जिंदगी की दूसरी पारी – मंजू ओमर

पापा आप तो आप खाली हो नौकरी से रिटायर हो चुके हो फिर क्यों सुबह-सुबह नहा धोकर तैयार होकर बैठ गए हो। आराम से उठिए इतनी जल्दी उठ कर सबको परेशान करने की क्या जरूरत है। आपके साथ-साथ मम्मी को भी सुबह उठना पड़ता है। हां बेटा सही कह रहा है लेकिन 40 साल नौकरी की,

यह रोज सुबह उठकर समय से तैयार होकर काम पर निकलना होता था, लगता है अब तो हम बेकार हो गए हैं समय काटना मुश्किल लग रहा है। अरे समय का क्या समय तो आराम से कट ही जाएगा। अब नौकरी से छुट्टी मिल गई है तो घर के काम करा करिए सामान लाना

जो जरूरत हो वह ले आइए और भी घर के बहुत से कम होते हैं, उनको करके अपना समय पास करिए । राजेंद्र जी और बेटे रजत में आपस में वार्तालाप चल रहा था। 

              राजेन्द्रजी बैंक में मैनेजर थे जिससे वह अब रिटायर हो चुके थे। लेकिन वह अभी स्वीकार ही नहीं कर पा रहे थे कि मैं नौकरी से रिटायर हो चुका हूं ।

दिन भर घर में उनका मन नहीं लगता था। ज्यादा घर में बैठे रहने की आदत पहले से भी नहीं थी । घर में पत्नी सुधा बेटा रजत और बहू दिव्या और एक बेटी रिचा थी रिचा की शादी हो गई थी वह अपने ससुराल में थी। और बेटे की शादी के भी अभी 1 साल हो गया था घर में चार लोग थे।

रजत भी बैंक में क्लर्क की नौकरी करता था। और सास बहू घर में रहती थी। अभी तक तो सब ठीक था लेकिन राजेन्द्र जी जब से रिटायर हुए दिन भर घर पर ही रहते हैं । इस बात से सुधाजी और बहू को परेशान रहने लगी। अब सुधा जी घंटे घंटे अपने रिश्तेदारों से सहेलियों से बात नहीं कर पाती थी।

और बाहर भी घूमती रहती थी अब जब पति दिन भर घर में रहते थे सुधाजी को उनके पास भी बैठना पड़ता था । घर में सास ससुर की कम मौजूदगी से बहू दिव्या भी खुश रहती थी इससे सास के टोका टोकी सी बची रहती थी। राजेंद्र जी की थोड़ी-थोड़ी देर में चाय पीने की आदत थी ,दिन में कई बार चाय पी लेते थे ।

थोड़ी देर में आवाज लगाते या तो बहू को या पत्नी को की चाय बना दो। एकाध बार तो ठीक है चलता है लेकिनअब सुधा को परेशानी होने लगी थी। एकाध हफ्ता तो ठीक चला फिर एक दिन सुधा ने सुबह सुबह केटली भर कर चाय बना दी और उसमें भरकर राजेन्द्र जी को पकडा दिया

ये लिजीए अपनी चाय की केटली जब मन करे तो पिक करिये। अब बार बार कौन बनाएगा। क्या हम और दिव्या दिन भर चाय ही बनाते रहे क्या ।लेकिन तुम्हे तो पता है न सुधा कि मुझे केटली मे रखी हुई चाय पसंद नहीं है।तो क्या करे हम। तुम्हारा रिटायर मेटं क्या हुआ हम लोगो की तो मुसीबत ही हो गई। सारी आजादी छीन गई।

           ऐसे ही एक दिन दिव्या को कह दिया इतनी देर से क्यों उठाती हो सो कर इतनी देर तक सोते हुए घर के बहू बेटे अच्छे नहीं लगते हैं। फिर राजेंद्र जी ने पूछ लिया कि आज खाना शाम को क्या बन रहा है। तो सुधा जी ने कहा कि आज कोई सब्जी नहीं है घर में आवाज दी बेटा रजत थोड़ी सब्जी ले आओ बाजार से ,

अरे मम्मी पापा तो घर में रहते हैं आराम करते रहते है।अब मुझे आराम दो पापा से कह दो इतना घर का काम करें राजेंद्र जी सुन रहे थे उनको अब नौकरी कर पर थे तब और रिटायरमेंट की बात की जिंदगी में फर्क समझ आने लगा था। फिर भी कुछ न कहकर सुधा जी से बोले आज मटर का पुलाव बना दो दही को पुदीना डालकर छौकं दो वही खाया जाएगा ।

अब सब्जी लेने कौन जाएगा कल आएगी सब्जी। पुलाव से कैसे होगा जी पता है ना रजत पुलाव नहीं खाता जाकर सब्जी ले आएं क्या कर रहे हैं बैठे-बैठे। 

                क्या कर रहे हैं बैठे-बैठे यह वाक्य दिन में वह कई बार सुन लेते थे राजेन्द्रजी। उनको अब अपनी नौकरी वाली जिंदगी याद आना आने लगी सच बात है जब तक इंसान नौकरी करता है उसकी इज्जत कुछ और होती है और जो रिटायर हो जाता है तो इज्जत कुछ और क्या इज्जत रहती है इज्जत रहती ही नहीं है ।

