बिस्तर पर लेटे हुए ही गला सूखने लगा, घबराहट सी बढ़ने लगी।
पास में रखा पानी पिया तो उल्टी के कारण मन खराब हो रहा था किसी तरह से बॉथरूम तक पहुंची, उल्टी से सारा बाथरूम सब कुछ खराब हो गया था, बहुत मुश्किल से खुद को संभाला, किसी तरह से आकर बिस्तर पर लेटी, हल्के चक्कर अभी आ रहे थे परंतु चक्कर के साथ रह रहकर मन में एक ही विचार आ रहा था डस्टबिन, कूड़ादान।
बिस्तर पर लेटी मीना के कपड़ों से शायद चादर भी गंदी हो गई थी जो कि उसे बदलनी थी परंतु हिम्मत नहीं हो रही थी। अब यह ग्लानि थी या समय के साथ जो बोओगे वही काटोगे की कहावत चरितार्थ हो रही थी कह नहीं सकते।
आइए आपको बीमार मीना के बारे में बताएं। मीना रिटायर्ड प्रिंसिपल, जवानी में सुंदरता अहंकार, सत्ता सब कुछ उसके पास था। उनके पति डॉक्टर शेखर सरकारी अस्पताल में बहुत नामी डॉक्टर से। शेखर के पिता की मृत्यु के बाद उनकी माताजी जानकी देवी ने ही बहुत मुश्किलों से अपने गहने तक बेचकर शेखर को पढाया लिखाया और डॉक्टर बनाया।
हालांकि शेखर को अमेरिका में भी नौकरी करने का न्योता मिला परंतु अपनी माता जी के कारण वह अमेरिका जाने की बजाय सरकारी नौकरी करके ही संतुष्ट था। अस्पताल के पास ही उसने अपना एक घर बनवा लिया था। शेखर की माता जी के कहने पर है शेखर ने मीना से विवाह किया था।
मीना शेखर के सरकारी अस्पताल के सीनियर डॉक्टर की इकलौती बेटी थी और समीप के ही स्कूल में सीनियर टीचर थी। उसके सपने उसके पिता के जैसे ही बड़े थे। उसने पूरी कोशिश करी कि
शेखर अमेरिका में चला जाए । परंतु शेखर अपनी मां को छोड़कर कहीं जाने को तैयार नहीं था। बस यही एक कारण था की मीना की जिंदगी की सबसे बड़ी विलेन उसकी सास ही थी। हालांकि शेखर की मां ने कभी भी मीना के बारे में कुछ भी गलत बोलकर शेखर को भड़काने की कोशिश नहीं कि वह खुद ही घर के सारे काम करती थी।
मीना के बेटे रजत के होने के समय जानकी जी ने मीना को जमीन पर भी पैर नहीं रखने दिया और पोते को भी खुद ही बहुत अच्छे से संभाला। शेखर सब कुछ देखता समझता था और शेखर का प्यार अपनी मां के प्रति और भी बढ़ता जा रहा था और यही बात मीना को चुभती थी।
जिस दिन शेखर ने मीना को कहा कि मां सारा दिन रजत को कितने अच्छे से संभालती है ,बस उस दिन से ही मीना ने रजत को अपने स्कूल के पास वाले क्रैच में डाल दिया और बाद में भी एक आया को रजत की देखभाल के लिए नियुक्त कर दिया था वह पूरी कोशिश करती थी कि रजत अपनी दादी के पास ना जा सके।
कुछ उपेक्षा से और कुछ उम्र भी थी शेखर की माताजी जानकी जी की तबीयत अब खराब ही रहने लगी थी। बीपी शुगर अस्थमा और भी बहुत सी बीमारियां उन्हें हो गई थी। घुटनों का दर्द भी बढ़ता जा रहा था हालांकि शेखर उनका पूरा ख्याल रखता था परंतु फिर भी बीमारी स्वाभाविक रूप से जानकी जी को जकड़े हुए थी। मीना जानकी जी के कमरे की तरफ भी नहीं जाती थी और ना ही रजत को वहां पर जाने देती थी।
वह रजत को यही कहती थी कि उसे कमरे में से दवाइयों की डस्टबिन जैसी बदबू आती है पता नहीं कब दादी खांसती,उल्टी करती हैं, कैसे रहती हैं उसे कमरे में तू जाएगा तो तुझे इंफेक्शन हो जाएगा। रजत कभी-कभी शेखर के साथ दादी के कमरे में चला जाता था परंतु उसे पता था बाद में मीना से डांट खानी पड़ेगी।
कई बार जानकी जी की तबियत बिगड़ने पर शेखर जानकी जी के साथ ही सो जाता था, मीना उस समय सबको यही कहती थी कि उसकी सास शेखर को अपने पास ही सुलाती है और भी न जाने क्या-क्या वह जानकी जी के लिए कहती थी परंतु जानकी जी और शेखर उसकी किसी बात का ना विरोध करते थे और ना ही कोई जवाब देते थे।
