हाउसवाइफ बन जाऊं ।बायोमेट्रिक पर अंगूठा लगाते हुए  कुछ ख्यालों में तो हम भी थे।

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

error: Content is protected !!