राजेंद्र जी खाना खाकर लेटे तो सोचने लगे इस तरह से तो पड़े पड़े जिंदगी बेकार हो जाएगी इज्जत और समाप्त हो जाएगी नकारा हो जाऊंगा मैं। इसी उधेडबुन में रात को बाथरूम जाने के लिए उठे तो बहू बेटे के कमरे से आवाज आ रही थी । थोड़ा ठिठक गए बहू कह रही थी रजत अब आप पापा दिन में घर में रहते हैं तो बड़ी उलझन रहती है आजादी सी नहीं

रहती। पहले की तरह पहले अच्छा था दिन भर पापा घर में रहते नहीं थे सुबह-सुबह चले जाते थे घर से रात 8:00 बजे तक आते थे उसके बाद खाना खाया और सो जाते थे । मम्मी भी इधर-उधर रहती थी अब पापा के दिन में घर में रहने से प्रॉब्लम होने लगी है सुना तो जैसे उनको अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ।

है इतने सालों की नौकरी की और अपनी रिटायर हो गया हूं तो घर में नहीं रहूंगा तो कहां जाऊंगा । बड़ी उलझन होने लगी उन्हें अपने को नकारा साबित होने से पहले मुझे कुछ करना पड़ेगा सोच राजेन्द्र कुछ सोच। 

               आज घर के बाहर पार्क में किसी बेंच पर बैठे थे राजेंद्र जी आसपास के दो-चार लोग और आ गए पास बैठे बैठे बोल क्या बात है गुप्ता जी आज बड़ी चुप चुप से हैं। राजेंद्र जी के तंद्रा टूटी, नहीं कुछ नहीं कुछ तो है जो आप किसी और दुनिया में चले गए है। इससे आपको हम लोगों के लोगों के आने की भी एहसास नहीं हुआ।

तभी राजेंद्र जी बोल भाई आप लोग बताओ रिटायरमेंट के बाद कैसी जिंदगी चल रही है। पांडे जी बोले बढ़िया चल रही है घर परिवार के साथ समय व्यतीत हो रहा है। जयसवाल जी बोले अरे अब चालीस साल नौकरी की है क्या  अब जिंदगी भर काम ही थोडे न करता रहूगां।

शर्मा जी बोले नहीं यार घर में मन नही यार घर में नहीं लगता है जैसे मैं किसी काम का नहीं रह गया हूं । बेकार सामान सा हो गया हूं सब ने मिलकर बोला हां यह तो है तभी चावला जी बोले अभी हम लोग काम करने में समर्थ हैं क्यों न हम लोग जिंदगी की दूसरी पारी नहीं खेल  सकते।

उनमें से एकाध को छोड़ कर दो तीन लोगों ने हामी भरी।राजेंद्र जी बोले तो क्यों नहीं अपनी अपनी फील्ड का कोई काम ढूंढा जाए जिससे समय भी पास हो जाए और पैसों की इनकम हो तो घर में इज्जत भी तो हो। फिर क्या था सब ने काम ढूंढने की कोशिश करनी शुरू कर दी

और फिर क्या था राजेन्द्रजी बैंक से रिटायर थे अखबार और पेपर देखते रहे और उन्हें जल्दी किसी से यह क्या अकाउंट का काम देखने को मिल गया। 

           फिर क्या था राजेंद्र जी 2 दिन बाद घर में सुबह-सुबह नाश्ता करके तैयार हो गए।  पत्नी सुधा जी ने पूछा कहां जा रहे हैं जल्दी जल्दी तैयार होकर ,राजेंद्र जी बोले दूसरी पारी खेलने इस तरह से घर में बैठकर तो मैं एक बेकार सामान की तरह होकर रह जाऊंगा। पता नहीं ईश्वर ने कितनी जिंदगी लिखी है क्यों घर में पड़े पड़े

तो मैं अपनी इज्जत अपनी नजरों में और खत्म कर दूंगा इसलिए मैंने एक काम देख लिया है वहीं जाऊंगा आज से 4 घंटे तक उनका अकाउंट का काम देखूंगा कुछ लोगों से मिलना जुलना होगा और मेरा समय अच्छे से कट जाएगा । तुम दोनों सास बहू को भी मेरे घर में न रहने से सुकून मिलेगा नहीं तो मैं तो समय से पहले ही बीमार हो जाऊंगा। 

                जीवन की दूसरी पारी खेलने जा रहा हूं सुधा जी मुस्कुराने लगी और दिव्या भी रसोई में खड़ी-खड़ी ससुर जी की बातें सुन रही थी वह भी मन ही मन मुस्कुराने लगी खुश है और मैं भी खुश दिनभर घर में घुसे रहने से अच्छा है अपना कहीं उपयोग करूँ। 

         दोस्तों दोस्तों बताइएगा कि राजेंद्र जी का यह निर्णय सही था या नहीं। 

 मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

27 मई

error: Content is protected !!