शेखर को जब लगा कि उसके जाने के बाद उसकी माताजी बहुत बेचैन हो जाती है रजत और मीना तो स्कूल चले जाते हैं। अटेंडेंट कभी भी छुट्टी कर जाती है तो शेखर ने अपने अस्पताल में ही एक कमरे में जानकी जी का इंतजाम कर दिया था और कई बार तो अब वह अस्पताल में ही रहने लगा था।
घर में रजत और मीना ही रहते थे और मीना रजत को दादी के खिलाफ ही समझती रहती थी। रजत कई बार अपने पापा के साथ दादी के पास जाता था तो जानकी जी उससे बहुत प्यार करती थी परंतु तब रजत 12 वर्ष का ही होगा,
जब जानकी जी की अस्पताल में मृत्यु हुई। रजत उनकी मृत्यु का समाचार सुनकर बहुत रोया था जाने उसे खुद दुख हुआ था या कि अपने पापा को रोता देखकर वह रो रहा था।
मां की मृत्यु के बाद भी डॉक्टर शेखर अपने मरीजों में ही उलझे रहते थे और घर आने के बाद मीना से सिर्फ जरूरत भर की बातें करते थे। रजत की पढ़ाई के लिए वह चिंतित थे और 12वीं के बाद रजत भी एमबीबीएस करने के लिए दिल्ली से जयपुर मेडिकल कॉलेज चला गया था।
जयपुर में ही उसने अपनी सहपाठी शालिनी से विवाह करने की इच्छा जताई और डॉक्टर शेखर और मीना ने उन्हें विवाह की अनुमति दे दी दिल्ली में विवाह हुआ और फिर दोनों जयपुर चले गए। मी की अपने स्कूल की व्यस्तताएं थी और डॉक्टर शेखर की अस्पताल की। एक दिन अस्पताल में ही डॉक्टर शेखर को हार्ट अटैक हुआ
और उनकी मृत्यु हो गई। शालिनी और रजत दोनों जयपुर से आए। शालिनी ने रजत से कहा कि पापा की मृत्यु के बाद अब मम्मी अकेली कैसी रहेगी, यूं भी मम्मी अब कुछ महीने में स्कूल से भी सेवानिवृत होने वाली है तो क्यों ना हम उन्हें अपने साथ जयपुर ले जाएं या कि हम ही दिल्ली में किसी अस्पताल में नौकरी ढूंढे। मीना सुन रही थी उसके बेटे रजत ने कहा ‘अरे नहीं, मेरी मम्मी को अकेले रहने में कोई परेशानी नहीं होती वह तो उल्टा खुश रहती है पापा तो यूं भी अधिकतर समय अपने अस्पताल में ही रहते थे। मेरी मम्मी को अकेला रहना अच्छा लगता है। क्रिया के कुछ समय बाद ही दोनों चले गए।
एक बार फिर दो दिन के लिए मीना की सेवानिवृत्ति के समय आए और फिर औपचारिक बातें करके वापस चले गए।
अब समय के साथ मीना को भी बीपी शुगर अर्थराइटिस सारी बीमारियां घेर रही थी। आज उसने बहुत दर्द होने पर जब एक पेनकिलर खाई तो उसका बीपी डाउन हो रहा था चक्कर आ रहे थे और वह बेहोश होने को थी। वैसे ही उल्टी करके उसका बाथरूम पलंग सब खराब हो गया था, अपनी सास जानकी की ऐसी हालत के समय वह उन्हें डस्टबिन कहती थी ना ,आज खुद ही वह इस हालत में थी। घबराकर बेहोशी की हालत में उसने रजत को और अपने फैमिली डॉक्टर को फोन करा। डॉक्टर ने वीडियो कॉल से उन्हें देखा और उन्हें समीप रखी एक गोली खाने को बोला और कहा जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस से उन्हें अस्पताल भी लाया जा सकता था। मीना ने गोली खाई और बिस्तर पर उसी हालत में सो गई थी।
रात को डोर बेल बजी तो उसने दरवाजा खोला। सामने रजत और शालिनी खड़े थे शालिनी ने मीना का हाल देखकर उन्हें प्यार करते हुए उनके बिस्तर साफ कर बाथरूम साफ करा और उन्हें गुनगुने पानी से नहला कर नई चादर पर सुलाया। शालिनी ने कहा अब आप अकेली नहीं रह सकती हो ,चाहे तो हम दोनों नौकरी छोड़कर यहां आए या कि आप हमारे साथ जयपुर चलोगी यह फैसला करो? मीना की आंखों से अविरल अश्रु की धारा बह रही थी और वह शालिनी को आशीर्वाद दे रही थी और जानकी जी की फोटो के सामने हाथ जोड़ते हुए उनसे अपने किए की क्षमा मांग रही थी हालांकि उसे पता था जानकी जी इतनी अच्छी है उन्होंने उसे क्षमा तो कर ही दिया होगा,तभी तो उन्हें ऐसी बहू नहीं मिली जो कि उन्हें डस्टबिन समझ रही हो। शालिनी प्यार से मीना जी के आंसुओं को पहुंचती हुई कह रही थी मम्मी घबराओ मत हम अब आपको कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा